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Ayodhya Verdict: ओवैसी के बयान पर हिंदू-मुस्लिम पक्षकार बोले- उनकी बातों का कोई महत्व नहीं देता

News18 Uttar Pradesh
Updated: November 11, 2019, 9:52 AM IST
Ayodhya Verdict: ओवैसी के बयान पर हिंदू-मुस्लिम पक्षकार बोले- उनकी बातों का कोई महत्व नहीं देता
ओवैसी के बयान पर हिंदू-मुस्लिम पक्षकार (फाइल फोटो)

सत्येंद्र दास कहते हैं कि माहौल खराब करके राजनीति करना उनका उद्देश्य. मुसलमानों को भड़का कर राजनीति करना ही ओवैसी का उद्देश्य है. वहीं बाबरी पक्षकार इकबाल अंसारी ने कहा कि उनको नहीं जानता उनका नाम नहीं लेता वह क्या कहते हैं और क्या नहीं.

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अयोध्या. अयोध्या (Ayodhya) पर 9 नवंबर को आए ऐतिहासिक फैसले (Historical verdict) के बाद ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) के बयान को लेकर अयोध्या में राम जन्म भूमि के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास और बाबरी पक्षकार इकबाल अंसारी ने ओवैसी पर कड़ा हमला बोला. इसी क्रम में राम जन्म भूमि के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा कि ओवैसी ना मुस्लिमों के हैं और ना ही हिंदुओं के.

ओवैसी की बातों का कोई महत्व नहीं- आचार्य सत्येंद्र दास

उन्होंने कहा कि ओवैसी की बातों का कोई महत्व नहीं देता, मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र में व सांसद जरूर हो गए हैं लेकिन उनके अंदर गंभीरता नहीं है. वो सिर्फ विरोध करना ही जानते हैं. सत्येंद्र दास कहते हैं कि माहौल खराब करके राजनीति करना उनका उद्देश्य. मुसलमानों को भड़का कर राजनीति करना ही ओवैसी का उद्देश्य है. वहीं बाबरी पक्षकार इकबाल अंसारी ने कहा कि उनको नहीं जानता उनका नाम नहीं लेता वह क्या कहते हैं और क्या नहीं. अंसारी आगे कहते हैं कि मैं अयोध्या का पक्षकार हूं. मैं अपनी बात करता हूं. इस फैसले से पूर्ण रूप से संतुष्ट हूं. मैंने पूरी दुनिया के सामने स्वीकारा है.

कुछ लोग सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं- इकबाल अंसारी

बाबरी पक्षकार इकबाल अंसारी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला किया है मैं उसका सम्मान कर रहा हूं. कोर्ट हमें 5 एकड़ की जमीन दी है वह तय करेगी कि हमें कहां जमीन देगी. उस जमीन का क्या करना है यह हम तय करेंगे, लेकिन हम ऐसा कोई काम नहीं करेंगे जिससे सौहार्द बिगड़े. उन्होंने कहा कि जमीन हम लेंगे और देश में अमन चैन कायम रहे ऐसा कार्य करेंगे. हम सौहार्द बनाने का काम करते हैं, लेकिन कुछ लोग जरूर सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं.

विवादित जमीन रामलला विराजमान को दी गई

बता दें कि 9 नवंबर सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में अयोध्या रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में विवादित जमीन रामलला विराजमान को देने की बात कही है. वहीं, सुन्नी वक्फ बोर्ड को पांच एकड़ जमीन अयोध्या में कहीं भी देने का आदेश दिया गया है.
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सुप्रीम कोर्ट में 40 दिन तक चली थी सुनवाई
बता दें कि सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने अयोध्या विवाद पर लगातार 40 दिन तक सुनवाई के बाद 16 अक्टूबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था. फैसला पढ़ते हुए सीजेआई गोगोई ने निर्मोही अखाड़ा और शिया वक्फ बोर्ड के दावे को खारिज कर दिया. साथ ही उन्होंने कहा कि हिंदू पक्ष ने जिरह के दौरान ऐतिहासिक साक्ष्य (सबूत) पेश किए. उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि आस्था के आधार पर जमीन के मालिकाना हक पर फैसला नहीं किया जाएगा.

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First published: November 11, 2019, 9:52 AM IST
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