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अयोध्या फैसला: निर्मोही अखाड़ा ने SC में दायर की रिव्यू पिटीशन, सुनवाई आज
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News18 Uttar Pradesh
Updated: December 12, 2019, 12:25 PM IST
अयोध्या फैसला: निर्मोही अखाड़ा ने SC में दायर की रिव्यू पिटीशन, सुनवाई आज
अयोध्या फैसले को लेकर निर्मोही अखाड़ा की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल की गई है.

निर्मोही अखाड़ा (Nirmohi Akhada) ने सुप्रीम कोर्ट (SC) द्वारा दिए गए निर्णय, जिसमें राम जन्मभूमि बनाए जाने के लिए बनने वाले ट्रस्ट में निर्मोही अखाड़ा को दिए जाने वाले पद के लिए, स्पष्टीकरण के लिए पुनर्विचार याचिका (Review Petition) दायर की है.

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अयोध्या. सुप्रीम कोर्ट (SC) की संविधान पीठ (Constitution Bench) द्वारा 9 नवंबर को आए अयोध्या विवाद पर फैसले (Ayodhy Verdict) को लेकर मुस्लिम पक्ष ने रिव्यू याचिका (Review Petition) दाखिल कर दी है. वहीं दूसरी तरफ अब रामजन्म मामले में अहम पक्ष रखने वाला निर्मोही अखाड़ा ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल कर दी है. निर्मोही अखाड़ा ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्णय, जिसमें राम जन्मभूमि बनाए जाने के लिए बनने वाले ट्रस्ट में निर्मोही अखाड़ा को दिए जाने वाले पद के लिए, स्पष्टीकरण के लिए पुनर्विचार याचिका दायर की है.

निर्मोही अखाड़ा के वकील रणजीत लाल वर्मा ने बताया कि 3 प्रमुख पक्ष के लिए पुनर्विचार याचिका दायर हुई है. निर्मोही अखाड़ा सुप्रीम कोर्ट के द्वारा दिए गए निर्णय का स्वागत करता है और हमारी भी यही भावना है कि राम जी का भव्य मंदिर बने. लेकिन माननीय न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय पर जिसमें निर्मोही अखाड़ा को अहम पद दिया गया था, उसके स्पष्टीकरण तथा रामलला विराजमान के गर्भ गृह के निकट ही स्थित प्राचीन राम चबूतरा जो 1855 से अस्तित्व में है. उस पर पूजा का अधिकार तथा शेष अवतार सुमित्रा भवन मंदिर का यथावत निर्माण जो निर्मोही अखाड़ा के ही संपत्ति है, की मांग की गई है.

निर्मोही अखाड़े की ये है मांग 

वहीं निर्मोही अखाड़ा के वकील रंजीत लाल वर्मा ने कहा कि यदि माननीय न्यायालय ने 2.77 एकड़ में ही निर्णय लिया है तो हमने जो पूर्व में याचिका दायर की थी, शेषावतार सुमित का भवन मंदिर, जो पंच और अखाड़े का है, उसको भी यथावत उसी जगह पर रखा जाए. हमें उसने केवल प्रबंध और पूजा सेवा का अधिकार ही चाहिए. हमें उससे चढ़ावा का कोई लेना-देना नहीं है. साथ ही उन्होंने बताया कि पूर्व में प्रधानमंत्री कार्यालय से किए गए पत्राचार पर एक माह के इंतजार के बाद जब कोई भी पत्राचार का जवाब नहीं मिला तो फिर पंचों ने रिव्यू में जाने का निर्णय लिया. जो 10 दिसंबर को दायर हुआ है, आज माननीय न्यायालय यह तय करेगा कि मामला कोर्ट में सुना जाएगा कि पैरोल पर ऐसे ही फैसला दे दिया जाए.

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First published: December 12, 2019, 12:24 PM IST
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