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अन्नकूट महोत्सव: अयोध्या पर फैसले से पहले राम की नगरी में दिखी हिंदू-मुस्लिम एकता की झांकी

News18 Uttar Pradesh
Updated: October 28, 2019, 5:17 PM IST
अन्नकूट महोत्सव: अयोध्या पर फैसले से पहले राम की नगरी में दिखी हिंदू-मुस्लिम एकता की झांकी
अन्नकूट महोत्सव में मिले आर्चाय सत्‍येंद्र दास और इकबाल अंसारी.

अयोध्या विवाद (Ayodhya Dispute) पर नवंबर में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का फैसला आने वाला है, लेकिन इस शहर में सांप्रदायिक सौहार्द (Communal Harmony) बना हुआ है. अन्नकूट महोत्सव (Annakut Festival) पर मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी (Iqbal Ansari) रामलला के प्रधान पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास (Satyendra Das) के गोपाल मंदिर पहुंचे और प्रसाद ग्रहण किया.

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अयोध्‍या. अयोध्या विवाद (Ayodhya Dispute) का फैसला जो भी आए, लेकिन इस शहर में सांप्रदायिक सौहार्द (Communal Harmony) बना हुआ है. आज अन्नकूट महोत्सव (Annakut Festival) है और इस महोत्सव में शामिल होने के लिए मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी (Iqbal Ansari) रामलला के प्रधान पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास (Satyendra Das) के के बुलावे पर गोपाल मंदिर पहुंचे. इस दौरान अंसारी ने अन्नकूट पूजा का प्रसाद ग्रहण किया. जबकि आचार्य सत्येंद्र दास ने उन्‍हें उपहार स्वरूप दक्षिणा भी दी.

सांप्रदायिक सौहार्द का खास संदेश
सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या विवाद का फैसला सुरक्षित है और माना जा रहा है कि नवंबर महीने में फैसला आ जाएगा. अयोध्या विवाद का फैसला जो भी हो लेकिन अयोध्या में आज अन्नकूट महोत्सव के मौके पर एक सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश दिया गया. मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी ने रामलला के प्रधान पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास के निमंत्रण पर उनके गोपाल मंदिर पहुंच कर अन्नकूट पूजा का प्रसाद ग्रहण किया. यही नहीं, आचार्य सत्येंद्र दास ने उपहार स्वरूप इकबाल अंसारी को दक्षिणा भी दी. यह वही अयोध्या है जहां पर आपसी भाईचारा, प्रेम और सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश हमेशा दिया जाता रहा है और आज भी दिया गया.

अंसारी ने कहा,' मैं पुजारी के बुलावे पर अन्‍नकूट का प्रसाद ग्रहण करने आया हूं. यह हमारी पुरानी परंपरा है और त्‍योहार को लेकर हिन्‍दू-मुस्लिम में कोई भेदभाव नहीं है. हम लोग समाजवादी हैं यानी समाज के साथ मिलकर त्‍योहार मनाते हैं. जबकि साधु संतों के साथ हमारा जुड़ाव काफी पुराना है.'

साथ ही उन्‍होंने सभी देशवासियों को दिवाली की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि अयोध्‍या में हर धर्म और जाति के लोग मिलकर त्‍योहार मनाते हैं. यह इंसानियत की मिसाल है और पूरे देश को इसे देखना चाहिए.

जबकि आचार्य ने कहा, ' हमने अंसारी को अन्‍नकूट प्रसाद ग्रहण करने का निमंत्रण दिया. वह आए और इस दौरान हमने एक साथ बैठ कर भोजन किया. हम उन्‍हें धन्‍यवाद देते हैं.

कायम रहेगी ये मिसाल
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लोग सोचते हैं कि अयोध्या विवाद के फैसले के चलते अयोध्या असहज होगी, लेकिन जिस तरह से अयोध्या में आपसी सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश जाता है उससे लगता है कि यह नगरी माहौल बिगाड़ने वालों को स्वीकार नहीं करेगी. शायद यही वजह है कि साधु संत और मुस्लिम में भाईचारा हमेशा दिखाई पड़ा है और आज भी अन्नकूट महोत्सव के मौके पर दोनों समुदाय के लोगों ने कट्टरवादियों को एक कड़ा संदेश दिया है कि तुम कुछ भी सोचो अयोध्या आज भी सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल है.

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First published: October 28, 2019, 5:01 PM IST
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