अयोध्या केस: मुस्लिम पक्ष ने कहा- मोर और कमल से यह साबित नहीं होता कि वहां मंदिर था

एहतेशाम खान | News18 Uttar Pradesh
Updated: September 2, 2019, 11:50 PM IST
अयोध्या केस: मुस्लिम पक्ष ने कहा- मोर और कमल से यह साबित नहीं होता कि वहां मंदिर था
सुप्रीम कोर्ट राम मंदिर मामले पर हर रोज सुनवाई कर रहा है. (फाइल फोटो)

हिन्दू पक्षकारों कि तरफ से कहा गया कि मस्जिद का जो ढांचा था, वहां मोर और कमल के फूल के निशान बने थे और ऐसा किसी मस्जिद में नहीं होता.

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अयोध्या (Ayodhya) के राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद जमीन विवाद के मामले (Ram Janmabhoomi Babri Masjid Land Dispute) में 17वें दिन सोमवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में मुस्लिम पक्षकारों की ओर से बहस की शुरुआत करते हुए वकील राजीव धवन (Rajiv Dhawan) ने कहा कि वो चार अलग-अलग पहलुओं पर बात करेंगे. उसके बाद मुस्लिम पक्षकारों की तरफ से जफरयाब जिलानी और मीनाक्षी अरोड़ा बहस करेंगे. जिलानी हाईकोर्ट के फैसले पर बात करेंगे जबकि मीनाक्षी एएसआई की रिपोर्ट पर बात करेंगे.

हिन्दू पक्षकारों की दलील- मोर और कमल के निशान मस्जिद में नहीं होता
बहस में धवन ने हिन्दू पक्षकारों की तरफ से पेश की गई दलील का जवाब देने की भी कोशिश की. हिन्दू पक्षकारों कि तरफ से कहा गया कि मस्जिद का जो ढांचा था, वहां मोर और कमल के फूल के निशान बने थे और ऐसा किसी मस्जिद में नहीं होता. इस पर धवन ने कहा कि इससे ये साबित नहीं होता कि वहां मंदिर था. कई ऐसे आर्किटेक्चर है जहां इस तरह की कलाकारी मुगल काल में की गई है.

आर्य भी बाहर से भारत आए थे: धवन

हिन्दू पक्षकारों का कहना था कि बाबर आक्रमणकारी था और बाहर से आया था. इस पर धवन ने कहा कि अगर बाबर बाहरी था तो फिर ये भी बात उठेगी कि आर्य भी बाहर से भारत आए थे.

मस्जिद के लिए जमीन नहीं खरीदी गई थी
हिन्दू पक्षकारों ने दलील दी थी कि विवादित मस्जिद बाबर ने या फिर औरंगजेब ने बनाई थी. लेकिन इसके लिए उन्होंने जमीन खरीदा नहीं था. शरीयत कानून के मुताबिक शासक को भी मस्जिद वक्फ करने के लिए जमीन खरीदना पड़ेगा. इस पर धवन ने जवाब दिया कि भारत का कानून 1858 से शुरू होता है जब अंग्रेजों ने कानून की स्थापना की और आज का कानून भी वहीं से लिया गया है. इसलिए सुप्रीम कोर्ट में उसी कानून की बात होगी ना की शरीयत या वैदिक काल के कानून की.
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बाबरनामा या तुजूके-जहांगीरी में भी बाबरी मस्जिद होने की बात नहीं: हिन्दू पक्ष
हिन्दू पक्षकारों ने ये भी कहा था कि उस दौर में कई ट्रैवलर भारत आए लेकिन किसी ने भी बाबरी मस्जिद होने का जिक्र नहीं किया. यहां तक के बाबरनामा या तुजूके-जहांगीरी में भी बाबरी मस्जिद होने की बात नहीं कही गई है यानी बाबरी मस्जिद बाबर के जमाने में बनी ही नहीं. इस पर धवन ने कहा कि कई ऐसे ट्रैवलर हैं जिन्होंने किसी चीज के होने का जिक्र किया और कई चीजों का नहीं किया. अगर नहीं किया तो इसका मतलब ये नहीं कि वह चीज उस वक़्त थी है नहीं. हो सकता है उस ट्रैवलर ने वो चीज नहीं देखी.

राजीव धवन मंगलवार को अपनी बहस जारी रखेंगे.

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First published: September 2, 2019, 11:31 PM IST
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