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अयोध्या: हिंदुत्व का चेहरा बने डीएम, पहुंचे लोकसभा, ड्राइवर भी बना विधायक

अयोध्या: हिंदुत्व का चेहरा बने डीएम, पहुंचे लोकसभा, ड्राइवर भी बना विधायक

1949 में फैजाबाद के डीएम रहे केके नायर की कहानी!  (File photo)

1949 में फैजाबाद के डीएम रहे केके नायर की कहानी! (File photo)

1949 में जवाहरलाल नेहरू के आदेश के बाद भी अयोध्या के विवादित स्थल से रामलला की मूर्तियां न हटवाने वाले फैजाबाद के डीएम केके नायर हिंदुत्व बड़े प्रतीक बन गए.

    अयोध्या के विवादित स्थल पर रखी गईं रामलला की मूर्तियों को हटवाने के लिए उस वक्त के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने दो बार आदेश दिए लेकिन अयोध्या के डीएम ने दोनों बार उनके आदेश का पालन करवाने में असमर्थता जताकर बड़े हिंदूवादी चेहरे के रूप में पहचान बनाई. डीएम और उनकी पत्नी ने चुनाव लड़ा और लोकसभा पहुंचे जबकि उनका ड्राइवर भी इस इमेज का फायदा उठाकर यूपी विधानसभा पहुंचने में कामयाब रहा. (ये भी पढ़ें: इतिहास के आइने में मंदिर-मस्जिद विवाद: क्या बाबर अयोध्या गया था?)

    साल 1949 में 22 और 23 दिसंबर की आधी रात मस्जिद के अंदर कथित तौर पर चोरी-छिपे रामलला की मूर्तियां रख दी गईं. अयोध्या में शोर मच गया कि जन्मभूमि में भगवान प्रकट हुए हैं. मौक़े पर तैनात कांस्टेबल के हवाले से लिब्राहन आयोग की रिपोर्ट में लिखा गया है कि इस घटना की सूचना कांस्टेबल माता प्रसाद ने थाना इंचार्ज राम दुबे को दी. ‘50-60 लोगों का एक समूह परिसर का ताला तोड़कर, दीवारों और सीढ़ियों को फांदकर अंदर घुस आया और श्रीराम की प्रतिमा स्थापित कर दी. साथ ही उन्होंने पीले और गेरुआ रंग में श्रीराम लिख दिया.’

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    ‘युद्ध में अयोध्या’ नामक अपनी किताब में हेमंत शर्मा ने मूर्ति से जुड़ी एक दिलचस्प घटना का ज़िक्र किया है. उनके मुताबिक, "केरल के अलेप्पी के रहने वाले केके नायर 1930 बैच के आईसीएस अफ़सर थे. फ़ैज़ाबाद के ज़िलाधिकारी रहते इन्हीं के कार्यकाल में बाबरी ढांचे में मूर्तियां रखी गईं या यूं कहें इन्होंने ही रखवाई थीं. बाबरी मामले से जुड़े आधुनिक भारत के वे ऐसे शख्स हैं जिनके कार्यकाल में इस मामले में सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट आया और देश के सामाजिक-राजनीतिक ताने-बाने पर इसका दूरगामी असर पड़ा.” (ये भी पढ़ें: अयोध्या विवाद: क्या यूपी में बीजेपी को मंदिर मुद्दे से फायदा मिला है, देखिए आंकड़े!)

    "नायर 1 जून 1949 को फ़ैज़ाबाद के कलेक्टर बने. 23 दिसंबर 1949 को जब भगवान राम की मूर्तियां मस्जिद में स्थापित हुईं तो उस वक्त के पीएम जवाहरलाल नेहरू ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री गोविंद बल्लभ पंत से फौरन मूर्तियां हटवाने को कहा. उत्तर प्रदेश सरकार ने मूर्तियां हटवाने का आदेश दिया, लेकिन ज़िला मजिस्ट्रेट केकेके नायर ने दंगों और हिंदुओं की भावनाओं के भड़कने के डर से इस आदेश को पूरा करने में असमर्थता जताई.”

    “जब नेहरू ने दोबारा मूर्तियां हटाने को कहा तो नायर ने सरकार को लिखा कि मूर्तियां हटाने से पहले मुझे हटाया जाए. देश के सांप्रदायिक माहौल को देखते हुए सरकार पीछे हट गई. डीएम नायर ने 1952 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली. चौथी लोकसभा के लिए वे उत्तर प्रदेश की बहराइच सीट से जनसंघ के टिकट पर लोकसभा पहुंचे. इस इलाके में नायर हिंदुत्व के इतने बड़े प्रतीक बन गए कि उनकी पत्नी शकुंतला नायर भी कैसरगंज से तीन बार जनसंघ के टिकट पर लोकसभा पहुंचीं. उनका ड्राइवर भी उत्तर प्रदेश विधानसभा का सदस्य बना."

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    विवादित स्थल से मूर्तियां न हटाए जाने के खिलाफ मुसलमानों में तीखी प्रतिक्रिया हुई. उन्होंने इसका विरोध किया. दोनों पक्षों ने अदालत में मुकदमा दायर कर दिया. फिर सरकार ने इस स्थल को विवादित घोषित करके ताला लगा दिया.

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    Tags: Ayodhya Land Dispute, Ayodhya Mandir, Bahraich news, BJP, Ram Mandir Dispute

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