आजमगढ़ः होम्योपैथी कॉलेज में संविदा पर हुई नियुक्तियों में फर्जीवाड़े का खुलासा

फर्जीवाड़े का खुलासा करने वाले आरटीआई कार्यकर्ता पतरूराम विश्वकर्मा के मुताबिक गत 20 जुलाई 2018 को राजकीय होम्योपैथिक कॉलेजों में संविदा पर हुई कई नियुक्तियों में कई तरह से फर्जीवाड़ा किया गया है, जिसके लिए सीधे निदेशक जिम्मेदार है

News18 Uttar Pradesh
Updated: September 8, 2018, 10:29 PM IST
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Updated: September 8, 2018, 10:29 PM IST
यूपी के राजकीय होम्योपैथिक कॉलेजों में संविदा पर तैनात प्रोफेसर और रीडरों की नियुक्तियों में फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है. फर्जीवाड़े का खुलासा करने वाले आरटीआई कार्यकर्ता पतरूराम विश्वकर्मा के मुताबिक गत 20 जुलाई 2018 को राजकीय होम्योपैथिक कॉलेजों में संविदा पर हुई कई नियुक्तियों में कई तरह से फर्जीवाड़ा किया गया है, जिसके लिए सीधे निदेशक जिम्मेदार है.

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निदेशक बीके विमल फर्जीवाड़े के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए आरटीआई कार्यकर्ता पतरूराम का कहना है कि निदेशक ने स्वंय अपनी पत्नी का नियुक्ति नियम विरूद्ध किया है, जिममें उनकी पत्नी का स्थाई पता गलत दर्शाया गया है.  आरटीआई कार्यकर्ता ने बताया कि सत्य प्रकाश राय नामक एक व्यक्ति की नियुक्ति एक साथ दो राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज में कर दिया गया जबकि वह मुरादाबाद में फिजियोलॉजी के पद पर तैनात है, लेकिन अब उसकी तैनाती गाजीपुर में बतौर प्रवक्ता प्रैक्टिस ऑफ मेडिसीन में कर दी गई है.

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बकौल पतरू राम, यही नहीं, सत्य प्रकाश राय को गाजीपुर जिले से रिलीव कर गोरखपुर होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज में बतौर प्रवक्ता सर्जरी के पद तैनात कर दिया गया है, जो सरासर गलत है, क्योंकि एक ही व्यक्ति एक ही समय में दो जगहों पर कैसे कोई नौकरी कर सकता है.

रिपोर्ट के मुताबिक आरटीआई के जरिए फर्जीवाड़े की जानकारी जुटाने के दौरान आरटीआई कार्यकर्ता पतरूराम को धमकी मिली और उसे कई फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई. दिलचस्प बात यह है कि निदेशक बीके विमल ने अलीगढ़ और गोरखपुर होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज की मान्यता रद्द होने के बाद भी वहां पर नियुक्तियां कर दी हैं. वहीं, फर्जी नियुक्तियों को लेकर एक ऑडियो भी पतरूराम के पास मौजूद है, जिसमें नियुक्तियों को लेकर आरोपी निदेशक और डा. आरके मिश्रा के बीच हुई बातचीत दर्ज है.

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उल्लेखनीय है नियुक्तियों में फर्जीवाड़े की वजह से प्रतिमाह सरकार पर 70 से 80 लाख रुपए का अतिरिक्त भार पड़ रहा है, जिसके लिए सीधे निदेशक बीके विमल दोषी को ठहराया गया है. बताया जाता है आरटीआई कार्यकर्ता पतरू राम विश्वकर्मा ने इस फर्जीवाड़े की शिकायत सीएम, मुख्य सचिव और राज्यपाल से लेकर कई अधिकारियों से भी की है.

(रिपोर्ट-अभिषेक, आजमगढ़)
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