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अयोध्या में 5 एकड़ जमीन लेनी है या नहीं, सुन्नी वक्फ बोर्ड की बैठक में होगा फैसला

News18 Uttar Pradesh
Updated: November 10, 2019, 9:33 PM IST
अयोध्या में 5 एकड़ जमीन लेनी है या नहीं, सुन्नी वक्फ बोर्ड की बैठक में होगा फैसला
सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के वकील जफरयाब जिलानी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद एक पीसी के दौरान. (फाइल फोटो)

सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड (Sunni Central Waqf Board) सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के निर्देश पर अयोध्या (Ayodhya) में पांच एकड़ जमीन लेने के मामले पर 26 नवंबर को प्रस्तावित बैठक में फैसला करेगा.

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लखनऊ. सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड (Sunni Central Waqf Board) सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के निर्देश पर अयोध्या (Ayodhya) में पांच एकड़ जमीन लेने के मामले पर 26 नवंबर को प्रस्तावित अपनी बैठक में फैसला करेगा. बोर्ड के अध्यक्ष जफर फारूकी ने रविवार को कहा कि बोर्ड की आम बैठक आगामी 26 नवंबर को संभावित है. उसमें ही यह निर्णय लिया जाएगा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार अयोध्या में सरकार द्वारा दी जाने वाली पांच एकड़ जमीन ली जाए या नहीं.

फारूकी ने बताया कि वैसे तो वक्फ बोर्ड की बैठक 13 नवंबर को होनी थी, मगर अयोध्या मामले में निर्णय आने के मद्देनजर इसे टाल दिया गया. अब यह 26 नवंबर को संभावित है. फारूकी ने कहा कि जमीन लेने को लेकर उन्हें लोगों की अलग-अलग राय मिल रही है. मगर उनका व्यक्तिगत रूप से मानना है कि नकारात्मकता को सकारात्मकता से ही खत्म किया जा सकता है.

कुछ लोगों की राय, हमें जमीन नहीं लेनी चाहिए
बोर्ड के प्रमुख ने कहा, 'कुछ लोग यह राय दे रहे हैं कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को बाबरी मस्जिद के एवज में कोई वैकल्पिक जमीन नहीं लेनी चाहिए. मैं उनके जज्बात की कद्र करता हूं, मगर मेरी समझ से इससे नकारात्मकता ही बढ़ेगी. फारूकी ने कहा कि मैंने अयोध्या मामले में मध्यस्थता की पैरोकारी इसीलिए की थी, ताकि दोनों पक्षों के बीच व्याप्त नकारात्मकता खत्म हो जाए. वह कोशिश भले ही कामयाब न हुई हो लेकिन हमारी राय बिल्कुल साफ है.'

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बैठक में तय होगा कि जमीन लेनी है या नहीं
जफर फारूकी ने कहा कि कुछ लोगों का यह भी मत है कि वक्फ बोर्ड वह जमीन ले ले और उस पर कोई शिक्षण संस्थान बना दे. उसी परिसर में एक मस्जिद की भी तामीर हो जाए. फारूकी ने कहा कि अगर बोर्ड की बैठक में मस्जिद के लिए जमीन लेने का फैसला किया गया तो उस जमीन के आसपास की जरूरतों के हिसाब से निर्माण संबंधी कदम उठाए जाएंगे. उन्होंने कहा कि जहां तक जमीन का सवाल है तो वह उच्चतम न्यायालय के आदेश का हिस्सा है जिसका अनुपालन सरकार को करना होगा. हालांकि, बोर्ड अपनी बैठक में यह तय करेगा कि उसे वह जमीन लेनी है या नहीं. अब जमीन कैसे ली जाएगी, उसकी क्या शर्ते होंगी यह भी बोर्ड को तय करना होगा.
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प्रमुख पक्षकार था सुन्नी सेंट्रल बोर्ड
मालूम हो कि राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में उच्चतम न्यायालय ने शनिवार को ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए सरकार को विवादित स्थल पर मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट बनाने और मुसलमानों को अयोध्या में ही किसी प्रमुख स्थान पर मस्जिद बनाने के लिए 5 एकड़ जमीन देने के निर्देश दिए थे. सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड इस मामले में प्रमुख पक्षकार था.

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First published: November 10, 2019, 2:20 PM IST
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