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500 साल बाद चमड़े के जूते पहनेंगे अयोध्या के डेढ़ लाख सूर्यवंशी, यह है ऐतिहासिक कारण

News18 Uttar Pradesh
Updated: November 19, 2019, 1:46 PM IST
500 साल बाद चमड़े के जूते पहनेंगे अयोध्या के डेढ़ लाख सूर्यवंशी, यह है ऐतिहासिक कारण
राम मंदिर निर्माण को लेकर सूर्यवंशी समाज के लोगों ने सदियों पहले प्रतिज्ञा ली थी. (फाइल फोटो)

अयोध्या (Ayodhya) और बस्ती (Basti) जिले के 105 गांव के सूर्यवंशी क्षत्रिय (Suryavanshi Kshatriya) समाज के लोगों ने 16वीं शताब्दी में राम मंदिर के लिए मुगलों से युद्ध लड़ा था.

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अयोध्या. राम जन्मभूमि (Ram Janmbhoomi)-बाबरी मस्जिद (Babri Masjid) विवाद पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के फैसले ( Verdict) के बाद यदि सबसे ज्यादा किसी को खुशी हुई है तो वे हैं अयोध्या और उसके असपास के गांवों में रहने वाले सूर्यवंशी क्षत्रिय (Suryavanshi Kshatriya) समाज के लोग. इसकी वजह यह है कि इस समाज के हजारों लोग 500 साल बाद अब माथे पर पगड़ी और पैरों में चमड़े के जूते पहनेंगे. इसके पीछे भी एक ऐतिहासिक कारण है. दरअसल, अयोध्या और इसके आसपास के 105 गांव के सूर्यवंशी क्षत्रिय समाज के लोगों ने रामजन्म भूमि को बाबरी मस्जिद से मुक्त कराने के लिए मुगलों से युद्ध लड़ा था. हालांकि, उस युद्ध में सूर्यवंशी क्षत्रिय समाज के वीरों को हार का सामना करना पड़ा था. इसके बाद सूर्यवंशी समाज के लोगों ने प्रण लिया था कि जब तक अयोध्या में राम मंदिर बनने का मार्ग प्रशस्त नहीं हो जाता तब तक वे लोग न तो सिर पर पगड़ी बांधेंगे और न ही पैरों में जूते पहनेंगे. अब अयोध्‍या मामले पर उच्चतम न्यायालय का फैसला आने के बाद सूर्यवंशी क्षत्रिय समाज के लोग तकरीबन 500 वर्षों के बाद पगड़ी और जूतों का इस्‍तेमाल कर सकेंगे. बता दें कि बिहार के किशनगंज में भी एक राम भक्त 18 साल बाद पैरों में चप्पल पहनेगा.

गांव-गांव घूमकर बांट रहे पगड़ी
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इस समाज के लोग गांव-गांव घूमकर सूर्यवंशियों के बीच पगड़ी बांट रहे हैं. कहा जा रहा है कि बगड़ी बांटने के लिए सभाओं का भी आयोजन किया जा रहा है. जानकारी के मुताबिक, सूर्यवंशी क्षत्रिय समाज के लोग खुद को भगवान राम का वंशज मानते हैं. इलाहाबाद हाइकोर्ट के पूर्व जज डीपी सिंह का कहना है कि उनके पूर्वजों ने 16वीं शताब्दी में मुगलों से युद्ध लड़ा था. उन्होंने बताया कि सूर्यवंशियों ने ठाकुर गजसिंह के नेतृत्व में युद्ध लड़ा था. हालांकि, वे जंग हार गए थे. इसके बाद गजसिंह ने प्रण लिया कि जब तक अयोध्या में राम मंदिर नहीं बनेगा तब तक हमारे समाज के लोग जूते और पगड़ी का इस्‍तेमाल नहीं करेंगे. साथ ही छाते का भी इस्तेमाल न करने का फैसला किया था. अयोध्य और बस्ती जिले के 105 गांवों के सूर्यवंशी लोग इस संकल्प का पालन कर रहे हैं.

400 के करीब पगड़ी बांटी गई है

'दैनिक भास्कर'
में छपी खबर के अनुसार, स्थानीय निवासी बासदेव सिंह का कहना है कि इन गांवों में सूर्यवंशी समाज के लगभग डेढ़ लाख लोग रहते हैं. अभी तक 400 के करीब पगड़ी बांटी गई है. यह क्रम लगातार जारी है. वहीं, अयोध्या के भारती कथा मंदिर के महंत ओमश्री भारती ने बताया कि सूर्यवंशियों ने अपने प्रण का पूरी लगन के साथ पालन किया है. इस समाज के लोग शादी में पगड़ी की जगह मौरी पहनते थे. वहीं, चमड़े के जूते की जगह खड़ाऊ पहना करते थे. उन्होंने कहा कि राम मंदिर निर्माण को लेकर इस समाज में काफी उत्साह है.

18 साल से नहीं पहनी चप्‍पल
बता दें कि बिहार के किशनगंज में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद एक राम भक्त 18 साल बाद चप्पल पहनेगा. इस शख्‍स ने भी प्रण किया था कि जब तक अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण नहीं हो जाता तब तक वह नंगे पांव रहेंगे.  इस राम भक्त का नाम है देवदास उर्फ देबू दा. वह किशनगंज जिले के रोलबाग मोहल्ला के रहने वाले हैं. 38 वर्षीय देबू दा ने 18 साल पहले प्रतिज्ञा ली थी कि जब तक अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण नहीं हो जाता, तब तक वो नंगे पांव रहेंगे. अब राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ होने के बाद देबू दा अयोध्या में जाकर चप्पल पहनेंगे.
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First published: November 19, 2019, 12:54 PM IST
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