अयोध्या: जानिए विवादों में घिरी जमीन का इतिहास, क्याें राम जन्मभूमि ट्रस्ट को है ये पसंद?

अयोध्या में एक जमीन की खरीद इस समय चर्चा का विषय बनी हुई है. (File Photo)

Ayodhya News: अयोध्या में जिस जमीन की खरीद में राम मंदिर ट्रस्ट पर भ्रष्टाचार का आरोप है. वह संपूर्ण जमीन 2011 से ही बैनामा होल्डर रवि मोहन तिवारी और सुल्तान अंसारी के पक्ष में एग्रीमेंट है.

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अयोध्या. उत्तर प्रदेश के अयोध्या (Ayodhya) में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Shri Ram Janmbhumi Teerth Kshetr Trust) पर जमीन की खरीद में भ्रष्टाचार का आरोप लगाने के बाद अब आम आदमी पार्टी (AAP) और समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) दोनों बैकफुट पर हैं. कारण ये कि जिस जमीन को लेकर ट्रस्ट के सदस्य और नगर निगम के महापौर ऋषिकेश उपाध्याय के ऊपर आरोप लगाया गया था, वह संपूर्ण आरोप ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने खारिज कर दिया है. उन्होंने संपूर्ण जमीन में अपनाई गई क्रय विक्रय प्रणाली को साफ कर दिया है. आइए आपको बताते हैं क्या है इस जमीन की पूरी कहानी...

जिस जमीन की खरीद में राम मंदिर ट्रस्ट पर भ्रष्टाचार का आरोप है. वह संपूर्ण जमीन 2011 से ही बैनामा होल्डर रवि मोहन तिवारी और सुल्तान अंसारी के पक्ष में एग्रीमेंट है. कारण ये है कि 2011 से उस जमीन पर विवाद था, जिसका निस्तारण 2017 में हुआ. निस्तारण के बाद जमीन हरीश पाठक और कुसुम पाठक के नाम दर्ज हुई. उस जमीन पर एग्रीमेंट बरकरार रहा और उसकी तयशुदा रकम में पेशगी के तौर पर सर्वप्रथम 2011 में 10 लाख रुपए और बैनामा होने के बाद 2017 में अनुबंध रिन्यूअल के दरमियान सुल्तान अंसारी और उनके पार्टनरों द्वारा ₹50 लाख पेशगी के तौर पर दिया गया.

18 मार्च 2021 को उक्त जमीन के व्यवसाय करने वाले सुल्तान अंसारी और रवि मोहन तिवारी के नाम बैनामा कराया गया. इस जमीन की खरीद-फरोख्त में आठ प्रॉपर्टी डीलर लगे थे. 8 लोगों के नाम बैनामा नहीं किया जा सकता था. जमीन श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्राथमिकता में आ गई थी क्योंकि अयोध्या रेलवे स्टेशन का गेट जमीन के ठीक सामने निकल रहा है. ऐसे में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने जमीन खरीदने की इच्छा जताई तो अनुबंध के आधार पर पैसा उसने चुकाने पर असमर्थता व्यक्त की.

सुल्तान अंसारी के मुताबिक ट्रस्ट ने साफ शब्दों में कहा कि वह अनुबंध के आधार पर पैसा नहीं देंगे. फिर 18 मार्च 2021 को जमीन हरीश पाठक और कुसुम पाठक के नाम से सुल्तान अंसारी और रवि मोहन तिवारी के नाम शाम को 7:10 बजे पर बैनामा कराई गई. बैनामा हरीश पाठक और कुसुम पाठक ने सुल्तान अंसारी और रवि मोहन के पक्ष में बैनामा किया. और 7:25 बजे पर जमीन का अनुबंध श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के साथ हुआ. अनुबंध रजिस्टर्ड था और जमीन के मालियत के अनुसार अनुबंध में स्टाम्प को भी लगाया गया था.

ये है वो जमीन

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अयोध्या में इसी जमीन की खरीद इस समय चर्चा का विषय बनी हुई है. (File Photo)


साढ़े 18 करोड़ में हुई डील, अभी तक 17 करोड़ एकाउंट से ट्रांसफर

जमीन अट्ठारह करोड़ पचास लाख में तय थी. जिसमें से 17 करोड़ रुपए का भुगतान ट्रस्ट की तरफ से आरटीजीएस किया जा चुका है. इसमें साढ़े 8 करोड़ करोड रुपए रवि मोहन तिवारी और साढ़े आठ करोड़  रुपए सुल्तान अंसारी के खातों में ट्रस्ट द्वारा आरटीजीएस किया गया. बाकी के डेढ़ करोड़ रुपए अभी बकाया हैं और जमीन के बैनामा किए जाने के वक्त ट्रस्ट द्वारा जमीन के वर्तमान स्वामियों को चुकाया जाएगा.

क्यों पड़ी ट्रस्ट को जमीन की आवश्यकता?

रामलला के मंदिर निर्माण के लिए रामलला के परकोटे के वास्तु दोष को खत्म करने के लिए उसकी जद में आ रहे कुछ मंदिर और मकान को हटाया जाना था. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने उन सभी भू-स्वामियों को उनके मनपसंद की जमीन और मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग देने का मन बनाया. जिसके लिए फकीरे राम मंदिर और रामकोट क्षेत्र में ही स्थित प्राचीन कोप भवन मंदिर को सर्वप्रथम ट्रस्ट के द्वारा लिया गया.

वास्तुदोष खत्म करने के लिए कई जमीनों की डील

दरअसल फकीरे राम मंदिर रामलला के मंदिर के परकोटे के बीच में आ रहा था. जमीन के वास्तु दोष को खत्म करने के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इन दोनों मंदिरों के स्वामियों को उनके मनपसंद की जमीन दी. और मंदिर निर्माण करने के लिए फकीरे राम को 3.70 करोड़ लाख और कोप भवन को 4 करोड़ 2 लाख चुकाये हैं. राम मंदिर की भव्यता और दीपिका को बनाने के लिए हाथ से राम मंदिर के विस्तारीकरण पर ट्रस्ट विचार कर रहा था और आसपास राममंदिर के विस्तारीकरण के दरमियान आने वाले मंदिर और मकानों के विस्थापन के लिए ट्रस्ट ने अयोध्या के अंदर ही जमीने खरीदी है.

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