लाइव टीवी

अयोध्या के सबसे बड़े साकेत डिग्री कॉलेज की मैनेजमेंट कमेटी के वित्तीय अधिकार सीज

MANISH KUMAR | News18 Uttar Pradesh
Updated: February 12, 2020, 1:24 PM IST
अयोध्या के सबसे बड़े साकेत डिग्री कॉलेज की मैनेजमेंट कमेटी के वित्तीय अधिकार सीज
साकेत डिग्री कॉलेज के मैनेजमेंट कमेटी के वित्तीय अधिकार सीज

ये सबकुछ इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खण्डपीठ के आदेशों पर हुआ है. मामला फीजिक्स के एक अस्सिटेंट प्रोफेसर से जुड़ा हुआ है, जिसने कॉलेज प्रबंधन पर मनमानी करने का आरोप लगाते हुए न्याय के लिए हाईकोर्ट में गुहार लगाई थी.

  • Share this:
अयोध्या. जिले के साकेत डिग्री कॉलेज (Saket Degree College) में सबकुछ ठिकठाक नहीं चल रहा है. मैनेजमेंट कमेटी की मनमानी के कारण ऐसे हालात पैदा हुए हैं. इसीलिए इस मनमानी पर लगाम लगाने की कोशिशों के तहत उच्च शिक्षा विभाग ने इस कॉलेज की मैनेजमेंट कमेटी (Management Committee) की वित्तीय अधिकार (Financial Rights) को सीज़ कर दिया है. इसे क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी ने अपने हाथों में ले लिया है. कोई बड़ी बात नहीं होगी यदि इस कमेटी को ही अगले कुछ दिनों में भंग भी कर दिया जाये.

हाईकोर्ट के आदेश के बाद हुई कार्रवाई

ये सबकुछ इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खण्डपीठ के आदेशों पर हुआ है. मामला फीजिक्स के एक अस्सिटेंट प्रोफेसर से जुड़ा हुआ है, जिसने कॉलेज प्रबंधन पर मनमानी करने का आरोप लगाते हुए न्याय के लिए हाईकोर्ट में गुहार लगाई थी. फीजिक्स के अस्सिटेंट प्रोफेसर डॉ. राजेश वर्मा साकेत डिग्री कॉलेज में साल 2004 से मानदेय पर पढ़ा रहे थे. शासन के आदेशों के बाद पिछले साल 7 मार्च को उन्हें रेग्यूलर कर दिया गया. लेकिन कॉलेज ने उन्हें अपने पद पर ज्वाइन नहीं करने दिया. इतना ही नहीं उनका गोंडा ट्रांसफर भी कर दिया गया. इससे क्षुब्ध डॉ. राजेश वर्मा ने हाईकोर्ट में गुहार लगाई. हाईकोर्ट ने उन्हें साकेत डिग्री कॉलेज में ही ज्वाइन करने के आदेश दिये.

प्रोफ़ेसर को नहीं दी गई पूरी सैलरी

वर्मा ने ज्वाइन भी किया लेकिन कॉलेज के प्रबंधन ने उन्हें फुल सैलरी देने से मना कर दिया. इसपर वर्मा ने फिर हाईकोर्ट में गुहार लगाई. इसपर उन्हें सैलरी देने के आदेश हुए लेकिन, कॉलेज फिर अपने रूख ने नहीं डिगा. वर्मा ने फिर इसे अदालत की अवमानना के रूप में याचिका दाखिल की. इसपर हाईकोर्ट ने क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी की पर्सनल एपीयरेंस लगा दी. तब जाकर आनन फानन में डॉ. राजेश वर्मा को पूरी सैलरी दी गयी.

वित्तीय अधिकार हुए सीज

पीड़ित को पूरी सैलरी देने के लिए ही साकेत डिग्री कॉलेज की प्रबंध समिति के वित्तीय अधिकार सीज किये गये हैं. उच्च शिक्षा विभाग में सहायक निदेशक संजय सिंह ने न्यूज़ 18 को बताया कि कॉलेज की प्रबंध समिति कोर्ट के आदेश को नहीं मान रही थी, लिहाजा उसके वित्तीय अधिकार सीज कर दिये गये और इसे क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी को दे दिया गया हैं. इस मामले पर पीड़ित डॉ राजेश वर्मा ने बताया कि एक साल तक वे बिना सैलरी के काम करते रहे. उनका पूरा परिवार सड़क पर आ गया. इस तरह का अन्याय किसी के साथ नहीं होना चाहिए.अयोध्या में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि उच्च शिक्षा विभाग और कोर्ट की नाराजगी को देखते हुए साकेत डिग्री कॉलेज की मैनेजमेंट कमेटी को ही भंग किया जा सकता है. हालांकि विभाग के अधिकारियों ने अभी ऐसी किसी भी जानकारी से इनकार किया है.

अयोध्या राजा के भाई हैं अध्यक्ष

बता दें कि अयोध्या का साकेत डिग्री कॉलेज पूर्वांचल के सबसे बड़े कॉलेजों में से एक है. यहां 12 हजार से ज्यादा छात्र पढ़ते हैं. जिस मैनेजमेंट कमेटी पर ये दाग लगा है उसके अध्यक्ष शैलेन्द्र मोहन मिश्रा हैं जो राजा अयोध्या विमलेन्द्र मोहन मिश्रा के भाई है. विमलेन्द्र मोहन मिश्रा हाल ही में राम मंदिर के लिए बनाये गये ट्रस्ट में बतौर सदस्य शामिल किये गये हैं.

ये भी पढ़ें:गोमती रिवर फ्रंट प्राधिकरण पर योगी सरकार को सपा ने दी ये नसीहत

यूपी विधानसभा बजट सत्र 13 फरवरी से, विपक्ष की CAA पर सरकार को घेरने की तैयारी

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए अयोध्या से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: February 12, 2020, 1:24 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर