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ऐसा होगा राममंदिर ट्रस्ट, ये ट्र्स्ट और बाबा हो सकते हैं शामिल

Anil Rai | News18 Uttar Pradesh
Updated: November 15, 2019, 3:42 PM IST
ऐसा होगा राममंदिर ट्रस्ट, ये ट्र्स्ट और बाबा हो सकते हैं शामिल
अयोध्या में भगवान राम का मंदिर बनाने के लिए ट्र्स्ट बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है.

केंद्र सरकार संसद के शीतकालीन सत्र में अयोध्या (Ayodhya) पर ट्रस्ट (Trust) बनाने का बिल (Bill) ला सकती है. हालांकि ट्रस्ट पर यदि आम सहमति नहीं बन पाती है तो ऐसे में सवाल उठता है कि अयोध्या के इस ट्रस्ट में कौन-कौन शामिल हो सकता है.

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अयोध्या. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अयोध्या (Ayodhya) में भगवान राम का मंदिर (Ram Temple) बनाने के लिए ट्र्स्ट (Trust) बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश में साफ है कि मंदर निर्माण के लिए ट्रस्ट तीन महीने के भीतर बना लिया जाए. ऐसे में सरकार से जुड़े सूत्र ये दावा कर रहे हैं कि सरकार संसद (Parliament) के शीतकालीन सत्र (Winter Session) में अयोध्या पर ट्रस्ट बनाने का बिल ला सकती है. हालांकि ट्रस्ट पर यदि आम सहमति नहीं बन पाती है तो ऐसे में सवाल उठता है कि अयोध्या के इस ट्रस्ट में कौन-कौन शामिल हो सकता है.

अयोध्या में करीब 1 हजार से ज्यादा ट्रस्ट

अयोध्या में ट्रस्टों की संख्या पर गौर फरमाएं तो अयोध्या मंडल में सहायक रजिस्टार रहे एक अधिराकारी का दावा है कि इस मंडल में हर साल करीब 100 से ज्यदा ट्रस्ट और 1 हजार के आसपास सोसयटी रजिस्टर्ड होती है जिसमें 2 तिहाई से ज्याद अयोध्या की होती हैं. अयोध्या के मंदिरों के पते पर करीब 1 हजार से ज्यादा ट्रस्ट रजिस्टर्ड हैं, लेकिन इनमें से ज्य़ादा ट्रस्टों के अयोध्या में राम मंदिर निर्माण से लेना देना नहीं है, बल्कि अपने मंदिर और आश्रमों की देखरेख के लिए इन ट्रस्टों में अपना रजिस्ट्रेशन कराया है.

मंदिर निर्माण के लिए तीन ट्रस्ट का दावा सबसे मजबूत

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए तीन ट्रस्ट पहले ही बने हुए हैं. इनमें 1985 में विश्व हिन्दू परिषद की देखरेख में बना श्रीराम जन्मभूमि न्यास सबसे पुराना ट्रस्ट है. इस ट्रस्ट ने राम मंदिर आंदोलन के दौरान अच्छा खासा चंदा भी इकठ्ठा किया था और इसकी देख रेख में मंदिर के पत्थर तराशने का काम किया जा रहा है. दूसरा ट्र्स्ट विवादित ढांचा गिराए जाने के बाद रामालय नाम से रजिष्टर्ड है. रामालय तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिंहराव की पहल पर बनाया गया था. इन दोनों के अलावा तीसरा ट्रस्ट श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण न्यास है, जिसकी अगुवाई जानकीघाट बड़ा स्थान के महंत जन्मेजय शरण की करते हैं.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद तीनों ट्रस्ट मंदिर निर्माण के लिए अपनी अलग-अलग दावेदारी पेश कर रहे हैं. भले ही अभी सिर्फ तीन ही ट्रस्ट खुलकर सामने आए हैं, लेकिन जैसे-जैसे मंदिर निर्माण का काम आगे बढ़ेगा और ट्रस्ट और लोगों का नाम आगे आने की संभावने से इनकार नहीं किया जा सकता है और शायद इसीलिए केन्द्र सरकार इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी फूंक-फूंककर आगे बढ़ रही है.

ट्रस्टों के साथ मंहत और पूजारियों के अलग-अलग दावेऐसा नहीं कि सिर्फ ये तीन ट्रस्ट ही मंदिर निर्माण का असली अधिकारी होने का दावा कर रहे हैं. राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास का कहना है कि पहले ही रामजन्मभूमि न्यास बना है, उसी में कुछ लोग जोड़ दिए जाएं. उनका कहना है कि नए ट्रस्ट की क्या आवश्यकता है. हालांकि इससे इतर राम लला मंदिर के मुख्य पूजारी सतेन्द्र दास नृत्य गोपला दास के दावे से सहमत नहीं हैं. उनका कहना है राम जन्मभूमि न्यास के बाइलॉज का अध्ययन होना चाहिए तब तय होगा कि उसमें नए सदस्य शामिल हो सकते हैं या नहीं और इन सदस्यों की क्या भूमिका होगी. वहीं दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेश दास का कहना है कि नया ट्रस्ट के लिए सरकार जो चाहेगी वैसा ही होगा.

अपने अपने दावे और सरकार की चुनौतियां

तपस्वी छावनी के परमहंस दास का कहना है कि सरकार जैसा चाहे ट्रस्ट बने, जबकि हुमामन गढ़ी के महंत राजू दास ट्रस्ट में किसी बाहरी के शामिल होने का विरोध कर रहे हैं. भले ही अयोध्या के मंहत और पुजारी अपना नाम खुलकर नहीं ले रहे हैं लेकिन सबके अपने-अपने दावे हैं और सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती आम सहमति बनाने की है.

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First published: November 15, 2019, 1:35 PM IST
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