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अयोध्या के संतों ने निर्भया के गुनहगारों की फांसी टलने पर जताई नाराजगी...

निर्भया के गुनहगारों की फांसी टलने पर आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा कि यह बेहद ही दुःखद है...(फाइल तस्वीर)

निर्भया के गुनहगारों की फांसी टलने पर आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा कि यह बेहद ही दुःखद है...(फाइल तस्वीर)

आचार्य सत्येंद्र दास ने कोर्ट (Court) के निर्णय को निराशाजनक करार देते हुए कहा कि 'अपराधी को जानते हुए भी कोर्ट जल्द निर्णय नहीं कर रही है यह बेहद ही दुःखद है. सभी को आशा है कि कोर्ट से न्याय मिलेगा और कोर्ट में ही सभी अपना विश्वास भी रखते हैं'...

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अयोध्या. निर्भया  के (Nirbhaya case) दोषियों को शनिवार को होने वाली फांसी को टाले जाने के बाद अयोध्या (Ayodhya) के संतों ने नाराजगी जाहिर की है. संतों ने इस घटना में दोषियों को लगातार बख्शे जाने का आरोप लगाते हुए न्यायपालिका (Court) की कार्य प्रणाली पर प्रश्नचिन्ह उठाते हुए कहा कि इस तरीके के कार्य से कहीं ना कहीं अपराधियों का मनोबल बढ़ेगा. निर्भया के दोषियों की सजा टाला जाना बेहद निराशाजनक है. आगे संतों ने कहा कि 'ये वही लोग हैं जिन्होंने उस ह्रदय विदारक घटना को अंजाम दिया था और अब क्यों न्यायपालिका इनको वक्त दे रही है यह समझ में नहीं आ रहा है ?'

जल्द फांसी देने की कोर्ट से की अपील
रामलला (Ram lala) के प्रधान पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास (Satyendra Das) ने कहा कि 'यह बेहद ही दुःखद है, जिस प्रकार की दर्दनाक घटना यह हुई थी, निर्भया के साथ जो अत्याचार हुआ उसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था. निर्भया कांड के दोषियों को फांसी की सजा मिल चुकी है उसको बरकरार रखना चाहिए. दोषियों को तत्काल फांसी (Capital Punishment) हो जानी चाहिए'. आचार्य सत्येंद्र दास ने कोर्ट के निर्णय को निराशाजनक करार देते हुए कहा कि अपराधी को जानते हुए भी कोर्ट जल्द निर्णय नहीं कर रही है यह बेहद ही दुःखद है. सभी को आशा है कि कोर्ट से न्याय मिलेगा और कोर्ट में ही सभी अपना विश्वास भी रखते हैं. निर्भया कांड के दोषियों को केवल फांसी होनी चाहिए, उसके अलावा कोई और दंड का प्रावधान होना ही नहीं चाहिए.

रामलला के प्रधान पुजारी ने कहा कि ऐसे व्यक्ति और भी महिलाओं के लिए घातक हो सकते हैं, उनके साथ किसी तरीके की दया की भावना का न रखते हुए उनको सजा मिलनी ही चाहिए. वहीं महंत परमहंस (Mahant Paramahans) ने न्यायपालिका से मांग की है कि निर्भया के दोषियों को तत्काल फांसी पर लटकाया जाए और किसी भी बहन बेटी के साथ यदि कोई इस तरीके का अमानवीय व्यवहार करता है तो अपराधी को मृत्युदंड फांसी से कम सजा न दी जाए.

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