लाइव टीवी

अयोध्या मामले की रिव्यू पिटिशन: जमीयत ने वकील राजीव धवन को हटाया

Mohd Shabab | News18 Uttar Pradesh
Updated: December 3, 2019, 4:41 PM IST
अयोध्या मामले की रिव्यू पिटिशन: जमीयत ने वकील राजीव धवन को हटाया
इस बार जमीयत की तरफ से वरिष्ठ वकील राजीव धवन मामले की पैरवी नहीं करेंगे.

मौलाना सुफियान निजामी ने कहा है कि जमीयत (Jamiyat Ulema Hindi) ने किन कारणों से राजीव धवन (Senior Advocate Rajeev Dhavan) को अलग किया है, यह उनका विषय है. वहीं ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) की तरफ से राजीव धवन ही केस की पैरवी करेंगे.

  • Share this:
लखनऊ. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में रिव्यू पिटिशन (Review Petition) दायर करने वालों में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के साथ-साथ जमीयत उलमा-ए-हिंद (Jamiyat Ulema Hindi) भी अलग से रिव्यू पिटिशन दायर कर रही है. लेकिन इस बार जमीयत की तरफ से वरिष्ठ वकील राजीव धवन (Rajeev Dhawan) मामले की पैरवी नहीं करेंगे. जमीयत ने राजीव धवन को इस मामले से अलग कर दिया है. अब उनकी जगह किसी अन्य वकील को हायर किया जाएगा. हालांकि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा है कि उनकी तरफ से दाखिल होने वाले रिव्यू पिटीशन की पैरवी राजीव धवन ही करेंगे.

AIMPLB के वकील रहेंगे राजीव धवन

मौलाना सुफियान निजामी ने कहा है कि जमीयत ने किन कारणों से राजीव धवन को अलग किया है, यह उनका विषय है. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की तरफ से राजीव धवन ही केस की पैरवी करेंगे. बता दें एआईएमपीएलबी और जमीयत अलग-अलग रिव्यू पिटीशन दाखिल कर रहे हैं. मुस्लिम पक्षकारों में जमीयत उलमा-ए-हिंद, इकबाल अंसारी, सुन्नी वक्फ बोर्ड हैं. हालांकि इकबाल अंसारी और सुन्नी वक्फ बोर्ड 9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट से फैसला आने के बाद किसी भी तरह की रिव्यू पीटीशन दाखिल करने से मना कर चुके हैं.

वसीम रिजवी ने बोला हमला

वहीं राजीव धवन को जमीयत की तरफ से हटाए जाने पर शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि पाकिस्तान के पास पैसों की कमी हो गई है और वह राजीव धवन की महंगी फीस नहीं दे पा रहे होंगे. इसीलिए राजीव धवन को जमीयत उलमा हिंद ने अपना वकील बनाने से मना कर दिया है. इसके साथ ही वसीम रिजवी ने यह भी कहा सुप्रीम कोर्ट का राम जन्मभूमि पर जो फैसला आया है वह बेहद नपा-तुला है और इस फैसले में किसी भी तरह की कोई गुंजाइश नहीं है. उन्होंने कहा इस फैसले में जो गलत था उसे गलत कहा गया और जिस का हक था उसे हक दे दिया गया. रिव्यू पिटिशन करने वालों को भी मालूम है कि पिटिशन दायर करने से कोई नतीजा निकलने वाला नहीं है. ऐसे लोग इसकी आड़ में हिंदू और मुसलमानों के बीच नफरत का बीज बोना चाहते हैं.

बता दें कि 9 दिसंबर से पहले पहले ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत उलमा हिंद को सुप्रीम कोर्ट में अपनी रिव्यू पिटिशन दायर करनी है. 9 नवंबर 2019 को फैसला आने के 1 महीने के भीतर ही सुप्रीम कोर्ट में सभी पार्टियों को अपनी अपनी रिव्यू पिटिशन लगानी है. हालांकि इस मामले से जुड़े दो महत्वपूर्ण मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी और सुन्नी वक्फ बोर्ड 9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट से फैसला आने के बाद किसी भी तरह की रिव्यू पीटीशन से खुद को अलग कर चुके हैं.

ये भी पढ़ें:
Loading...

अयोध्या विवाद: मुस्लिम पक्षकारों ने सुप्रीम कोर्ट को लिखा पत्र, की ये मांग

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए अयोध्या से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: December 3, 2019, 4:16 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...