मंदिर में नमाज और मस्जिद में हनुमान चालीसा पाठ से भड़के संत, बोले- यह धार्मिक उन्माद फैलाने का षड्यंत्र

संतो ने दोनों ही मामलों को गलत ठहराया है.
संतो ने दोनों ही मामलों को गलत ठहराया है.

मंदिर में नमाज (Namaz) और मस्जिद में हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) को लेकर अयोध्या के संतों (Saints of Ayodhya) तीखी प्रतिक्रिया दी है. संतों ने कहा कि यह लोग समाज में द्वेष फैलाने का काम कर रहे हैं.

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अयोध्या. मथुरा में मंदिर में नमाज (Namaz) अदा किए जाने के प्रकरण के बाद अब बागपत में मस्जिद में हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) पढ़ने का मामला प्रकाश में आया है. उधर मंदिर में नमाज अदा करने वालों को पुलिस ने पहले ही हिरासत में लिया था, तो मस्जिद में हनुमान चालीसा पढ़ने के प्रकरण में भी पुलिस ने कार्रवाई की है. हालांकि इन दोनों मामलों को लेकर अयोध्या के संतों (Saints of Ayodhya) ने लोगों से अपील की है कि देश विकास की तरफ बढ़ रहा है, इसे नुकसान पहुंचाने का प्रयास न करें.

संतों को सता रहा है ये डर
मस्जिद में हनुमान चालीसा और मंदिर में नमाज पढ़ने के प्रकरण पर अयोध्या के संतों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. संतो ने दोनों ही मामलों को गलत ठहराया है. संत समाज का कहना है कि अपनी-अपनी पूजा पद्धति है और उसके अनुरूप ही पूजा-पाठ और नमाज अदा होनी चाहिए. इसके अलावा संतो ने दोनों पक्षों से निवेदन किया है कि देश विकास की तरफ जा रहा है इस को नुकसान पहुंचाने की साजिश न करें. रामलला के प्रधान पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास (Acharya Satyendra Das) ने मंदिर में नमाज पढ़ने और मस्जिद में हनुमान चालीसा पढ़ने दोनों को ही गलत माना है और कहा कि दोनों समुदायों का अपनी पूजा पद्धति है. मुस्लिम नमाज अदा करते हैं और हिंदू पूजा पाठ करते हैं. मंदिर में नमाज अदा करना और बदले में मस्जिद में हनुमान चालीसा पढ़ना की घटना गलत है. यह आस्था का सवाल है और किसी की आस्था के साथ खिलवाड़ ना किया जाए. यह देश के हित में नहीं है. साथ ही सत्येंद्र दास ने दोनों पक्षों से अपील की है कि यह सब देश हित में नहीं है. अपनी अपनी पूजा पद्धति से पूजा करें. देश प्रगति पर है इसमें व्यवधान न खड़े करें.


हनुमानगढ़ी के महंत ने कही ये बात


हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास (Mahant Raju Das) ने कहा कि नंद बाबा के मंदिर में नमाज अदा करने का प्रकरण बेहद ही निंदनीय है. धर्मगुरुओं से अपील है कि यह अपराधिक घटना है. इस तरह समाज में विद्वेष फैलाने का काम किया जा रहा है और उससे ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण मस्जिद में हनुमान चालीसा पढ़ा जाना है. मस्जिद में नमाज अदा किया जाना चाहिए और मंदिर में भजन-कीर्तन और पूजा पाठ किया जाना चाहिए यह लोग समाज में द्वेष फैलाने का काम कर रहे हैं. ऐसे लोगों को कार्रवाई होनी चाहिए. वहीं, तपस्वी छावनी के महंत परमहंस दास ने कहा कि मुस्लिम समाज के द्वारा मंदिर में नमाज पढ़ा जाना यह धार्मिक उन्माद फैलाने का षड्यंत्र है. सभी को सतर्क होने की आवश्यकता है. मस्जिद में नमाज और मंदिर में पूजा पाठ की प्रक्रिया है. इस तरीके प्रकरण पर कानूनी सहारा लेना है. इसमें उग्र होने की जरूरत नहीं है. छोटी-छोटी बातों को लेकर के दंगा फसाद किया जाता है जिससे समाज का नुकसान होता है. सभी लोगों को चाहिए कानून व्यवस्था बनाए रखें. इस तरीके का कार्य करने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए.
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