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यहां विराजते हैं शिव के आदेश पर दक्ष का यज्ञ विध्वंस करनेवाले काल भैरव
Azamgarh News in Hindi

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Updated: April 11, 2018, 10:13 AM IST
यहां विराजते हैं शिव के आदेश पर दक्ष का यज्ञ विध्वंस करनेवाले काल भैरव
काल भैरव मंदिर

श्रद्धा और आस्था की दृष्टि से महराजगंज भैरव बाबा के अस्तित्व के कारण जाना जाता है. यह मंदिर पचास किलोमीटर की परिधि से श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए खींचा करता है.

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  • Last Updated: April 11, 2018, 10:13 AM IST
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उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जनपद में महराजगंज बाजार स्थित भैरव बाबा का विशाल एवं अति प्राचीन मंदिर है. मान्यता है कि भगवान शिव के आदेश पर दक्ष प्रजापति के यज्ञ का विध्वंस करने के बाद काल भैरव दक्षिणमुखी होकर यहां विराजते हैं. हरिशंकर राढ़ी प्रशासनिक स्तर पर महराजगंज ब्लॉक में स्थित है.

भैरव मंदिर की महत्ता और लोकप्रियता दूर-दूर तक फैली है. श्रद्धा और आस्था की दृष्टि से महराजगंज भैरव बाबा के अस्तित्व के कारण जाना जाता है. यह मंदिर पचास किलोमीटर की परिधि से श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए खींचा करता है. विशेष मेलों और मनौतियों की दृष्टि से यह आसपास के कई जिलों में रहनेवालों के लिए यह आकर्षण और श्रद्धा का केंद्र है. मनौतियां पूरी होने पर मुंडन और जनेऊ संस्कार के लिए गोरखपुर, मऊ, बलिया, गाजीपुर, बनारस, जौनपुर और फैजाबाद तक के श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं.

ज्येष्ठ मास के गंगा दशहरा पर लगने वाले सप्ताह भर के मेले में लाखों श्रद्धालुओं का यहां जुटान होता है. भैरव बाबा मंदिर की उत्पत्ति के विषय में किंवदंतियां और जनश्रुतियां पौराणिक काल तक ले जाती हैं. आमतौर पर माना जाता है कि दक्षिणमुखी काल भैरव भगवान शिव के उन गणों के प्रमुख हैं जिन्होंने राजा दक्ष का यज्ञ विध्वंश किया था.

एक कथा के अनुसार राजा दक्ष ने एक यज्ञ किया था जिसमें उन्होंने अपनी पुत्री पार्वती और दामाद शिव को आमंत्रित नहीं किया था. कारण यह था कि वे शिव के अवधूत स्वभाव से चिढ़े हुए थे. पार्वती बिना बुलाए ही पिता के यज्ञ में गई और पति का अपमान देखकर भस्म हो गईं. तब भगवान शिव ने भयंकर क्रोध किया और काल भैरव को आदेश दिया कि वे राजा दक्ष का यज्ञ विध्वंश कर दें. यज्ञ विध्वंश के बाद काल भैरव दक्षिणाभिमुखी होकर यहीं बैठ गए. तबसे यह स्थान भैरव बाबा के मंदिर के रूप में प्रसिद्ध है.

पौराणिक प्रमाणों के आधार पर राजा दक्ष का यज्ञ हरिद्वार में गंगातट पर कनखल में हुआ था. राजा दक्ष हिमालय या हिमाचल के राजा थे, इसलिए हरिद्वार में यज्ञ का तथ्य मजबूत दिखता है. परंतु संदेह इसमें भी नहीं है कि इस भैरव स्थान पर भी एक यज्ञ हुआ था. इसके भी प्रमाण हैं. यह स्थल भी छोटी सरयू नदी के किनारे है. कभी सरयू नदी यहां से गुजरती थी. लगभग चालीस वर्ष पहले यहां सैकड़ों कुएं थे जिनमें कई का व्यास चार-पांच फीट तक था.

स्थानीय बुजुर्गों के मुताबिक उनके बचपन में यहां दो सौ से कम कुएं नहीं थे. इसके पीछे यह वजह बताया जाता है कि राजा दक्ष के यज्ञ में 360 पंडितों ने भाग लिया था और हर पंडित के लिए एक अलग कुआं था. दूसरा प्रमाण यह दिया जाता है कि मंदिर परिसर में एक हवन कुंड है जिसमें विधिपूर्वक कितनी भी आहुति दी जाए, यह कभी भरता नहीं. कारण कि इस हवन कुंड में पार्वती कूद कर भस्म हुई थीं. आज भी इस हवन कुंड में श्रद्धालू हवन कराते रहते हैं. इसकी पूर्णता की सच्चाई पर दावे से कुछ नहीं कहा जा सकता.

महराजगंज स्थित भैरव बाबा मंदिर में ग्रामीण और सांस्कृतिक-धार्मिक पर्यटन की अपार संभावनाएं छुपी हुई हैं. यहां सैलानियों और श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए कोई सरकारी या निजी होटल, लॉज या धर्मशाला नहीं है. स्थानीय लोग इसे धार्मिक केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए सरकार तक लगातार अपनी मांग पहुंचाते रहे हैं.

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First published: April 11, 2018, 10:13 AM IST
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