राम जन्मभूमि पर केवल रामलला का अधिकार है, निर्मोही अखाड़ा का नहीं: VHP

अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई पर निर्मोही अखाड़ा की दलील पर रामलला विराजमान के पक्षकार त्रिलोकी नाथ पांडे और विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता शरद शर्मा ने निर्मोही अखाड़ा को आड़े हाथों लिया है.

KB Shukla | News18 Uttar Pradesh
Updated: August 8, 2019, 8:37 PM IST
राम जन्मभूमि पर केवल रामलला का अधिकार है, निर्मोही अखाड़ा का नहीं: VHP
राम मंदिर का प्रतीकात्मक चित्र
KB Shukla | News18 Uttar Pradesh
Updated: August 8, 2019, 8:37 PM IST
अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई पर निर्मोही अखाड़ा की दलील पर रामलला विराजमान के पक्षकार त्रिलोकी नाथ पांडे और विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता शरद शर्मा ने निर्मोही अखाड़ा को आड़े हाथों लिया है. वहीं विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता शरद शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में हफ्ते में 5 दिन की सुनवाई का स्वागत करते हुए कहा कि राम जन्मभूमि पर केवल रामलला का अधिकार है, निर्मोही अखाड़ा का नहीं.

इस दलील पर रामलला विराजमान के पक्षकार त्रिलोकी नाथ पांडे ने कहा कि निर्मोही अखाड़े का मुकदमा हाईकोर्ट में पहले ही खारिज हो चुका है. यही नहीं सुन्नी वक्फ बोर्ड का भी मुकदमा खारिज हो चुका है. केवल मुकदमे को पुनर्जीवित करने के लिए निर्मोही अखाड़ा ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की है. उन्होंने कहा कि राम जन्मभूमि पर केवल रामलला का ही अधिकार है.

केस को पुनर्जीवित करने के लिए निर्मोही अखाड़े ने दी यह दलील
निर्मोही अखाड़ा जमीन को लेकर मुकदमा लड़ रहा है और अपना मालिकाना हक सुप्रीम कोर्ट में साबित करने की कोशिश कर रहा है. दरअसल सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने निर्मोही अखाड़े से जमीन के साक्ष्य मांगे हैं जिस पर निर्मोही अखाड़ा ने दलील दी है कि 1982 की डकैती में जमीन के कागजात गायब हो गए.

मामला कब्जे का है: निर्मोही अखाड़ा
अयोध्या भूमि विवाद में मध्यस्थता की कोशिशें नाकाम होने के बाद मंगलवार से सुप्रीम कोर्ट में शुरू हुई नियमित सुनवाई बुधवार को भी जारी रही. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ के समक्ष सबसे पहले निर्मोही अखाड़े की तरफ से दलील पेश की गई. इसके बाद रामलला विराजमान की तरफ से दलील पेश की गई. इस दौरान मालिकाना हक़ से लेकर कब्जे तक पर बहस हुई. इतना ही नहीं बाल्मीकि रामायण और जीसस का भी जिक्र आया. सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट में निर्मोही अखाड़े की तरफ से वकील सुशील जैन अपना पक्ष रख रहे हैं. वकील सुशील जैन ने कहा यह मालिकाना हक़ की लड़ाई नहीं है. ये कब्जे की लड़ाई है. इस विवादित जमीन पर शुरू से अखाड़े का कब्ज़ा रहा है. लिहाजा मामला कब्जे का है.

निर्मोही अखाड़े ने शुरू की बहस
Loading...

जस्टिस बोबड़े ने निर्मोही अखाड़े के वकील से पूछा- क्या निर्मोही अखाड़े को सेक्शन 145 सीआरपीसी के तहत राम जन्मभूमि पर दिसंबर 1949 के सरकार के अधिग्रहण के आदेश को चुनौती देने का अधिकार है? क्योंकि उन्होंने इस आदेश को लिमिटेशन अवधि समाप्त होने के बाद चुनौती दी. अखाड़ा ने लिमिटेशन अवधि (6 साल) समाप्त होने पर 1959 में आदेश को चुनौती दी. निर्मोही अखाड़े के वकील जैन ने कोर्ट के एक पुराने फैसले का उदाहरण दिया और कहा कि उनका केस लिमिटेशन एक्ट 1908 के तहत आर्टिकल 47 के दायरे में आता है. अगर अंतिम आदेश सेक्शन 145 के तहत आता है तो लिमिटेशन अवधि जारी रहेगी.

जो दस्तावेज सुप्रीम कोर्ट में उपलब्ध ही नहीं हैं, उसका उदाहरण न दें
चीफ जस्टिस ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि आप जिस फैसले का उदाहरण अपनी दलीलें में दे रहे हैं, वो SCR (सुप्रीम कोर्ट वीकली रिपोर्ट किताब) से लिया गया है या फिर SCC (सुप्रीम कोर्ट केसेस) के आधार पर दे रहे हैं. जो दस्तावेज सुप्रीम कोर्ट में उपलब्ध ही नहीं हैं, उसका उदाहरण न दें. वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने कहा कि जैन जिस फैसले का उदाहरण अपनी दलीलों में दे रहे हैं, उसकी प्रति हमें नहीं दी गई है. CJI ने जैन को कहा कि वो इसकी प्रति मुस्लिम पक्षकारों को भी दे दें.
First published: August 8, 2019, 8:19 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...