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आखिर जाड़े के ही मौसम में क्यों गर्माता है रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद

MANISH KUMAR | News18 Uttar Pradesh
Updated: November 7, 2019, 1:42 PM IST
आखिर जाड़े के ही मौसम में क्यों गर्माता है रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद
अयोध्या विवाद से ठंदियों के मौसम का अजीब सा है नाता

Ayodhya Property Dispute: इसे संयोग ही कहेंगे कि जब-जब इस मसले से जुड़ा कोई बड़ा घटनाक्रम हुआ तब मौसम जाड़े का था.

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अयोध्या. राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद (Ram Janambhoomi-Babri Mosque Dispute) का सर्दियों से कुछ खास संबंध हैं? बात अजीब हो सकती है लेकिन, तारीखों और घटनाओं को जोड़कर देखें तो इसमें एकरूपता देखने को मिलती है. इसे संयोग ही कहेंगे कि जब-जब इस मसले से जुड़ा कोई बड़ा घटनाक्रम हुआ तब मौसम जाड़े का था. अब इस पर अंतिम फैसला भी जाड़े में ही आने वाला है.

पहला मुकदमा- नवम्बर 1885 

रामजन्मभूमि बाबरी मस्जिद विवाद सबसे पहली बार जब अदालत पहुंचा तो महीना नवम्बर का था. इसी सर्द महीने में महंथ रघुवर दास ने फैज़ाबाद की अदालत में याचिका दाखिल कर राम चबूतरे पर मंदिर बनाने की अनुमति मांगी. दिसम्बर 1885 में इसे अदालत ने खारिज कर दिया.

22-23 दिसम्बर 1949 को रखी गई मूर्ति

इस मसले में जो दूसरा अहम मोड़ आया वह भी सर्दी के ही महीने में. 22-23 दिसम्बर की ठिठुरती और कोहरे से घिरी रात में बाबरी मस्जिद के भीतर राम की मूर्ति रखी गयी. अयोध्या कोतवाली के दारोगा ने बकायदा इस बात की एफआईआर भी करवायी. हालांकि हिन्दू पक्ष मानता रहा है कि इस रात मूर्ति रखी नहीं गयी, बल्कि भगवान राम स्वयं से प्रकट हुए. विवादित स्थल पर पहली पूजा दिसम्बर के सर्द मौसम में इसी तारीख से शुरु हुई.

ताला खोलने का आदेश - 1 फरवरी 1986

मूर्ति के रखे जाने या फिर भगवान के स्वयं प्रकट होने की घटना के 36 सालों बाद एक और बड़ी घटना हुई. तब भी मौसम सर्द ही था. आज से 33 साल पहले फरवरी 1986 की की पहली तारीख को फैज़ाबाद की अदालत ने मस्जिद के ताले खोलने के आदेश दे दिये. ताला खोले जाले जाने के लिए एक याचिका दाखिल की गयी थी. तब तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने कोर्ट में ये हलफनामा दिया था कि ताला खोलने से कानून व्यवस्था की स्थिति खराब नहीं होने दी जायेगी.
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बाबरी एक्शन कमेटी का गठन 4 जनवरी 1986

4 जनवरी 1986 की कड़कड़ाती ठंड में संघर्ष का अलख जगाने का बीड़ा मुस्लिम समुदाय ने उठाया. जनवरी की कोहरे से भरी सर्दी में लखनऊ में ये तय हुआ कि मस्जिद को बचाने की लड़ाई संगठित रूप से लड़ी जायेगी. जिसके बाद जन्म हुआ बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी का. इस कमेटी का गठन बाबरी मस्जिद के ताले खोलने के अदालती आदेश के बाद किया गया. वैसे तो ताले खोलने का आदेश अदालती था, लेकिन इसे राजनीतिक माना गया. मुस्लिम बुद्धीजीवियों ने पहली बार ये तय किया कि बाबरी मस्जिद पर एकाधिकार के लिए अब रास्ता सिर्फ अदालती ही है.

कारसेवा की शुरुआत भी ठंड में

अयोध्या में पहली बार जब कारसेवा की गयी तब भी मौसम सर्दी का ही था. 11 नवम्बर 1986 को विश्व हिन्दू परिषद ने राजीव गांधी सरकार की सहमति के बाद अयोध्या में विवादित स्थल के पास कारसेवा की. गुनगुनाती ठंड में गड्ढ़ा खोदकर पत्थर लगाये गये.

30 अक्टूबर 1990 को चली पहली गोली

30 अक्टूबर 1990 को हल्की ठंड इस समय तक हो गयी थी. अयोध्या में कारसेवकों को नियंत्रित करने के नाम पर पहली बार गोली चली. इसमें पांच लोगों की मौत हुई और इसी के साथ मंदिर निर्माण का अभियान तेज किये जाने के लिए आंदोलन और तेज हो गये.

ठंड में ही ढहाया गया विवादित ढांचा

इस पूरे एपिसोड का सबसे अहम दिन था 6 दिसंबर 1992. दिसम्बर की ठंडी दोपहरी में बाबरी मस्जिद गिरा दी गयी. 1885 में इस मसले से जुड़े पहले अदालती मामले से लेकर मस्जिद गिराये जाने तक का घटनाक्रम तब हुआ जब मौसम जाड़े का था. इसे महज संयोग की कहा जा सकता है.

फैसला भी अब नवंबर में

अब एक बार फिर इस पूरे घटनाक्रम में एक सबसे बड़ा मोड़ आने वाला है और तब भी मौसम जाड़े का ही है. अयोध्या की विवादित जमीन पर कब्जे को लेकर सुप्रीम कोर्ट जो फैसला सुनायेगी वह महीना भी जाड़े का है. हफ्तेभर में फैसले की उम्मीद की जा रही है.

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First published: November 7, 2019, 1:35 PM IST
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