पूर्वांचल में विपक्षी नहीं नौकरशाहों ने फेर दिया CM योगी के मंसूबों पर पानी
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पूर्वांचल में विपक्षी नहीं नौकरशाहों ने फेर दिया CM योगी के मंसूबों पर पानी
सीएम योगी का आजमगढ़ से गहरा नाता रहा है लेकिन यहां तीन साल में सिर्फ एक विश्वविद्यालय खुला है. (File Photo)

आजमगढ़ मंडल का बलिया जिला नीचे से पहले पायदान पर है तो आजमगढ 53 वें और मऊ 65 वें पायदान पर खड़ा है. बावजूद इसके सरकार से लेकर अधिकारी तक विकास के बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं.

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आजमगढ़. यूपी की सत्ता में आने के बाद सीएम योगी (CM Yogi Aditya Nath) ने मुलायम सिंह यादव की धड़कन कहे जाने वाले आजमगढ़ (Azamgarh) मंडल में समाजवादियों के वर्चस्व को तोड़ने के लिए इसे अपना कर्म क्षेत्र चुना था लेकिन बीजेपी (BJP) न तो सपा के गढ़ में सेंध लगा सकी और ना ही विकास कार्यों को आगे बढ़ा पाई है. जिले में योजनाएं तो तमाम हैं लेकिन नौकरशाहों ने सरकार के मंसूबों पर पानी फेर दिया है. आॅपरेशन कायाकल्प के जरिये विद्यालय से लेकर एएनएम सेंटर तक का निर्माण होना है, इसमें मंडल का बलिया जिला नीचे से पहले पायदान पर है तो आजमगढ 53 वें और मऊ 65 वें पायदान पर खड़ा है. बावजूद इसके सरकार से लेकर अधिकारी तक विकास के बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं जबकि ज़मीन की हकीकत कुछ और ही बयां कर रही हैं. जिलों की यह रैंकिंग खुद शासन ने ही जारी की है.

आजमगढ़ मंडल पूर्वांचल के सर्वाधित पिछड़े क्षेत्रों में से एक है. हालांकि इस क्षेत्र ने प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक दिया लेकिन आपेक्षित विकास आज तक नहीं हो पाया है. यह क्षेत्र सपा का गढ़ भी कहा जाता है. बलिया पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर का गृह जनपद था तो आजमगढ़ पूर्व मुख्यमंत्री राम नरेश यादव व पूर्व केंद्रिय मंत्री चंद्रजीत यादव का गढ़ कहा जाता था. यही नहीं कभी डॉ. राम मनोहर लोहिया, चौधरी चरण सिंह और राजनारायण जैसे नेतओं ने इसे अपना कार्य क्षेत्र भी बनाया था.

यहां दो दशकों से सपा-बसपा का है राज



पिछले दो दशक से आजमगढ़ मंडल में सपा-बसपा राज कर रही है. खुद पूर्व मुख्यमंत्री व सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव यहां से सांसद रहे तो वर्तमान सांसद सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव हैं. बावजूद इसके यह मंडल विकास की दौड़ में अन्य मंडल मुख्यालयों की अपेक्षा काफी पीछे है.
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आजमगढ़ मंडल की प्रशासनिक बैठक का एक दृश्य


आजमगढ़ मंडल को तीन साल में मिला सिर्फ एक यू​नवर्सिटी

वर्ष 2017 में जब बीजेपी ने यूपी में प्रचंड बहुमत की सरकार बनाई और पूर्वांचल के ही योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने तो लोगों में एक उम्मीद जागी कि अब आज़मगढ़ की तस्वीर बदल जाएगी. इसके पीछे कारण यह है कि योगी का आजमगढ़ से गहरा नाता रहा है. यही नहीं सीएम बनने के बाद उन्होंने मंच से कहा कि आजमगढ़ मंडल उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल है और यहां के लोगों को वह सब मिलेगा जो पिछले 70 सालों में नहीं मिला और वे जिसके हकदार हैं लेकिन तीन साल में बड़ी योजना के नाम पर सीएम ने आजमगढ़ में सिर्फ एक विश्वविद्यालय दिया जिसका निर्माण अभी शुरू नहीं हुआ है. अन्य योजनाएं जो सामान्य रूप से सभी जिलों में चल रही हैं उनका भी हाल यहां बदतर है.

आजमगढ़ में नहीं हो पाई है डिजिटल सिग्नेचर की व्यवस्था

हाल में शासन से जारी हुई एक रिपोर्ट के अनुसार आजमगढ़ मंडल अभी डिजिटल सिग्नेचर की सही व्यवस्था तक नहीं कर सका है. उप निदेशक पंचायत के अनुसार इस मामले में राज्य स्तर पर आजमगढ़ 48वें, मऊ 49वें और बलिया 54वें स्थान पर है. कायाकल्प योजना का हाल तो और भी बुरा है. इस योजना के तहत पंचायत भवन का अनुरक्षण, प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों, आगनबाड़ी केन्द्रों, एएनएम सेंटरों, शासकीय विद्यालयों में शौचालय का निर्माण का कार्य कराया जाना है. इसमें राज्य स्तर की रैंकिंग में आजमगढ़ 53वें, मऊ 65वें एवं बलिया 75वें स्थान पर है. इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकार और नौकरशाह योजनाओं को लेकर कितने गंभीर हैं.

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