ANALYSIS: आजमगढ़- यादव परिवार के किले के बाहर अखिलेश को कितना खतरा? बीजेपी ने बनाया ये प्लान

आजमगढ़ सीट पर बीजेपी इस चुनाव में भोजपुरी सिनेस्टार दिनेश लाल निरहुआ के बहाने यादव वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए पूरी ताकत लगा रही है.

Anil Rai | News18 Uttar Pradesh
Updated: April 18, 2019, 3:28 PM IST
ANALYSIS: आजमगढ़- यादव परिवार के किले के बाहर अखिलेश को कितना खतरा? बीजेपी ने बनाया ये प्लान
जनसभा के दौरान अखिलेश यादव (File Photo)
Anil Rai
Anil Rai | News18 Uttar Pradesh
Updated: April 18, 2019, 3:28 PM IST
यूं तो समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव का किला उनके घर सैफई के आस-पास ही है लेकिन जैसै-जैसे परिवार बढ़ रहा है यादव परिवार को अपनी सीमाओं का विस्तार भी करना पड़ रहा है. 2014 में इस परिवार में एक और राजकुमार की एंट्री होनी थी और इसके लिए किला बनाने का जिम्मा परिवार के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने उठाया. 2014 के लोकसभा चुनाव में मुलायम अपने पुराने किले मैनपुरी के साथ-साथ आजमगढ़ से भी चुनाव लड़े. दोनों सीट जीतने पर मुलायम ने मैनपुरी सीट से परिवार की तीसरी पीढ़ी की एंट्री कराई. तेज प्रताप यादव मैनपुरी से चुनाव लड़कर पहली बार लोकसभा पहुंचे और यादव परिवार का नया किला आजमगढ़ बना.

इस बार इस किले को बचाने का जिम्मा प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव का है. हालांकि मुलायम सिंह यादव के लिए भी आजमगढ़ की लड़ाई इतनी आसान नहीं थी. उत्तर प्रदेश में सरकार होने और पार्टी के दूसरे सबसे दिग्गज नेता शिवपाल यादव के लगातार कैंप करने के बाद भी मुलायम यहां सिर्फ 70 हजार के करीब वोटों से ही जीत पाए थे.

1996 से 2004 तक यह सीट कभी सपा के पास तो कभी बसपा के पास रही. 2009 में बीजेपी से रमाकांत यादव जीते थे. बीजेपी इस किले पर किसी भी तरह से सेंध लगाना चाहती है लेकिन 1991 को छोड़ दें तो बीजेपी इस सीट पर कभी भी चुनाव नहीं जीत पाई है. करीब 18 लाख मतदाताओं वाली इस सीट पर 19 फीसदी यादव, 16 दलित और 14 फीसदी मुस्लिम हैं. यही वो आंकड़ा है जो इस सीट को यादव परिवार के लिए सुरक्षित बनाता है लेकिन जब विपक्ष में यादव उम्मीदवार हो तो सबसे ज्यादा 19 फीसदी यादव मतों में सेंध लगाना मुश्किल नहीं होता और 2014 के चुनाव में इसी सेंध ने जीत का अंतर इतना कम कर दिया था.

बीजेपी इस चुनाव में भोजपुरी सिनेस्टार दिनेश लाल निरहुआ के बहाने यादव वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए पूरी ताकत लगा रही है. यही कारण है कि भले ही इस सीट पर चुनाव छठवें चरण में हैं लेकिन अभी यहा चुनावी रैलियां शुरू हो गई हैं. बीजेपी की नजर इस चुनाव में यादव वोटों में सेंध लगाने के साथ-साथ सवर्ण और यादव छोड़ अन्य ओबीसी मतों पर है. इस सीट पर बीजेपी पीएम, सीएम समेत बड़े-बड़े प्रचारकों को उतारने की तैयारी में है. साफ है बीजेपी यादव परिवार के इस नए बने किले में किसी भी कीमत पर सेंध लगाने की तैयारी में है.

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