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अयोध्या केस सुनवाई: रामलला विराजमान की दलील- जहां नमाज वह हर जगह मस्जिद नहीं

News18 Uttar Pradesh
Updated: August 17, 2019, 8:23 AM IST
अयोध्या केस सुनवाई: रामलला विराजमान की दलील- जहां नमाज वह हर जगह मस्जिद नहीं
सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या केस की सुनवाई का सातवां दिन.

Ayodhya Case: पांच जजों की संविधान पीठ ने जिरह को सुना और अधूरी बहस को पूरा करने के लिए सोमवार तक सुनवाई स्थगित कर दी.

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अयोध्या विवाद की सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में चल रही सुनवाई के दौरान सातवें दिन शुक्रवार को हिंदू पक्षकारों ने पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट बतौर सुबूत पेश करते हुए कहा कि विवादित ढांचे के नीचे बहुत सारे स्तंभों वाला मंदिर या मंडप था. इनके स्तंभों पर देवी-देवताओं की मूर्तियां बनी थीं. यह प्राचीन मंदिर ईसा पूर्व की दूसरी शताब्दी (101-200 ईसा पूर्व) का है. रामलला विराजमान की तरफ से दलील दी गई कि महज नमाज पढ़ने से कोई मालिकाना हक का दावा नहीं कर सकता. नमाज तो सड़क पर भी पढ़ी जाती है, इसका मतलब ये नहीं है कि सड़क को मस्जिद मान लिया जाए. इस दौरान पांच जजों की संविधान पीठ ने जिरह को सुना और अधूरी बहस को पूरा करने के लिए सोमवार तक सुनवाई स्थगित कर दी.

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ के समक्ष रामलला विराजमान की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील सीएम वैद्यनाथन ने कहा कि विवादित स्थल पर देवताओं की अनेक आकृतियां मिली हैं. उन्होने विवादित स्थल का निरीक्षण करने के लिए कोई की ओर से नियुक्त कमिश्नर की रिपोर्ट के अंश पढ़कर सुनाए. कमिश्नर ने 16 अप्रैल 1950 को विवादित स्थल का निरीक्षण किया था और खंभों पर शिव तांडव, भगवान कृष्ण और राम के बालरूप के चित्रण का वर्णन रिपोर्ट में किया था.

संविधान पीठ को सौंपा नक्शा और एलबम

वैद्यनाथन ने रिपोर्ट के साथ अयोध्या में मिला एक नक्शा भी पीठ को सौंपा. उन्होने कहा कि इन तथ्यों से पता चलता है कि हिंदुओं के लिए यह धार्मिक रूप से पवित्र स्थल था. उन्होंने ढांचे के भीतर बने देवताओं के चित्रों का एक एलबम भी पीठ को सौंपा और कहा कि मस्जिदों में इस तरह के चित्र नहीं होते.

वैद्यनाथन ने अदालत को बताया कि बाबरी मस्जिद वाली जगह पर पुरातत्व विभाग की खोदाई के बाद ऐतिहासिक सुबूत मिले थे. यह खोदाई इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देश और निगरानी में हुई थी. इस रिपोर्ट में बताया गया था कि खोदाई में विभिन्न परतों में कई ढांचे मिले थे. उदाहरण के लिए भगवान के अभिषेक के बाद अतिरिक्त जल की निकासी के लिए नाली का ढांचा मिला.

पुरातत्व के सबूत भी किए पेश

वरिष्ठ अधिवक्ता ने बताया कि पुरातत्व वेत्ताओं ने रामजन्मभूमि पर शोध के लिए स्ट्रैटीग्राफी विधि का इस्तेमाल किया था. इस विधि में जमीन के नीचे की परतों का अध्ययन किया जाता है. इन परतों के बीच मिले प्राचीन सभ्यताओं के ढांचों के अवशेषों से पता चला कि जनता के लिए विशाल ढांचा बना हुआ था. इस स्थान का इस्तेमाल लोग बड़े पैमाने पर पूजा-पाठ के लिए करते थे. यह ढांचा निजी उपयोग में आने वाले ढांचों से एकदम अलग था.
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यहां पर बर्तनों के अलावा टेराकोटा की बनी टूटी हुई मूर्तियां भी थीं. सबसे पुराने उत्तर पश्चिम ‘ब्लैक पॉलिश लेवल’पर अशोक के काल की लिपि भी लिखी मिली. बहस के दौरान वकील ने बताया कि ईसा पूर्व की दूसरी सदी में विवादास्पद स्थल पर धार्मिक ढांचे होने की बात साबित हो चुकी है.

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First published: August 17, 2019, 8:21 AM IST
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