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Ayodhya Verdict: 1990 से जो शख्स तराशता रहा राम मंदिर के पत्थर, आज सुन न सका फैसला

News18 Uttar Pradesh
Updated: November 9, 2019, 3:00 PM IST
Ayodhya Verdict: 1990 से जो शख्स तराशता रहा राम मंदिर के पत्थर, आज सुन न सका फैसला
अयोध्या में राम मंदिर के पत्थर तराशने का काम पूरी तरह से रुका हुआ है.

अयोध्या (Ayodhya) के कारसेवकपुरम स्थित राम मंदिर निर्माण कार्यशाला (Ram Temple Workshop) में पिछले दो महीनों से भी ज्यादा समय से पत्थर तराशने (Stone Carving) का काम पूरी तरह से थमा हुआ है. वजह ये है कि इसके मुख्य कारीगर रजनीकांत सोमपुरा का देहांत हो गया.

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लखनऊ. अयोध्या (Ayodhya) में जो शख्स इस आस में 1990 से हजारों टन पत्थरों को अपने हुनर से तराश रहा था कि एक दिन राम मंदिर (Ram Temple) बनेगा और ये पत्थर उसमें इस्तेमाल होंगे, आज अयोध्या फैसले (Ayodhya Verdict) के ऐतिहासिक दिन वह दुनिया छोड़कर जा चुका है. जी हां, अयोध्या (Ayodhya) के कारसेवकपुरम स्थित राम मंदिर निर्माण कार्यशाला (Ram Temple Workshop) में पिछले दो महीनों से भी ज्यादा समय से पत्थर तराशने (Stone Carving) का काम पूरी तरह से थमा हुआ है. वजह ये है कि कुछ महीने पहले इसके मुख्य कारीगर रजनीकांत सोमपुरा का देहांत हो गया, जिसके बाद से पत्थर तराशने का काम पूरी तरह ठप हो गया.

फैसले के बाद अब फिर शुरू होगा पत्थर तराशी का काम
कार्यशाला में कार्य ठप होने पर विश्व हिंदू परिषद् के प्रवक्ता शरद शर्मा कहते हैं, " सितंबर 1990 से ही कार्यशाला में लगातार पत्थर तराशने का काम चल रहा था. अब तक 65 फ़ीसदी काम भी पूरा हो चूका है. लेकिन दो महीने पहले मुख्य मूर्तिकार रजनीकांत की मौत हो गई. तभी से काम रुका हुआ है. तय किया गया है कि नए कारीगरों की नियुक्ति फैसले के बाद से की जाएगी. अब कार्यशाला में काम की शुरुआत राम जन्मभूमि न्यास की बैठक के बाद ही शुरू होगी.

ayodhya stone
अयोध्या में वर्षों से राम मंदिर के लिए पत्थर तराशने का काम कर रहे मुख्य मूर्तिकार रजनीकांत का देहांत हो गया है.


कारीगरों की संख्या बढ़ाने पर भी होगा फैसला
शरद शर्मा ने बताया कि एक ही मूर्तिकार कई महीनों से अकेले ही काम कर रहा था. अब फैसले के बाद न्यास की होने वाली बैठक में कारीगरों की संख्या बढ़ाने पर फैसला होगा. बता दें राम मंदिर निर्माण कार्यशाला का शिलान्यास 10 नवंबर 1989 में किया गया था. 30 अगस्त 1990 को इस कार्यशाला में निर्माण कार्य शुरू हुआ था. कभी राम मंदिर के पत्थरों को तराशने और इन पर बारीक चित्रकारी करने का काम 150 मजदूर करते थे, लेकिन समय के साथ मजदूरों ने काम भी छोड़ दिया. रजनीकांत 1990 में 21 साल की उम्र में गुजरात से अयोध्या आए थे और लगातार इस पर काम करते रहते थे. पिछले दिनों जुलाई में रजनीकांत के निधन के बाद से ही अयोध्या में पत्थरों को तराशने का काम बंद हो गया.

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First published: November 9, 2019, 2:00 PM IST
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