भगवान राम के वंशज होने का प्रमाण देने अयोध्या पहुंचे रघुवंशी समाज के एक हजार लोग

मध्य प्रदेश के शिवपुरी से बीजेपी विधायक वीरेंद्र रघुवंशी ने कहा कि 'सुप्रीम कोर्ट ने भगवान राम (Lord Rama) के वंशजों के बारे में जो सवाल पूछा है, उसके लिए संदेश देने के मकसद से अयोध्या जा रहे हैं.

News18 Uttar Pradesh
Updated: September 8, 2019, 7:53 AM IST
भगवान राम के वंशज होने का प्रमाण देने अयोध्या पहुंचे रघुवंशी समाज के एक हजार लोग
भगवान राम के वंशज होने का प्रमाण देने अयोध्या पहुंचे रघुवंशी समाज के लोग.
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Updated: September 8, 2019, 7:53 AM IST
अयोध्या. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद (Ram Janmabhoomi- Babri Masjid) विवाद मामले की सुनवाई जारी है. इस कड़ी में रविवार को रघुवंशी समाज के करीब एक हजार लोग अयोध्या पहुंचे. मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों से रघुवंशी समाज के लोग शिवपुरी में इकट्ठा हुए और यहां से 100 से ज्यादा वाहनों में सवार होकर अयोध्या के लिए निकले थे.

 हम श्रीराम के वंशज: बीजेपी विधायक

मध्य प्रदेश के शिवपुरी से बीजेपी विधायक वीरेंद्र रघुवंशी ने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट ने भगवान राम के वंशजों के बारे में जो सवाल पूछा है, उसके लिए यह संदेश देने के मकसद से अयोध्या जा रहे हैं.' उनका कहना है कि हम श्रीराम के वंशज हैं और देश भर में रहते हैं. बीजेपी विधायक ने कहा कि अयोध्या में आज वे लोग जिलाधिकारी से मिलकर भगवान श्रीराम के वंशज होने का ज्ञापन देंगे. इन लोगों की मांग है कि अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर जल्द से जल्द बनाया जाए.

शिवपुरी से बीजेपी विधायक वीरेंद्र रघुवंशी
शिवपुरी से बीजेपी विधायक वीरेंद्र रघुवंशी.


पूर्व राजकुमारी दीया कुमारी के बयान के बाद शुरू हुआ दौर
जयपुर के राजपरिवार की तरफ से कहा जा रहा है कि वे भगवान राम के बड़े बेटे कुश के नाम पर ख्यात कच्छवाहा/कुशवाहा वंश के वंशज हैं. यह बात इतिहास के पन्नों में दर्ज है. राजस्‍थान के राजसमंद से बीजेपी सांसद और पूर्व राजकुमारी दीया कुमारी इसके कई सबूत देने की भी दावा कर रही हैं. उनकी तरफ से कहा जा रहा है कि उनके पास एक पत्रावली है, जिसमें भगवान श्रीराम के वंश के सभी पूर्वजों के नाम क्रमवार दर्ज हैं. इसी में 289वें वंशज के रूप में सवाई जयसिंह और 307वें वंशज के रूप में महाराजा भवानी सिंह का नाम लिखा है. इसके अलावा पोथीखाने के नक्शे भी मौजूद हैं.

हाईकोर्ट के फैसले पर सुनवाई
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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 30 सितंबर 2010 को अयोध्या विवाद में फैसला दिया था. फैसले में कहा गया था कि विवादित ज़मीन को तीन बराबर हिस्सों में बांटा जाए. जिस जगह रामलला की मूर्ति है उसे रामलला विराजमान को दिया जाए. सीता रसोई और राम चबूतरा निर्मोही अखाड़े को दिया जाए, जबकि बाकी की एक तिहाई जमीन सुन्नी वक्फ बोर्ड को दी जाए. इसके बाद ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था.

(रिपोर्ट: अनुज गुप्ता)

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First published: September 8, 2019, 7:32 AM IST
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