Ayodhya News: राम मंदिर के निर्माण ने पकड़ी रफ्तार, नींव से निकली मिट्टी बनी श्रद्धालुओं की पसंद

राम मंदिर को लेकर भक्‍तों में काफी जोश है.

राम मंदिर को लेकर भक्‍तों में काफी जोश है.

राम मंदिर निर्माण (Ram Mandir Construction) के दौरान नींव की खुदाई के दौरान निकल रही मिट्टी श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में दी जा रही है. जबकि ट्रस्‍ट ने इस मिट्टी को 'रामजन्मभूमि रजकण' नाम दिया है.

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अयोध्या. उत्तर प्रदेश के अयोध्या (Ayodhya) में राम मंदिर का निर्माण (Ram Mandir Construction)कार्य जारी है. जबकि मंदिर की नींव खुदाई के दौरान निकली मिट्टी भी श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में दी जा रही है. बता दें कि नींव खुदाई के बाद अब भराई का काम तेजी से चल रहा है. जबकि मई में राम मंदिर की नींव की भराई के पहले चरण का काम पूरा होने की उम्‍मीद है. राम मंदिर की नींव की कुछ 44 परतें भरी जानी हैं.

बहरहाल, रामलला का दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं को भी पवित्र रजकण के तौर पर गर्भ गृह से निकली मिट्टी डिब्बी दी जा रही है. इस मिट्टी को राम जन्मभूमि परिसर समेत अलग-अलग स्थानों पर रखा गया है. हालांकि इस मिट्टी को देने के लिए जो खास डिब्बे बनाए गए हैं वह चुनिंदा और खास लोगों को ही दिए जा रहे हैं. शेष श्रद्धालुओं को मिट्टी ले जाने के लिए बर्तन खुद ही उपलब्ध कराना पड़ता है. श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कार्यालय प्रभारी प्रकाश गुप्ता का कहना है कि राम मंदिर निर्माण से निकली मिट्टी राम सेवक पुरम में रखी है. मठ मंदिरों के संतों वे बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं ने राम मंदिर स्थल से मिले रजकण की मांग की है जिसे छोटी डिब्बी में पैक करके कारसेवक पुरम से वितरित की जा रही है.

इसके अलावा उन्होंने बताया कि राममंदिर निर्माण के लिए नींव की खोदाई में निकली मिट्टी भक्तों के लिए आस्था की प्रतीक बन गई है. इसीलिए ट्रस्ट ने इस मिट्टी को 'रामजन्मभूमि रजकण' नाम दिया है. गर्भगृह व मंदिर परिसर से निकली मिट्टी को छोटी-छोटी डिब्बियों में पैक किया गया है. ट्रस्ट का कहना है कि राम जन्म भूमि का गर्भ ग्रह का स्थान ऐसा है जिस पर बहुत लोगों ने बलिदान दिया है और बहुत ही संघर्ष के बाद आज यह दिन देखने को मिल रहा है. तो स्वभाविक है उसकी गर्भग्रह की मिट्टी से लोगों को प्रेम है.

सिंतबर के आखिर हो सकेगा नींव भराई का काम
जानकारी के मुताबिक, सिंतबर के आखिर तक राम मंदिर की नींव भराई का काम पूरा हो सकता है.वैसे करीब 55 फीट गहराई तक मंदिर की नींव की भराई की परत 40 फीसदी तक तैयार हो चुकी है और बाकी का इस महीने के आखिर तक पूरा कर लिया जाएगा. वास्‍तु के जानकारों के मुताबिक, मंदिर की सभी परतों को करीब 25 से 30 दिन तक सूखने के लिए छोड़ा जाता है और इसके बाद इसकी क्षमता वायब्रो रोलर से मापी जाती है.

बता दें कि राम मंदिर निर्माण के लिए 2.77 एकड़ में चार सौ फुट लंबी, 250 फुट चौड़ी और करीब 55 फुट गहरी खुदाई की गई है. यही नहीं, इसका गड्डा समुद्र तल से 95 मीटर ऊंचा है, जिसे 107 मीटर लाना है. वैसे राम मंदिर की नींव भराई के लिए परिसर में ही मिक्सिंग प्‍लान लगाया गया है और दो वायब्रो रोलर ढलाई को कॉम्‍पेक्‍ट कर रहे हैं. इस दौरान करीब 12 इंजीनियर के साथ 50 मजदूर काम कर रहे हैं.
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