कैसे बाबरी मस्जिद गिरने के साथ कल्याण सिंह की सरकार चली गई थी?

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह (फाइल फोटो)
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह (फाइल फोटो)

अनिल स्‍वरूप ने कहा कि कल्याण सिंह (Kalyan Singh) को बाबरी मस्जिद (Babri Masjid) विध्वंस के लिए जिम्मेदार माना जाता है. लेकिन मुझे इसके बारे में पहले से जानकारी थी. मुझे हैरानी हो रही है कि इसे पाठकों के साथ साझा करना चाहिए या नहीं क्योंकि कुछ निजी वार्तलाप इसमें हैं.

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  • Last Updated: September 30, 2020, 10:08 AM IST
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अयोध्या (Ayodhya) में बाबरी मस्जिद (Babri Masjid) गिराए जाने में पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह (Kalyan Singh) को मुख्य दोषी माना जाता रहा है. लेकिन उनके अधिकारी अनिल स्वरूप का कहना है कि उस दिन क्‍या हुआ था, उन्‍हें इस बारे में पहले से जानकारी है. अनिल स्वरूप बाद में शिक्षा मंत्रालय में सेक्रेटरी के पद से रिटायर हुए थे. उस दिन के बारे में उन्होंने अपनी किताब एथिकल डिलेमाज ऑफ़ ए सिविल सर्वेंट (Ethical Dilemmas of a civil servant) के एक चैप्टर में बताया है. उन्होंने कहा कि बाबरी मस्जिद पर चैप्टर लिखते समय मुझे दुविधा का सामना करना पड़ा.

अनिल स्‍वरूप ने कहा कि कल्याण सिंह को विध्वंस के लिए जिम्मेदार माना जाता है लेकिन मुझे इसके बारे में पहले से जानकारी थी. मुझे हैरानी हो रही है कि इसे पाठकों के साथ साझा करना चाहिए या नहीं क्योंकि कुछ निजी वार्तलाप इसमें हैं. क्या मुझे निजी तथ्यों को सार्वजनिक करने के उद्देश्य से निजी बातचीत को सार्वजानिक मंच पर लाना चाहिए.
बाबरी मस्जिद 19वीं सदी में हिन्दुओं और मुस्लिमों के बीच विवाद की एक हड्डी थी. विवादित ढांचा मुगल सम्राट बाबर के कहने पर 1520 से 29 के बीच मीर बाकी द्वारा बनाया गया था.


समाई मानसिंह के सिटी पैलेस रखा है प्रमाण


हिन्दुओं के अनुसार मीर बाकी ने वहां पहले से बने हुए राम मन्दिर को तोड़ दिया और राम का जन्म वहीं हुआ था. जयपुर के महाराजा समाई मानसिंह के सिटी पैलेस म्यूजियम में कापड द्वार कलेक्शन है. इसमें बाबरी मस्जिद का एक स्कैच है जिसमें बाबरी मस्जिद का खुला मैदान और तीन गुंबद हैं. आंगन को जन्मस्थान और राम चबूतरे के रूप में दिखाया गया है.

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अनिल स्वरूप ने लिखा, 'बीजेपी ने बाबरी मस्जिद की जगह राम मंदिर बनाने का अभियान जोर-शोर से चलाया था. इसके बाद बीजेपी कल्याण सिंह के नेतृत्व में यूपी में सत्ता पर काबिज हुई और मुझे सूचना और जन कल्याण विभाग का डायरेक्टर बनाया गया था. कल्याण सिंह ने सही मायने में अपना काम संभाला था. वह निश्चित रूप से राम मंदिर मुद्दे के बारे में चिंतित थे, लेकिन पद संभालने पर, उन्होंने ईमानदार और उद्देश्यपूर्ण शासन देने के इरादे स्पष्ट कर दिए थे.'

अच्‍छी सरकार चलाना चाहते थे कल्‍याण सिंह
आगे उन्होंने कहा कि कल्याण सिंह अच्छी सरकार चलाने के लिए बेहतरीन अफसरों को ऊंचे पदों पर तैनाम कर चुके थे और डिलीवरी देने और सुधारात्मक कार्यों के लिए वह प्रतिबद्धता दिखा रहे थे. उन्होंने अच्छा काम करने की नीतियों में कमी नहीं छोड़ी. उन्हें अपने साथ काबिल अफसर भी मिले थे. 2019 में सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट में कहा गया कि कल्याण सिंह अन्य पार्टियों के नेताओं को बाबरी मस्जिद गिराने के लिए साथ ला रहे थे.

6 दिसंबर को कल्याण सिंह और उस समय राजस्थान के मुख्यमंत्री भैरो सिंह शेखावत की बातचीत का जिक्र करते हुए अनिल स्वरूप ने कहा कि वह लोगों की भीड़ के खिलाफ हैं लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई. इस तरह की बात उन्होंने ढांचे को गिराए जाने की आशंका के तहत नहीं कही थी बल्कि वह आश्वस्त थे कि ढांचा नहीं गिराया जाएगा. इस तरह की मंडली के लिए वह जुलाई में भी विरोध में थे लेकिन उस समय कोई अप्रिय घटना नहीं घटी थी.

कल्याण सिंह पर एक आरोप यह भी लगता रहा है कि उन्होंने बाबरी ढांचे को गिराए जाने के समय केन्द्रीय सुरक्षा बलों की मदद क्यों नहीं ली. इस पर अनिल स्वरूप ने कहा कि यह तथ्य है कि कल्याण सिंह ने मामले में केन्द्रीय बलों को अनुमति नहीं दी या उनका सहयोग नहीं लिया. इसका मतलब यह नहीं है कि वह चाहते थे कि केन्द्रीय बलों का सहयोग नहीं लिया जाए और विध्वंस होने दिया जाए. कल्याण सिंह को लगा कि जुलाई की तरह कारसेवक पूजा करने के बाद लौट जाएंगे लेकिन इस मौके पर वह गलत थे और मस्जिद नीचे गिरा दी गई, इसके साथ उनकी सरकार भी चली गई.
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