बाहुबली नेता रमाकांत यादव के विधायक बेटे की दबंगई, पूर्व CM के भतीजे ने लगाया जमीन कब्जाने का आरोप
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बाहुबली नेता रमाकांत यादव के विधायक बेटे की दबंगई, पूर्व CM के भतीजे ने लगाया जमीन कब्जाने का आरोप
विधायक अरुण कांत यादव का विवादों से है नाता.

बाहुबली नेता व पूर्व सांसद रमाकांत यादव (Ramakant yadav)के पुत्र और वर्तमान भाजपा विधायक अरुण कांत यादव (Arun Kant yadav) पर जमीन कब्जाने से लेकर अधिकारियों से बदतमीजी के आरोप लगते रहे हैं. जबकि इस बार पीड़ित शख्स उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. रामनरेश यादव के भतीजे और अम्बारी ग्राम प्रधान डॉ. सुभाष यादव हैं.

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आजमगढ़. अक्सर विवादों में रहने वाले बाहुबली नेता व पूर्व सपा सांसद रमाकांत यादव (Ramakant yadav) के पुत्र और वर्तमान भाजपा विधायक अरुण कांत यादव (Arun Kant yadav)पर लोगों की जमीन कब्जाने से लेकर अधिकारियों से बदतमीजी के कई मामले सामने आते रहते हैं. इनसे त्रस्त लोग स्थानीय प्रशासन से लेकर शासन और सीएम योगी आदित्‍यनाथ (CM Yogi Adityanath) तक गुहार लगा रहे हैं, लेकिन फिलहाल उनकी हरकतों पर अंकुश लगता नहीं दिख रहा. यहां तक कि उनकी दबंगई और धमकियों से डरे विद्युत विभाग के कर्मचारी उनके क्षेत्र में काम करने नहीं जा रहे. बावजूद इसके इन वजहों से राजस्व को क्षति पहुंच रही है. लोगों की जमीन कब्जाने में भी ये विधायक काफी आगे है. इनके द्वारा प्रताड़ित लोगों की फेहरिस्त में कुछ नाम और जुड़ गए हैं और ये नाम हैं आजमगढ़ जनपद के मकसुदिया निवासी त्रिलोकी यादव, कुशहां निवासी रियाज अहमद, ओरिल निवासी जियालाल केवट और डॉ. सुभाष यादव.

यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. रामनरेश यादव के भतीजे हैं डॉ. सुभाष यादव
इस फेहरिस्त में डॉ. सुभाष यादव का नाम इसलिए महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि पीड़ित शख्स उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. रामनरेश यादव के भतीजे और अम्बारी ग्राम प्रधान डॉ. सुभाष यादव हैं. जिन्होंने पहले स्थानीय प्रशासन से मदद की गुहार लगाई लेकिन इस विधायक के आगे जिला प्रशासन भी उनकी मदद नहीं कर सका. हारकर उन्होंने उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ से मदद की गुहार लगाई है. विधायक पर आरोप है कि उनके आदमियों द्वारा डॉ. सुभाष की जमीन कब्जाई जा रही है. हालात ये हैं कि विधायक और उनके गुर्गे इन्हें इनकी जमीन पर ही कंस्ट्रक्शन का काम नहीं करने दे रहे हैं. जबकि तत्कालीन डीएम के निर्देश पर एसडीएम ने इनकी जमीन की पैमाइश भी करवाई जिससे कि विवाद की गुंजाइश खत्म हो जाए लेकिन बाउंसरों से घिरे रहने वाले विधायक अरुण कांत यादव के डर से डीएम के सहयोगात्मक रवैये के बावजूद पुलिस और प्रशासन डॉ. सुभाष की कोई मदद करने में सक्षम नहीं दिख रहे हैं.

यही नहीं, अभी कुछ दिन पूर्व बिजली विभाग के अधिशाषी अभियंता संतोष कुमार मिश्र को भी इन्होंने धमकी दी जिसके बाद उन्होंने विधायक की शिकायत उच्चाधिकारियों से की. उनका यह पत्र मीडिया में भी लीक हुआ और शासन तक भी उनकी बात पहुंची,लेकिन जिला प्रशासन व पुलिस ने इस मुद्दे पर कोई एक्शन अभी तक नहीं लिया. पीड़ित त्रिलोकी यादव, रियाज अहमद और जियालाल केवट बुधवार को सीएम योगी के कार्यालय और आजमगढ़ सांसद व समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के कार्यालय भी अपनी फ़रियाद लेकर पहुंचे. इनका कहना था कि हमारी जमीन और घर पर भाजपा विधायक अरुण कांत कब्ज़ा कर रहे हैं, अगर इसे रोका नहीं गया तो हम सीएम आवास के सामने आत्मदाह कर लेंगे, क्योंकि स्थानीय पुलिस व प्रशासन इनकी कोई मदद नहीं कर रहा और अगर सीएम योगी भी उनकी फरियाद नहीं सुनेंगे तो उनके पास जान देने के सिवा कोई रास्ता नहीं रहेगा.
अरुण कांत यादव, Arun Kant yadav



रमाकांत यादव का पूर्वांचल की राजनीति पर है खासा असर
गौरतलब है कि रमाकांत यादव का पूर्वांचल की राजनीति पर खासा असर रहा है. कांग्रेस, सपा, बसपा, भाजपा सभी दलों से चुनाव लड़कर वो जीत हासिल कर चुके हैं. जबकि रमाकांत यादव भी अपने राजनीतिक करियर में शुरूआत से ही विवादों से घिरे रहे हैं. उन पर सपा में रहते हुए हत्या, अवैध कब्ज़ा सहित कई गंभीर आरोप लगे तो भाजपा में रहने के दौरान उन पर उलेमा कौंसिल के कार्यकर्ता की हत्या का आरोप लगा. 2017 में भाजपा की सरकार बनने के बाद से उन पर लगातार अवैध खनन करवाने के आरोप लगते रहे हैं. अपने पिता के पदचिन्हों पर चल रहे अरुण कांत पर भी अवैध जमीन कब्जाने और अधिकारियों से बदसलूकी जैसे आरोप लगातार लग रहे हैं. लोगों को स्थानीय प्रशासन से जब इन पर अंकुश की कोई उम्मीद नहीं दिख रही तो अब सीएम योगी से मदद की गुहार लगा रहे हैं. एक तरफ योगी सरकार ने अपने शासनकाल में इस तरह के लोगों को भू-माफिया घोषित करने का फरमान जारी कर रखा है, लेकिन भाजपा विधायक पर लगातार लग रहे आरोपों के बावजूद इन पर कोई कार्रवाई या शिकायतों पर जांच होती नजर नहीं आ रही है.
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