जामिया यूनिवर्सिटी के प्रो एसएम अख्तर बनाएंगे अयोध्या में बनने वाली मस्जिद का नक्शा, रखेंगे इस बात का खयाल
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जामिया यूनिवर्सिटी के प्रो एसएम अख्तर बनाएंगे अयोध्या में बनने वाली मस्जिद का नक्शा, रखेंगे इस बात का खयाल
प्रो डॉ एसएम अख्तर तैयार करेंगे अयोध्या में बनने वाली मस्जिद का नक्शा

डॉ एसएम अख्तर (Dr SM Akhtar) का आर्किटेक्चर, टाउन प्लानिंग, सामाजिक विज्ञान और पर्यावरण के फील्ड में शानदार अनुभव और काम रहा है. वह जामिया मीलिया इस्लामिया विवि के आर्किटेक्चर विभाग के हेड हैं.

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अयोध्या. राम मंदिर (Ram Mandir) का निर्माण शुरू हो गया है और मस्जिद के निर्माण का काम भी तेजी पकड़ चुका है. अयोध्या के रौनाही में मस्जिद का निर्माण किया जाएगा. इसका नक्शा बनाने के लिए जामिया मीलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय (Jamia Milia Islamia University) के प्रोफेसर डॉ एसएम अख्तर (Dr SM Akhtar) को चुना गया है. डॉ अख्तर का आर्किटेक्चर, टाउन प्लानिंग, सामाजिक विज्ञान और पर्यावरण के फील्ड में शानदार अनुभव और काम रहा है. वह जामिया विवि के आर्किटेक्चर विभाग के हेड हैं. इस विषय पर कई किताबें लिख चुके हैं और इससे संबंधित देश की कई संस्थाओं का नेतृत्व कर चुके हैं.

बता दें कि डॉ. एसएम अख्तर लखनऊ विश्वविद्यालय से पढ़े लिखे हैं. वे पहले ऐसे स्कॉलर रहे हैं जिन्हें आर्किटेक्चर, टाउन प्लानिंग और पब्लिक एडमिनिसट्रेशन में डी.लिट की उपाधि मिली. बीएससी, एलएलबी, पीएच डी और डी.लिट सभी डिग्रियां उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से हासिल की हैं. आर्किटेक्चर और टाउन प्लानिंग पर 7 किताबें लिख चुके हैं. दो और छपने वाली हैं.

64 साल के डॉ एसएम अख्तर का लखनऊ से पुराना नाता रहा है. उनकी पैदाइश इसी शहर की है. ऐशबाग के रहने वाले डॉ. एसएम अख्तर ने न्यूज 18 से खास बातचीत की. इस बातचीत में उन्होंने बताया कि अयोध्या में बनने वाली मस्जिद मानवता, भारतीयता और इस्लाम की साझा मिसाल होगी.



सवाल - मस्जिद के नक्शे में किन खास बातों का ख्याल रखेंगे?
जवाब - देखिये अभी तो बहुत कुछ कहना जल्दबाजी होगी लेकिन, तीन खास बातों का ध्यान रखा जायेगा. पहला मानवता, दूसरा भारतीयता और तीसरा इस्लाम. देखिये जो भी जख्म हैं, शिकायतें हैं और दूरियां हैं वो पटनी चाहिए. दिल से दिल जुड़ने चाहिए. तो उस सेंटर से (मस्जिद) ये एप्रोच मेरी होगी कि लोग आपस में जुड़ें. दिल से दिल जुड़ें और जाहिर बात है कि जब आप ह्यूमन वैल्यूज़ की केयर करते हैं या भारतीयता की केयर करते हैं तो आप इस्लाम की भी केयर करते हैं. तीनों चीजें एक ही हैं. हम भले ये देखते हैं कि तीनों चीजें अलग-अलग हैं. तो मस्जिद का पूरा परिसर मानवता, भारतीयता और इस्लाम की साझा मिसाल होगी.

सवाल - अयोध्या में बनने वाली मस्जिद पर क्या पहले की किसी बिल्डिंग की छाप होगी?

जवाब - लोगों को ऐसा लगता है कि हर इमारत पहले की किसी दूसरी इमारत की तरह होती है या होगी. लेकिन, आर्किटेक्चर में ऐसी नकल होती नहीं है. हर आर्किटेक्चर ओरीजिनल और नयापन लिए हुए होता है.

सवाल - आपको कब ये जिम्मेदारी सौंपी गयी?

जवाब - आपसे बातचीत के चन्द मिनट पहले ही मुझे यह आदेश दिया गया.

सवाल - इससे पहले आपने और किन किन बिल्डिंग्स को डिजाइन किया है?

जवाब - देखिये अभी तो जल्दबाजी में बता पाना संभव नहीं है, लेकिन तमाम निर्माणों में मैंने सहयोग दिया है.

सवाल - लखनऊ से कैसा नाता रहा है?

जवाब - लखनऊ की मेरी पैदाइश है. हजरतगंज में अभी भी मेरा दफ्तर है. 
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