अयोध्या मुद्दे पर मध्यस्थता फेल, 6 अगस्त से रोजाना सुनवाई, साधु-संत बोले समय हुआ बर्बाद

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि हमें मध्यस्थता पैनल की रिपोर्ट मिल गई है. मामले में मध्यस्थता की कोशिशें नाकाम रही हैं. अब 6 अगस्त से खुली कोर्ट में मामले की रोजाना सुनवाई की जाएगी.

News18 Uttar Pradesh
Updated: August 2, 2019, 2:43 PM IST
अयोध्या मुद्दे पर मध्यस्थता फेल, 6 अगस्त से रोजाना सुनवाई, साधु-संत बोले समय हुआ बर्बाद
अयोध्या विवाद में अब 6 अगस्त से प्रतिदिन सुनवाई होगी
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Updated: August 2, 2019, 2:43 PM IST
अयोध्या रामजन्मभूमि विवाद पर मध्यस्थता की कोशिश फेल होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में 6 अगस्त से रोजाना सुनवाई का फैसला किया है. बता दें अयोध्या मसले पर मध्यस्थता के लिए गठित 3 सदस्यीय पैनल ने सीलबंद लिफाफे में गुरुवार को अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी थी. जिस पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने यह फैसला सुनाया.

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि हमें मध्यस्थता पैनल की रिपोर्ट मिल गई है. मामले में मध्यस्थता की  कोशिशें नाकाम रही हैं. अब 6 अगस्त से खुली कोर्ट में मामले की रोजाना सुनवाई की जाएगी.

जस्टिस कलीफुल्ला के नेतृत्व में गठित हुई थी मध्यस्थता समिति

सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल 8 मार्च को SC के पूर्व जज जस्टिस एफएम कलीफुल्ला की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित की थी. इस समिति को मामले का सर्वमान्य समाधान निकालना था. मध्यस्थता समिति में आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर और वरिष्ठ वकील श्रीराम पांचू भी शामिल थे. मध्यस्थता पैनल ने संबंधित पक्षों से बंद कमरे में बातचीत की गई थी.

मुस्लिम पक्षकार ने कहा- जल्द आए फैसला

उधर मसले पर मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी ने कहा, "हमें कोर्ट और मध्यस्था कमेटी दोनों का फैसला मान्य है. लोगों ने अयोध्या को धर्म का विषय बना दिया है. राजनीतिक रोटी सेंकी जा रही है, जो बंद होना चाहिए. जिस दिन अयोध्या मामले का फैसला आएगा उस दिन राजनीतिक रोटियां सेकना बंद हो जाएगी और पूरी दुनिया में अयोध्या का नाम होगा. हम चाहते हैं आज फैसला हो, अभी फैसला हो."

muslim litigant iqbal ansari
मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी

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संतों ने कहा मध्यस्थता के चक्कर में बर्बाद हुए 5 महीने

सुप्रीम कोर्ट के आज के फैलसे पर हिंदू पक्ष और अयोध्या के साधु-संतों ने भी प्रतिक्रिया दी है. मामले की रोजाना सुनवाई से सभी खुश हैं, लेकिन उन्हें इस बात का दुख भी है कि मध्यस्थता के चक्कर में पांच महीने बर्बाद हो गए. तपस्वी छावनी के महंत परमहंस दास ने कहा कि वे इस बात की मांग पहले से ही कर रहे थे कि इस मसले पर रोजाना सुनवाई हो. मसले पर सबूतों और साक्ष्यों के आधार पर सुनवाई करते हुए फैसला होना चाहिए. यह जमीन रामलला की है और यहां पर भव्य राममंदिर का निर्माण जरूर होना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट इस मामले में अब जल्द से जल्द फैसला देकर राम मंदिर निर्माण का रास्ता प्रशस्त करना चाहिए.

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First published: August 2, 2019, 2:43 PM IST
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