अटल को नहीं भूल सकता आजमगढ़ का यह परिवार, उन्हीं के आशीर्वाद से बेटी बनी मंत्री

हम बात कर रहे हैं, कुसुम राय की. उनके पिता महात्तम राय अटल जी के साथ साइकिल यात्रा तक कर चुके हैं.

News18 Uttar Pradesh
Updated: August 17, 2018, 1:09 PM IST
अटल को नहीं भूल सकता आजमगढ़ का यह परिवार, उन्हीं के आशीर्वाद से बेटी बनी मंत्री
अटल बिहारी वाजपेयी के साथ बीजेपी नेता कुसुम राय (फाइल फोटो)
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Updated: August 17, 2018, 1:09 PM IST
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी अब इस दुनिया मे नहीं हैं, लेकिन उनकी यादों को आज़मगढ़ का एक परिवार अपने जेहन में संजोए हुए है. यह परिवार अटल जी को नहीं भूल पाएगा. इस परिवार का एक सदस्य आज बीजेपी में ऊंचे मुकाम पर है. इसका श्रेय अगर किसी को जाता है तो वह अटल बिहारी वाजपेयी और उनके पिता के संबंधों को.

हम बात कर रहे हैं, कुसुम राय की. उनके पिता महात्तम राय अटल जी के साथ साइकिल यात्रा तक कर चुके हैं. एक बार बीमारी के दौरान दिल्ली के एम्स में 7 घंटे अटल जी बाहर तब तक प्रतीक्षा करते रहे जब तक डॉक्टर ने ये नहीं कह दिया कि अब वह पूरी तरह ठीक हैं. ऐसे रिश्ते थे आजमगढ़ के महात्तम राय से अटल बिहारी वाजपेयी के. 1980 में अटल जी उनके विद्यालय पर भी आए थे.

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आजमगढ़ के बिलरियागंज ब्लॉक के पठवध गांव के रहने वाले महात्तम राय ने अपना जीवन संघ, जनसंघ और बीजेपी के लिए न्योछावर कर दिया. इसी सेवा के दौरान उनकी दोस्ती अटल बिहारी वाजपेयी से हुई. वैसे तो महात्तम राय अब इस दुनिया में नहीं हैं. कई वर्ष पहले उनका निधन हो चुका है. लेकिन उनकी बेटी कुसुम राय और बेटा श्रवण राय अटल जी की मदद को नहीं भूलते. बेटा रेलवे में नौकरी कर रहा है. बेटी कुसुम राय बीजेपी में किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं.

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कुसुम राय के बीजेपी में इतनी शीर्ष तक पहुंचने के पीछे अटल बिहारी वाजपेयी का आशीर्वाद रहा है. अटलजी के ही कहने पर कुसुम राय विधान परिषद पहुंची और कल्याण सिंह सरकार में लोकनिर्माण विभाग की कद्दावर मंत्री रहीं. उसके बाद राज्यसभा की सदस्य बनी. अब बीजेपी की महिला मोर्चा की राष्ट्रीय पदाधिकारी हैं. आज उनके निधन पर उनके परिवार के श्रवण राय, स्व. महात्तम राय के पौत्र विज्ञान राय और गांव के चंदन रावत सहित कई लोग काफी दुखी हैं. उन्होंने इसे सबसे पहले राष्ट्र की, फिर बीजेपी की और अपने परिवार की अपूरणीय क्षति बताया. कहा ऐसा नेता अब न तो "भूतो और न भविष्यतो".

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वैसे तो बतौर बीजेपी के वरिष्ठ नेता उन्होंने आजमगढ़ की यात्रा तीन बार की. पहली बार वर्ष 1 984 में, फिर 1989 और अंतिम यात्रा 1996 में. अंतिम बार 1996 मे एक रैली को शहर के जजी मैदान में संबोधित करना था, जिसमें वे थोड़ा बिलंब से पहुंचे थे. उस जनसभा में अपार जनसमूह उन्हें सुनने के लिए उमड़ पड़ा था. यह उस समय बीजेपी की जनसभा में उमड़ी रिकॉर्ड भीड़ थी.

(रिपोर्ट: अभिषेक उपाध्याय)
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