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आजमगढ़ पुलिस ने किया UP के बड़े हैकर गैंग का भंडाफोड़, चेक क्लोन कर उड़ाए AIIMS के खातों से करोड़ों रुपये
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News18 Uttar Pradesh
Updated: December 24, 2019, 6:31 PM IST
आजमगढ़ पुलिस ने किया UP के बड़े हैकर गैंग का भंडाफोड़, चेक क्लोन कर उड़ाए AIIMS के खातों से करोड़ों रुपये
आजमगढ़ पुलिस ने एक बड़े हैकर गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिसके लिंक दिल्ली एम्स के एकाउंट से करोड़ रुपयों की चोरी से मिले हैं.

आजमगढ़ (Azamgarh) के एसपी प्रोफेसर त्रिवेणी सिंह का कहना है कि इस गिरोह में कई बैंक कर्मचारी, हैकर के साथ इंटरनेशनल हैकर के भी नाम सामने आए हैं. पूछताछ में पता चला है कि इस गिरोह के सदस्यों ने एम्स, दिल्ली के बैंक खाते व जिला भूमि पदाधिकारी के बैंक खातों का भी चेक क्लोन कर पैसा निकाला है.

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आजमगढ़. दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के दो बैंक खातों से चेक क्लोनिंग (Cheque Cloning) के जरिए 12 करोड़ रुपये चोरी करने के मामले का लिंक आजमगढ़ (Azamgarh) से जुड़ता दिख रहा है. आजमगढ़ पुलिस ने चेक और क्रेडिट, डेबिट कार्ड की क्लोनिंग कर करोड़ों की हेराफेरी करने वाले बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है. पुलिस ने गिरोह के 5 सदस्यों को गिरफ्तार किया है. दावा है कि इस गिरोह में कई बैंक कर्मचारी, हैकर के साथ इंटरनेशनल हैकर के भी नाम सामने आए हैं. पूछताछ में पता चला है कि इस गिरोह के सदस्यों ने एम्स, दिल्ली के बैंक खाते व जिला भूमि पदाधिकारी के बैंक खातों का भी चेक क्लोन कर पैसा निकाला है. बता दें एम्स के जिन दो खातों से एम्स को 12 करोड़ रुपये की चपत लगाई गई, उनमें से एक खाता निदेशक और दूसरा डीन के नाम पर है. निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया के नाम वाले मुख्य खाते से 7 करोड़ और डीन के खाते से 5 करोड़ रुपये निकाल लिए गए.

दरअसल आजमगढ़ में बलिराम यादव ने महाराजगंज थाना में एफआईआर दर्ज कराई कि उसके खाते से 11 से 13 नवंबर तक कुल 85 हजार रुपये निकाल लिए गए. मामले में एसपी आजमगढ़ प्रोफेसर त्रिवेणी सिंह ने एसपी ग्रामीण एनपी सिंह, सीओ सगड़ी और स्वाट टीम के साथ साइबर सेल व महाराजगंज थाना प्रभारी को जांच में लगा दिया. मामले में 13 दिसंबर को चार अभियुक्त रामजीत यादव, रामप्रवेश यादव, सुभाष यादव और राम प्रताप यादव को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था.

एसपी त्रिवेणी सिंह ने बताया कि इनसे पूछताछ में अभियुक्त लक्ष्मण यादव, पंचम यादव और शैलेंद्र मौर्य का नाम भी सामने आया. 23 दिसंबर को मामले में पांच अभियुक्त लक्ष्मण यादव निवासी मऊ, कुलदीप सिंह उर्फ अंश निवासी देवरिया और गोरखपुर के योगेंद्र कुमार, शशिरंजन मौर्य और संजय निवासी को गिरफ्तार किया गया.

उन्होंने बताया कि पता चला कि शशि रंजन मौर्य गोरखपुर के भारतीय स्टेट बैंक, मझगावा में कैशियर है और ये बैंक से संबंधित खातों की जानकारी अपने साथियों को देता था. वहीं अभियुक्त लक्ष्मण यादव ने पूछताछ में बताया कि हमारा बहुत लंबा गैंग है. गिरफ्तार लोगों के अलावा कई ग्राहक सेवा केंद्र, पेट्रोल पंप कर्मी और बैंकों के कर्मी व इंटरनेशनल हैकर भी गिरोह में शामिल हैं.



Azamgarh cloning arrest
आजमगढ़ में हैकर गिरोह के पकड़े गए सदस्य


क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड की ऐसे करते हैं क्लोनिंग
पता चला कि एमेजन, इंडियामार्ट, अलीबाबा जैसी वेबसाइट्स से एमएसआर डिवाइस ऑर्डर करते हैं और पेट्रोल पंपों, ग्राहक सेवा केंद्रों और शॉपिंग मॉल में काम करने वाले लोगों के माध्यम से ग्राहकों के क्रेडिट या डेबिट कार्ड के मैग्नेटिक स्ट्रिप का डेटा स्कैन कर लेते हैं. इसके बाद एमआरएस सॉफ्टवेयर और डिवाइस के माध्यम से ब्लैंक कार्ड पर मैग्नेटिक स्ट्रिप के डेटा को राइट कर उस कार्ड का क्लोन तैयार करते हैं.

उन्होंने बताया कि इसके बाद कार्ड का ट्रैक 1 व ट्रैक 2 डेटा प्राप्त कर उसकी डंपिंग और क्लोनिंग करते हैं. विभिन्न वेबसाइट्स के माध्यम से डीलिंग एजेंट का कम्युनिकेशन नंबर/चैनल प्राप्त करते हैं. उसके बाद उनसे मैसेजिंग एप आईसीक्यू, टेलीग्राम से संपर्क करते हैं. फिर क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन आदि के माध्यम से पेंमेंट कर इंटरनेशनल क्रेडिट या डेबिट कार्ड का मैग्नेटिक स्ट्रिप के डेटा को राइट कर उस कार्ड का क्लोन तैयार कर लेते हैं. फिर क्लोन कार्ड के माध्यम से एटीएम या पीओएस मशीन से पैसा भेजकर निकलवाते हैं.

इस दौरान अपनी पहचान छिपाने के लिए कम्प्यूटर या लैपटॉप में वीपीएन और मैक एड्रेस चेंजर का इस्तेमाल करते हैं. कार्ड का डेटा प्राप्त होने के बाद ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स पर जाकर फर्जी आईडी और एड्रेस से खरीददारी कर लेते हैं.

केन्या के इंटरनेशनल हैकर डेविड भी शामिल

अभियुक्त कुलदीप सिंह व लक्ष्मण यादव ने बताया कि ये बैंक से बैंक डिटेल प्राप्त कर केन्या के इंटरनेशनल हैकर डेविड को भेजते हैं. वह ग्राहक को ओटीपी दिए बिना ही पैसों का भुगतान ट्रांसफर कर देता है. ग्राहक को पता ही नहीं चलता है. इसके बदले ये लोग डेविट को क्रिप्टो करेंसी में भुगतान करते हैं.
यही नहीं बैंककर्मी से सेटिंग कर ये लोगा खाताधारका का सिग्नेचर, बैंक स्टेटमेंट और अन्य डिटेल निकालकर चेक की भी क्लोनिंग करते थे. इसमें मुशीर नकवी उर्फ अब्बास, देशबंधु पांडेय और अश्वनी आईसीआईसीआई बैंक के कर्मी सहायता करते थे. इनके पास से कई सॉफ्टवेयर और 24 बैंकों की एकाउंट डिटेल बरामद हुई है. पांचों अभियुक्तों को जेल भेजा जा रहा है.

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First published: December 24, 2019, 6:22 PM IST
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