अयोध्या की सुरक्षा बढ़ाई गई, 3 जोन से मांगे गए तेज-तर्रार सिपाहियों के नाम

रामनगरी अयोध्या (Ayodhya) की सुरक्षा बढ़ा दी गई है. पुलिस महानिदेशक (DGP) कार्यालय ने बरेली, कानपुर, प्रयागराज जोन के एडीजी से तेज-तर्रार सिपाहियों के नाम मांग गए हैं. अयोध्या की सुरक्षा के लिए तीनों जोनों से 100-100 सिपाहियों के नाम मांगे गए हैं.

News18 Uttar Pradesh
Updated: August 29, 2019, 9:46 PM IST
अयोध्या की सुरक्षा बढ़ाई गई, 3 जोन से मांगे गए तेज-तर्रार सिपाहियों के नाम
अयोध्या की सुरक्षा बढ़ाई गई, 3 जोनों से मांगे गए तेज-तर्रार सिपाहियों के नाम.
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Updated: August 29, 2019, 9:46 PM IST
रामनगरी अयोध्या (Ayodhya) की सुरक्षा बढ़ा दी गई है. पुलिस महानिदेशक (DGP) कार्यालय ने बरेली, कानपुर, प्रयागराज जोन के एडीजी से तेज-तर्रार सिपाहियों के नाम मांगे गए हैं. अयोध्या की सुरक्षा के लिए तीनों जोनों से 100-100 सिपाहियों के नाम मांगे गए हैं. इसके लिए साफ छवि और अयोध्या के मूल निवासी न होने की शर्त रखी गई है. तीन-तीन महीने करके एक साल तक 300 अतिरिक्त सिपाहियों को तैनात करने की योजना है. सुप्रीम कोर्ट में रोजाना हो रही सुनवाई को देखते हुए एहतियात के तौर पर अयोध्या की सुरक्षा बढ़ाई जा रही है.

राम लला के दावे का विरोध नहीं कर रहा है निर्मोही अखाड़ा
अयोध्या मामले (Ayodhya Case) में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court Of India) में चल रही सुनवाई में 27 अगस्त 2019 को सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान निर्मोही अखाड़े (Nirmohi Akhada) ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि वह अयोध्या में विवादित राम जन्मभूमि (Ram Janam Bhumi) के स्वामित्व के लिए ‘राम लला’ के दावे का विरोध नहीं कर रहा है. अखाड़ा ने प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ को इस रुख के बारे में बताया.

उससे पूछा गया था कि क्या वह इस तथ्य के आलोक में रामलला की याचिका का विरोध कर रहा है कि ‘शबैत’ (उपासक) के तौर पर संपत्ति पर उसका अधिकार तभी हो सकता है जब ‘राम लला विराजमान’ के वाद को विचारार्थ स्वीकार किया जाए. निर्मोही अखाड़े की ओर से वरिष्ठ वकील सुशील जैन ने पीठ से कहा, ‘सोमवार को आपने जो कहा, उसके जवाब में निर्मोही अखाड़ा का रूख यह है कि वह वाद संख्या 5 (देवकी नंदन अग्रवाल के माध्यम से देवता द्वारा दाखिल) की विचारणीयता के मुद्दे पर जोर नहीं देगा. बशर्ते कि देवता के वकील भी अखाड़ा के शबैत अधिकारों को चुनौती नहीं दें.’

पीठ ने अखाड़ा को उसका रुख स्पष्ट करने का दिया निर्देश
पीठ में न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस ए नजीर भी शामिल हैं. पीठ ने जैन के इस लगातार दिए जा रहे रुख से इत्तेफाक नहीं जताया कि देवता का मुकदमा विचारणीय नहीं है क्योंकि उपासक के रूप में केवल अखाड़ा को देवता की तरफ से मुकदमा दायर करने का हक है. पीठ ने अखाड़ा को उसका रुख स्पष्ट करने का निर्देश दिया. दशकों पुराने संवेदनशील मामले की 13वें दिन की सुनवाई में दलीलें पेश करते हुए जैन ने कहा कि 1934 से किसी मुस्लिम ने नियमित नमाज अदा करने के लिए विवादित इमारत में प्रवेश नहीं किया है और यह स्थान अखाड़े के कब्जे वाला मंदिर है. पीठ ने कहा, ‘आपने यह सब कल ही पढ़ा है. आप जो पढ़ चुके हैं, उसके आगे की बात करिए. दोहराइए मत.’

अखाड़े का कब्जा दिखाते हैं राजस्व रिकॉर्ड
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जैन ने कहा कि मुस्लिम पक्ष की इस दलील को नहीं माना जा सकता कि 1934 में सांप्रदायिक दंगे के बाद विवादित ढांचे की मरम्मत के लिए एक ठेकेदार को कहा गया था. इस बात पर इसलिए भरोसा नहीं किया जा सकता क्योंकि राजस्व रिकॉर्ड अखाड़े का कब्जा दिखाते हैं. इस पर वरिष्ठ वकील ने कहा कि मामले में मुस्लिम पक्षों का वाद निर्धारित कालावधि से बहुत बाद का है क्योंकि उन्होंने वाद के लिए कारण सामने आने के बाद समय पर अदालत का रुख नहीं किया. उन्होंने कहा कि वाद का पहला कारण 1855 में सामने आया था, जब एक दंगा भड़का था. इसके बाद मुसलमानों ने इस जगह पर कब्जा ले लिया और बाद में कुछ समय पश्चात हिंदुओं का कब्जा हो गया.

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First published: August 29, 2019, 9:09 PM IST
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