बाबरी नाम की कोई चीज नहीं अयोध्या में, अगर होती तो यहां न बनता राम मंदिर: विनय कटियार
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बाबरी नाम की कोई चीज नहीं अयोध्या में, अगर होती तो यहां न बनता राम मंदिर: विनय कटियार
बीजेपी नेता विनय कटियार (File Photo)

बीजेपी नेता विनय कटियार (Vinay Katiyar) ने कहा कि कोर्ट ने हमारे पक्ष में फैसला दिया है. जमीन के समतलीकरण के दरमियान सबूत निकल रहे हैं. ये सबूत रो-रोकर कह रहे हैं वे राम मंदिर के अवशेष हैं. उन्होंने कहा कि कोर्ट का फैसला शिरोधार्य है. अब बस केवल एक चीज बाकी है. मथुरा और काशी की तरफ देखें लेकिन कब देखा जायेगा? यह भगवान मालिक है.

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अयोध्या. भारतीय जनता पार्टी (BJP) के फायर ब्रांड नेता और पूर्व सांसद विनय कटियार (Vinay Katiyar) ने गुरुवार को सीबीआई कोर्ट (CBI Court) में पेशी के लिए जाते समय कहा कि अयोध्या (Ayodhya) में बाबरी नाम की कोई चीज नहीं है. अगर होती तो यहां पर राम मंदिर (Ram Mandir) नहीं बनता. उन्होंने कहा कि रामजन्मभूमि रामलला की है. साढ़े तीन लाख हिंदुओं ने इसके लिए बलिदान दिया है. इसे बाबरी नहीं कहा जा सकता. इसे राम जन्मभूमि बोलिए.

विनय कटियार ने कहा कि कोर्ट ने हमारे पक्ष में फैसला दिया है. जमीन के समतलीकरण के दरमियान सबूत निकल रहे हैं. ये सबूत रो-रोकर कह रहे हैं वे राम मंदिर के अवशेष हैं. उन्होंने कहा कि कोर्ट का फैसला शिरोधार्य है. अब बस केवल एक चीज बाकी है. मथुरा और काशी की तरफ देखें लेकिन कब देखा जायेगा? यह भगवान मालिक है.

कोर्ट में अब आरोपियों का पक्ष दर्ज हो रहा 



बता दें अयोध्या स्थित ढांचा ध्वंस करने के आपराधिक मामले में सीबीआई के गवाह पूरे हो गए हैं. अब इस मामले के आरोपियो की गवाही दर्ज करके उनका पक्ष जाना जाएगा. विशेष न्यायाधीश एसके यादव ने अभियोजन की गवाही पूरी होने के बाद आरोपियों की गवाही (313 दंड प्रक्रिया संहिता) दर्ज करने के लिए लालकृष्ण आडवाणी, मुरलीमनोहर जोशी, उमा भारती और कल्याण सिंह समेत सभी आरोपियों को तलब किया है. कोर्ट ने आरोपी की गवाही दर्ज करने के लिए 28 मई की तारीख तय की है.
इसके पहले मामले के गवाह जगतबहादुर ने मथुरा के जिला जज की कोर्ट से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये अपनी गवाही दर्ज कराई. गवाह से बचाव पक्ष के वकील केके मिश्र ने जिरह की. कोर्ट में गवाह से जिरह के बाद सीबीआई के वकील ललित सिंह और आरके यादव ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में बचाव पक्ष ने अभियोजन के तीन गवाह फरहत अब्वास, जगतबहादुर और मधुरिमा मिश्र को रिकॉल कराया था, जिसमे से जगतबहादुर और फरहत अब्बास से जिरह पूरी ही चुकी है और मधुरिमा मिश्रा अधिक उम्र और बीमारी के चलते गवाही नही दे सकती. बताया गया कि अब अभियोजन की गवाही पूरी हो चुकी है औऱ कोई गवाह शेष नही है.

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