राम मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन कल अयोध्या का करेंगे दौरा, नींव खुदाई से पहले परिसर का लेंगे जायजा
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राम मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन कल अयोध्या का करेंगे दौरा, नींव खुदाई से पहले परिसर का लेंगे जायजा
पिछले महीने आईआईटी चेन्नई के विशेषज्ञ अयोध्या पहुंचकर जमीन की जांच के लिए मिट्टी के सैंपल लिए थे. (फाइल फोटो)

राम मंदिर (Ram Mandir) के लिए नक्शा स्वीकृति होने के बाद मन्दिर निर्माण कार्य शुरू करने की तैयारी तेज हो गई है. वहीं, मंदिर के निर्माण में लोहे का प्रयोग नहीं किया जाएगा.

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अयोध्या. राम मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्र (Chairman Nripendra Mishra ) सोमवार को अयोध्या (Ayodhya) के दौरे पर जाएंगे. जिलाधिकारी व राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदेन सदस्य अनुज झा (Anuj Jha) ने बताया कि नृपेंद्र मिश्र कल 7 सितंबर को अयोध्या पहुंचेंगे. वे ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय (Champat Rai) व अन्य सदस्यों से मुलाकात करेंगे. नीव खुदाई के पहले परिसर का जायजा लेंगे. उनका फोकस राम मंदिर की नींव खुदाई की तैयारी के साथ आधुनिक अयोध्या के ब्लूप्रिंट पर भी होगा. यहां पर अंतरराष्ट्रीय स्तर के तमाम सुविधाएं कारपोरेट इन्वेस्टमेंट से सजाने की तैयारी की भी सूचना है. श्रीराम जन्म भूमि मंदिर के नींव की मृदा परीक्षण रिपोर्ट आईआईटी चेन्नई से आ गई है. हालांकि, अभी सीबीआरआई रुड़की की भूकंप रोधी रिपोर्ट का इंतजार है.

दोनों रिपोर्ट आने के बाद ही संस्था l&t नींव निर्माण की वास्तविक डिजाइन को अंतिम रूप देते हुए खुदाई शुरू करेगी. इस बीच कानपुर से पाइलिंग मशीन अयोध्या पहुंच चुकी है. जिस स्थान पर राम मंदिर बनना है उस स्थान पर 12 गड्ढे खोदे जाएंगे, जिसकी गहराई 35 मीटर होगी. इस पाइलिंग मशीन के द्वारा ही सभी गड्ढे खोदे जाएंगे. राम मंदिर के लिए नक्शा स्वीकृति होने के बाद मन्दिर निर्माण कार्य शुरू करने की तैयारी तेज हो गई है. अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए अभूतपूर्व तरीके से कंस्ट्रक्शन और प्लानिंग की जा रही है. उस पर आधारभूत ढांचा तैयार करने के लिए 12 स्थानों पर 35 मीटर गहराई के गड्ढो की तैयारी की डिजाइन को अंतिम रुप दिया जा रहा है.

इसमें लोहे का प्रयोग नहीं किया जाएगा
खास बात यह है कि इसमें लोहे का प्रयोग नहीं किया जाएगा, क्योंकि इसकी उम्र केवल 100 वर्ष है. पिछले महीने आईआईटी चेन्नई के विशेषज्ञ अयोध्या पहुंचकर जमीन की जांच के लिए मिट्टी के सैंपल लिए थे जिसकी रिपोर्ट आ गई है. एलएनटी के इंजीनियर रिपोर्ट का अध्ययन कर रहे हैं. राम मंदिर के नीव में आमतौर पर बाजारों में बिकने वाले कंक्रीट व सीमेंट का इस्तेमाल नहीं होगा. आईआईटी चेन्नई व सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट रुड़की के विशेषज्ञ द्वारा की गई जांच रिपोर्ट पर ही कंक्रीट व सीमेंट का इस्तेमाल होगा.
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