लोकसभा चुनाव 2019: 'निरहुआ रिक्शावाला' आजमगढ़ में 'साइकिल' वाले अखिलेश यादव के लिए कैसे बन गया चुनौती

अखिलेश यादव और निरहुआ
अखिलेश यादव और निरहुआ

वैसे तो आजमगढ़ से सपा के संस्थापक मुलायम सिंह यादव सांसद है. लेकिन अब उनकी जगह पर अखिलेश यादव ने नामांकन किया है और बीजेपी ने उनके सामने निरहुआ को उतारकर अखिलेश यादव की पेशानी पर बल दे दिया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 25, 2019, 9:58 AM IST
  • Share this:
राहुल सांकृत्यायन, शिबली नोमानी और कैफी आजमी जैसे साहित्यकार और शायरों की नगरी आजमगढ़ लोकसभा सीट की गिनती देश की हाई-प्रोफाइल सीट में होती है. पूर्वांचल की धरती पर आजमगढ़ इस समय सुर्खियों में है, जिसकी वजह है समाजवादी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और भोजपुरी फिल्म स्टार दिनेश लाल यादव उर्फ 'निरहुआ' आमने-सामने है. निरहुआ लगातार आजमगढ़ में प्रचार कर रहे हैं, उनकी सभाओं में मुस्लिम महिलाएं और मुस्लिम पुरुष मतदाता भी पहुंच रहे हैं. तो वहीं सपा मुखिया अखिलेश यादव आजमगढ़ से गठबंधन की बड़ी जीत का दावा कर रहे हैं.

न्यूज18 से बातचीत में बीजेपी प्रत्याशी दिनेश लाल 'निरहुआ' कहते हैं कि चुनाव देश का चुनाव है. आतंकवाद को मिटाने का चुनाव है. राष्ट्रवाद का चुनाव है. निरहुआ ने कहा कि हम तो कहेंगे अखिलेश यादव के पास अभी भी वक्त है कि वह अपना नामांकन वापस ले लें, क्योंकि आजमगढ़ की जनता यह तय कर चुकी है कि जीत किसकी होगी? निरहुआ ने कहा गांव से मंचों तक में हर लोग मोदी की बात करते हैं. उन्होंने अखिलेश यादव और बसपा पर निशाना साधते हुए कहा कि वह मिलावट का गठबंधन नहीं बल्कि ठगबंधन है और 23 मई को जनता पर नाम बता देगी.

वैसे तो आजमगढ़ से सपा के संस्थापक मुलायम सिंह यादव सांसद है. लेकिन अब उनकी जगह पर अखिलेश यादव ने नामांकन किया है और अब बीजेपी ने उनके सामने निरहुआ को उतारकर अखिलेश यादव की पेशानी पर बल दे दिया है. हालांकि आजमगढ़ में रैली अखिलेश यादव और बीएसपी नेता सतीश चंद्र मिश्रा ने जीत का दावा किया, तो वहीं निरहुआ गांव- गांव में घूमकर अपनी जीत सुनिश्चित करने में जुटे हुए हैं. ऐसे में आजमगढ़ की सियासी संग्राम में किसके सिर पर ताज बनेगा या फैसला 23 मई को होगा. लेकिन यह जरूर है कि आसानी से जीतने वाली सीट पर अखिलेश यादव के सामने निरहुआ अब बड़ी चुनौती बन कर खड़ा हो गया.



दिनेश लाल निरहुआ पब्लिक के बीच प्रचार कर रहे हैं और मंच पर भाषण भी दे रहे हैं. लोगों के साथ सेल्फी भी खिंचवा रहे हैं. अखिलेश और मायावती की एक साथ आने के बाद पूर्वांचल में गठबंधन का वोट तो बढ़ गया है लेकिन क्या सीटें बढ़ा पाएंगे एक बड़ा सवाल है. अब देखना होगा क्या पूर्वांचल में अखिलेश यादव का चुनाव लड़ना असर करता है या फिर दिनेश लाल निरहुआ और रवि किशन जैसे प्रत्याशी बीजेपी के लिए मास्टर स्ट्रोक साबित होते हैं.
(रिपोर्ट: अजित सिंह)

एक क्लिक और खबरें खुद चलकर आएंगी आपके पास, सब्सक्राइब करें न्यूज़18 हिंदी  WhatsApp अपडेट्स
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज