मॉब लिंचिंग के खिलाफ मुस्लिमों को हथियार खरीदने की नसीहत पर भड़के अयोध्या के साधु-संत

महंत परमहंस दास (तपस्वी जी की छावनी) ने कहा मॉब लिंचिंग की घटना पर दोषी को फांसी की सजा होनी चाहिए, ताकि एक कड़ा सन्देश समाज में जाए. उन्होंने कहा गोधरा कांड के बाद किसी भी हिंदू संगठन ने नहीं कहा कि सभी हिंदू हथियार रखें.

News18 Uttar Pradesh
Updated: July 22, 2019, 2:10 PM IST
मॉब लिंचिंग के खिलाफ मुस्लिमों को हथियार खरीदने की नसीहत पर भड़के अयोध्या के साधु-संत
अयोध्या के संत समाज ने मुसलामानों के हथियार खरीदने की नसीहत पर जताई नाराजगी
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Updated: July 22, 2019, 2:10 PM IST
मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर मौलाना कल्वे जव्वाद और सुप्रीम कोर्ट के वकील महमूद पराचा के बयान पर अयोध्या के संत समाज ने विरोध किया है. उन्होंने इसे देश देश विरोधी मानसिकता का परिचायक बताते हुए कहा कि हथियार किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता. किसी एक व्यक्ति की गलती पर पूरे देश में अराजकता का माहौल पैदा करना देश विरोधी है.

महंत परमहंस दास (तपस्वी जी की छावनी) ने कहा मॉब लिंचिंग की घटना पर दोषी को फांसी की सजा होनी चाहिए, ताकि एक कड़ा सन्देश समाज में जाए. उन्होंने कहा गोधरा कांड के बाद किसी भी हिंदू संगठन ने नहीं कहा कि सभी हिंदू हथियार रखें. क्योंकि देश में अखंडता और एकता की जरूरत है. कुछ चंद लोग हिंदुस्तान का माहौल खराब करना चाहते हैं.

इस तरह का बयान देने वाले लोग देश को संघर्ष की आग में जलाना चाहते हैं. कुछ लोगों की गलती की वजह से सबको दोषी नहीं कहा जा सकता. देश को फिर बांटने की तैयारी कर रहे हैं. इसको कामयाब नहीं होने देंगे. माहौल बिगाड़ने वालों के विरोध में खड़े होने की आवश्यकता है. रामजन्मभूमि के पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा यह घटना भाईचारे और समझौते से रुकेगी न कि हथियार से. मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर रोक लगी है. मुसलमानों को इस पर सोचना ही नहीं चाहिए. इस तरह की सोच देश में विघटन पैदा करेगी. कुछ लोग देश विरोधी मानसिकता के हैं. वह अफवाह फैलाते हैं. अस्त्र-शस्त्र की जरूरत नहीं है. भाईचारे की है जरूरत है. अस्त्र-शस्त्र के प्रयोग से हिंदू मुसलमान के बीच विवाद होगा.

क्या है मामला?

दरअसल, शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद और सुप्रीम कोर्ट के वकील महमूद पराचा जैसे बुद्धजीवी ने एससी/एसटी और अल्पसंख्यकों को हथियार खरीदने की नसीहत दे रहे हैं. इसके लिए बाकायदा लखनऊ में 26 जुलाई को एक कैंप भी लगाया जाएगा, जिसमें अल्पसंख्यक समुदाय को हथियार खरीदने के तरीके के बारे में जानकारी दी जाएगी.

मौलाना कल्वे जव्वाद और महमूद पराचा


मॉब लिंचिंग करने वालों का कोई ईमान धर्म नहीं होता है. मौके का फायदा उठाकर कुछ लोग भीड़ को मरने और मारने के लिए उकसा देते हैं. इनके खिलाफ कानून भी है और कानून अपना काम भी करता है, लेकिन सवाल ये है कि इस भीड़ के खिलाफ अगर हथियार उठाने की वकालत की जाएगी तो क्या हम हिंसक समाज की ओर कदम नहीं बढ़ा रहे हैं. ये अपने आपमें बड़ा सवाल है. ये सवाल इसलिए उठ खड़ा हुआ है क्ंयोकि सुप्रीम कोर्ट के वकील महमूद पराचा ने लखनऊ पहुंचकर शिया धर्मगुरु कल्बे जव्वाद से मुलाकात की. उनसे मिलकर महमूद पराचा ने कहा कि 26 तारीख को मॉब लिंचिंग से बचने के लिए कैंप लगाया जाएगा. जिसमें हथियार के लिए कैसे अप्लाई किया जाए इसकी ट्रेनिंग भी दी जाएगी.
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महमूद पराचा ने आरएसएस पर लगाया आरोप

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ महमूद पराचा ने बताया कि मौलाना कल्वे जव्वाद साहब ने उन्हें यहां बुलाया है. पहला कैंप लखनऊ में 26 जुलाई को लगेगा, जिसमें हम लोग एससीएसटी और अल्पसंख्यकों को इस बात के लिए ट्रेनिंग देंगे कि वे किस तरह से लाइसेंस के लिए अप्लाई करें. उन्होंने कहा कि अज हमारे मुल्क में ऐसी स्थिति पैदा हो गई है जहां एससी/एसटी और अल्पसंख्यकों को मारा जा रहा है. उनकी जान को खतरा है. आरएसएस की सोच वाली संगठन इसको अंजाम दे रही हैं. सोनभद्र की घटना इसका ताजा उदहारण है.

मौलाना कल्बे जव्वाद ने कहा हथियार की ट्रेनिंग नहीं दी जाएगी

वहीं शिया धर्म गुरू मौलाना कल्बे जव्वाद ने कहा कि 26 तारीख को जो कैंप लगेगा उसमें सिर्फ और सिर्फ इस बात की जानकारी दी जाएगी कि सरकार से असलाह कैसे लें. इसके लिए कैसे अप्लाई करें. इसमें कोई हथियार की ट्रेनिंग नहीं दी जाएगी और न ही किसी प्रकार के हथियार के बारे में बताया जाएगा.

जफरयाब जिलानी बोले इसमें कुछ भी आपत्तिजनक नहीं

वहीं जाने माने वकील और ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड के मेंमबर जफरयाब जिलानी कहतें हैं कि हथियार रखने के लिए लोगों को जोनकारी देना कोई गलत बात नही. वो कहतें हैं कि अपनी जान बचाने के लिए आप किसी भी हद तक जा सकते हैं. उनका कहना है कि मुसलमान सिर्फ मरने के लिए नहीं है वह अपनी सुरक्षा के लिए मार भी सकता है. जब मारने वाले को डर होगा.

ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड के मेंमबर जफरयाब जिलानी


वहीं बीजेपी सरकार में मंत्री मोहसिन रजा कहतें हैं कि ऐसे पढ़े लिखे लोगों से ऐसी उम्मीद नहीं की जा सकती. वो लोगों को शिक्षित करने की बात कहते तो समाज सुधर जाता. लेकिन वो इस बात का जवाब दें कि इस मॉब लिंचिंग की शुरुआत किसने की थी. वो तो कांग्रेस की सरकार में शुरू हुई थी.

(इनपुट: निमिष गोस्वामी/मोहम्मद शबाब)

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First published: July 22, 2019, 12:07 PM IST
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