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अखिलेश के लिए मायावती ने मांगा वोट, बीजेपी-कांग्रेस को बताया आरक्षण विरोधी

Amit Tiwari | News18 Uttar Pradesh
Updated: May 8, 2019, 4:09 PM IST
अखिलेश के लिए मायावती ने मांगा वोट, बीजेपी-कांग्रेस को बताया आरक्षण विरोधी
अखिलेश औअर मायावती की फाइल फोटो

आजमगढ़ से सपा प्रमुख अखिलेश यादव चुनाव लड़ रहे हैं. मायावती ने उनके लिए वोट मांगा और जनता से उन्‍हें रिकॉर्ड मतों से जिताने की अपील की.

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आजमगढ़ से चुनाव लड़ रहे सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के समर्थन में बुधवार को एक विशाल जनसभा को संबोधित करने रानी की सराय पहुंचींं बसपा सुप्रीमो मायावती ने गठबंधन के प्रत्याशी को रिकॉर्ड वोटों से जिताने की अपील की. इस दौरान मायावती ने कांग्रेस और बीजेपी पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि आज जो आरक्षण का लाभ दलितों और आदिवासियों को मिला है, उसका विरोध कांग्रेस और बीजेपी करती रही है.

मायावती ने अपने संबोधन की शुरुआत विशाल जनसभा में आए लोगों का धन्यवाद से किया. उन्होंने कहा कि इस भीड़ को देखकर लगता है कि गठबंधन की जीत तय है. उन्होंने कहा एक साजिश के तहत अखिलेश यादव के खिलाफ उन्हीं की जाति के दिनेश लाल यादव (निरहुआ) को बीजेपी ने प्रत्याशी बनाया है. मायावती ने कहा, 'बीजेपी फूट डालो और राज कारो की नीति के तहत काम कर रही है. यही वजह है कि अखिलेश के खिलाफ उनकी खुद की ही जाति के प्रत्याशी को मैदान में उतारा है. गठबंधन के लोग बीजेपी के उम्मीदवार को बुरी तरह से हराएंगे, ताकि यह व्यक्ति भविष्य में कोई भी चुनाव लड़ने की हिम्मत न जुटा पाए.'

गठबंधन की जीत का दावा

मायावती ने कहा, 'प्रदेश में अभी तक पांच चरणों के चुनाव हो चुके हैं. अभी तक हमें अच्छी रिपोर्ट मिल रही है. उम्मीद है आगे भी हमें अच्छा परिणाम मिलेगा. इस बार चुनाव में 'नमो-नमो' वालों की जरूर छुट्टी करने वाले हैं और जय भीम वालों को लाने वाले हैं.'

बुआ-बबुआ के रिश्ते पर बीजेपी को घेरा

मायावती ने अखिलेश यादव पर बुआ और भतीजे के रिश्ते को लेकर हो रहे हमले का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा, 'बीजेपी जाति, धर्म, राष्ट्रवाद और आतंकवाद के नाम पर बरगलाने की कोशिश कर रही है. इतना ही नहीं बीजेपी वाले हमारे बीच बने संस्कारी रिश्तों पर भी तरह-तरह के बातें कर रहे हैं. ये लोग हमारी संस्कृति और सभ्यता के आधार पर बने रिश्तों पर ही तंज कस रहे हैं. लेकिन, हमारा यहां रिश्ता भारतीय सभ्यता को ध्यान में रखकर सामाजिक महापरिवर्तन का रिश्ता है.'

बीजेपी-कांग्रेस आरक्षण विरोधी
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मायावती ने पूर्वांचल में जाति ही जीत का मन्त्र है इसको ध्यान में रखते हुए आरक्षण का मुद्दा भी खुलकर उठाया. उन्होंने कहा, 'आज आप लोगों को जिस आरक्षण का लाभ मिल रहा है वह परम पूज्य बाबा साहेब आंबेडकर की देन है. लेकिन, कांग्रेस और बीजेपी ने इसका अभी भी पूरा लाभ नहीं दिया है. इसीलिए हमें बसपा का गठन करना पड़ा.'

उन्होंने कहा, 'जब बाबा साहेब कानून मंत्री बने तो उस समय उन्होंने पंडित नेहरू से कहा था कि संविधान में मैंने जो अधिकार दलितों व आदिवासियों को दिए हैं उसका लाभ उन्हें नहीं मिल रहा है. यह जरूरी है कि एक कमेटी बनाकर रिपोर्ट के आधार पर इन्हें कानूनी लाभ दिया जाए. उस वक्त कांग्रेस पार्टी के लोग उनकी बात से सहमत नहीं हुए थे. इसके बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने कहा था कि जो कानूनी अधिकार मैंने अपने लोगों को दिए हैं. इनका लाभ पहुंचाने के लिए इन्हें जागरूक करूंगा. इसके बाद 1984 में बसपा और उसके बाद समाजवादी पार्टी का गठन किया गया. बसपा बनने के बाद हमारी पार्टी कानूनी अधिकार के लिए संघर्ष करती रही.'

बीजेपी ने मंडल कमीशन का कराया था विरोध

मायावती ने कहा, '1989 में जब वीपी सिंह के नेतृत्व में वीपी सिंह की सरकार बनी. इस गठबंधन की सरकार को बीजेपी ने भी अपना समर्थन दिया था. उस चुनाव में बसपा के तीन सांसद चुने गए थे. एक आजमगढ़ से, एक पंजाब और मैं खुद बिजनौर से लोकसभा पहुंची थी. हमने वीपी सिंह सरकार को दो शर्तों पर समर्थन दिया था. पहला था बाबा साहेब को भारत रत्न और आरक्षण से संबंधित मंडल कमीशन के प्रस्तावों को लागू करना. वीपी सिंह सरकार ने हमारी दोनों शर्तों को मान ली. बाबा साहेब को भारत रत्न मिला और दलितों और आदिवासियों को आरक्षण का लाभ मिला. लेकिन यह बात बाहर से समर्थन दे रही बीजेपी को अच्छी नहीं लगी. उसने अपने ही लोगों से मंडल कमीशन का विरोध कराया. जिसके बाद देश में काफी हिंसा हुई थी.'

मायावती ने आगे बोलते हुए कहा कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही आरक्षण की वोर्शी रही हैं. मेरा कहने का मतलब यह है कि आज जो भी आप लोगों को आरक्षण का लाभ मिल रहा है वह बाबा साहेब की देन हैं.

मायावती ने अपने भाषण को दौरान अन्य कई मुद्दों पर भी बीजेपी व कांग्रेस को घेरा. गठबंधन को नुकसान पहुंचाने के लिए कांग्रेस ने प्रत्याशी खड़े किए. इनके बहकावे में नहीं आना है. वोट सिर्फ गठबंधन को ही देना है. अगर केंद्र में गठबंधन की सरकार बनी तो किसी को 6 हजार रुपए नहीं बल्कि सभी को नौकरी दी जाएगी.

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First published: May 8, 2019, 3:23 PM IST
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