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नई रणनीति: अयोध्या में राम मंदिर की नींव में होगा 'मिर्जापुर' के पत्थरों का इस्तेमाल

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की नींव को लेकर नई रणनीति बनी है  (न्यूज़ 18 ग्राफिक्स)
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की नींव को लेकर नई रणनीति बनी है (न्यूज़ 18 ग्राफिक्स)

श्रीराम जन्मभूमि क्षेत्र स्थित कैंप कार्यालय के प्रभारी प्रकाश कुमार गुप्ता ने बताया कि दिल्ली की बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि अब राम मंदिर (Ram Mandir) निर्माण में नींव पत्थरों से ही भरी जाएगी. उसके लिए विशेष तरीके के मिर्जापुर (Mirzapur) से मजबूत और कठोर पत्थर लाए जाएंगे.

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अयोध्या. उत्तर प्रदेश के अयोध्या (Ayodhya) में राम मंदिर निर्माण (Ram Mandir Construction) के लिए राम जन्मभूमि परिसर में की जाने वाली खंभों की पाइलिंग का काम फिलहाल फेल हो गया है. राम जन्म भूमि के गर्भगृह के नीचे 17 मीटर तक जलाशय हैं और उसके बाद भुरभुरी बालू है. इसकी वजह से राम मंदिर निर्माण के लिए जमीन के नीचे लगाए जाने वाले पिलर की टेस्टिंग पर जब प्रेशर डाला गया तो वह नीचे खिसक गए. लिहाजा ट्रस्ट के सदस्य और कार्यदायी संस्था एलएनटी और टाटा कंसल्टेंसी व इंजीनियरों ने खंभों की पाइलिंग के काम को असफल करार दिया.

पत्थरों पर खड़ा होगा मंदिर का स्ट्रक्चर

अब फैसला किया गया है कि श्रीराम जन्म भूमि मंदिर निर्माण के लिए नींव में भी पत्थरों से ही काम चलेगा. नींव में गहरी खुदाई कर पत्थर डाले जाएंगे और उसके ऊपर मंदिर का स्ट्रक्चर तैयार होगा. पत्थर भराई के कार्य के लिए मिर्जापुर से पत्थरों के आने की संभावना है. यह पत्थर कठोर और मजबूत होते हैं. जानकारी के अनुसार मंदिर निर्माण के लिए बंसी पहाड़पुर राजस्थान से पत्थर आएंगे.



15 जनवरी से शुरू होगा काम
गुरुवार को अयोध्या के राम सेवक पुरम में पत्थरों को रखने के लिए साफ-सफाई का काम किया गया. माना यह जा रहा है कि जल्द ही बंसी पहाड़पुर के पत्थर अयोध्या पहुंचेंगे, साथ ही न्यू के पत्थरों को भी राम जन्म भूमि परिषर में रखने के लिए इंतजाम किए जा रहे हैं. 15 जनवरी से मंदिर निर्माण का काम शुरू होने की संभावना है.

Ayodhya Ram Mandir Stone
अयोध्या में राम मंदिर की नींव को लेकर नई रणनीति बनी है


पत्थरों की सफाई और कोडिंग जारी

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र निर्माण ट्रस्ट के सदस्य डॉ अनिल मिश्रा ने बताया कि राम मंदिर निर्माण के लिए कार्यदायी संस्था एलएनटी, टाटा कंसल्टेंसी और ट्रस्ट के इंजीनियर लगे हुए हैं. जब तक नींव की डिजाइन और फाउंडेशन का काम शुरू होगा, तब तक बाकी काम तेजी के साथ चलता रहेगा. राम जन्म भूमि कार्यशाला में मंदिर निर्माण के लिए तराश कर रखे गए पत्थरों की सफाई और उसके उसी क्रम में रखने के लिए पत्थरों पर नंबर डालने का काम चल रहा है.

पत्थरों के इस लिहाज से कोडिंग की जा रही है. जिस लिहाज से मंदिर निर्माण में पत्थरों की आवश्यकता है. 70 प्रतिशत पत्थरों की सफाई का काम पूरा हो चुका है और उन पर कोडिंग हो चुकी है.

जहां से पत्थर खरीदेंगे, वहीं तराशेंगे

ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा ने कहा कि कार्यशाला शुरू करने के लिए निर्माण कार्य में लगी एजेंसी ही तय करेगी. उनके द्वारा पत्थरों की तराशी के लिए अलग से मजदूर को लाने का कार्य किया जाएगा. पत्थरों की तराशी का कार्य राम जन्मभूमि न्यास की कार्यशाला पर भी होगा और साथ ही राम जन्म भूमि परिसर में भी पत्थरों की तराशी के लिए कार्यशाला लगाई जाएगी. साथ ही जहां से पत्थर खरीदे जाएंगे, वहां पर भी कार्यशाला लगाई जाएंगी, जिससे वहीं से तराशने के बाद पत्थरों को मंदिर के परिसर में भेजा जा सके ताकि जल्दी मंदिर निर्माण का काम हो सके.

दिल्ली की बैठक में लिया गया निर्णय

श्रीराम जन्मभूमि क्षेत्र स्थित कैंप कार्यालय के प्रभारी प्रकाश कुमार गुप्ता ने बताया कि दिल्ली की बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि अब राम मंदिर निर्माण में नींव पत्थरों से ही भरी जाएगी. उसके लिए विशेष तरीके के मिर्जापुर से मजबूत और कठोर पत्थर लाए जाएंगे और उन पत्थरों को नींव में मंदिर निर्माण के लिए इस्तेमाल किया जाएगा. 15 जनवरी से ही यह काम शुरू होना है. उसी के लिए जगह की साफ-सफाई की जा रही है और रामसेवक पुरम में ही पत्थरों को स्टोर करने का स्थान है. कार्यशाला पर पत्थरों को तराशी का काम किया जाता है. रामसेवक पुरम में इसी वजह से पत्थरों को रखने के लिए तैयारियां की जा रही हैं. मंदिर निर्माण के लिए राजस्थान के बंसी पहाड़पुर से पत्थर आते हैं और राम मंदिर के नींव में मजबूत और कठोर पत्थर चाहिए इसलिए वह पत्थर मिर्जापुर से मंगाई जाने की संभावना है.
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