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आजमगढ़: चुनाव प्रचार में निरहुआ ने झोंकी जान, अखिलेश को दे पाएंगे मात?

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आजमगढ़ सीट पर इस बार यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव चुनाव लड़ रहे हैं. बीजेपी ने उनके सामने भोजपुरी सुपरस्टार दिनेश लाल यादव निरहुआ को उतारा है.

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आजमगढ़ सीट पर इस बार यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव चुनाव लड़ रहे हैं. बीजेपी ने उनके सामने भोजपुरी सुपरस्टार दिनेश लाल यादव निरहुआ को उतारा है. दिनेश लाल यादव राजनीतिक रूप से ज्यादा ताकतवर तो नहीं हैं लेकिन बीजेपी उनकी पॉपुलैरिटी भुनाने की कोशिश की है. इस सीट से 2014 में सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह ने चुनाव लड़ा था. उनके सामने बीजेपी के रमाकांत यादव थे, जो इस सीट से 2009 में सांसद बने थे.

चुनाव के लिए नाम घोषित होने के बाद से दिनेश लाल यादव ने प्रचार में जान झोंकी दी थी. अपनी मशहूर फिल्म निरहुआ रिक्शावाला के तर्ज पर उन्होंने रिक्शे चलाकर भी प्रचार किया. निरहुआ के अखिलेश यादव से सवाल पूछते हुए कई वीडियो में सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं.

क्या है इस सीट का चुनावी इतिहास



1952 में हुए पहले लोकसभा चुनाव में इस सीट पर कांग्रेस के अलगू राय शास्त्री ने जीत हासिल की थी. उसके बाद प्रत्याशी बदलते गए लेकिन कांग्रेस का वर्चस्व कायम रहा. 1977 के चुनाव में पहली बार ऐसा हुआ, जब कांग्रेस को इस सीट पर हार का सामना करना पड़ा.
जनता पार्टी के टिकट पर राम नरेश यादव ने जीत हासिल की थी. राम नरेश यादव कद्दावर नेता थे जो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रहे. लेकिन 1978 में हुए उपचुनाव में मोहसिना किदवई ने कांग्रेस को यह सीट फिर वापस दिला दी. 1980 में जनता दल सेकुलर के चंद्रजीत यादव यहां से जीते. 1984 में कांग्रेस के संतोष सिंह ने फिर कांग्रेस के टिकट पर यह सीट जीत ली. 1989 में पहली बार यहां पर बहुजन समाज पार्टी चुनाव जीती. राम कृष्ण यादव ने बीएसपी के टिकट पर यहां से चुनाव जीता.

आजमगढ़ सीट पर पहली बार कांग्रेस का वर्चस्व तोड़ने वाले नेता राम नरेश यादव


1991 में जनता दल के टिकट पर चंद्रजीत यादव फिर जीते तो 1996 में पहली बार समाजवादी पार्टी का खाता यहां पर रमाकांत यादव ने खोला. फिर 1998 में बीएसपी के टिकट पर अकबर अहमद डंपी जीते तो 1999 और 2004 में दो बार रमाकांत यादव यहां से एसपी और फिर बीएसपी के टिकट पर जीते. 2008 में हुए उपचुनाव में अकबर अहमद बीएसपी के टिकट पर जीते तो 2009 में रमाकांत यादव ने यह सीट कब्जा ली. 2014 में मुलायम सिंह यादव ने यह सीट चुनी तो रमाकांत ने उन्हें बीजेपी के टिकट पर टक्कर देने की नाकाम कोशिश की.

जातीय गणित

आजमगढ़ में सवर्ण, व्यापारी समुदाय और कई ओबीसी जातियां बीजेपी की वोटर मानी जाती हैं. बीजेपी के प्रत्याशी रमाकांत यादव ने इसी बूते मुलायम सिंह यादव को इस सीट पर 2014 में कड़ी टक्कर दी थी. रमाकांत को करीब पौने तीन लाख वोट मिले थे.

हालांकि इस बार के चुनाव में अखिलेश यादव के मैदान में होने की वजह से लड़ाई बीजेपी के लिए और कठिन है. यादव और मुस्लिम सहित अन्य जातियों की गोलबंदी गठबंधन के पक्ष में हो सकती है. बीजेपी की तरफ परंपरागत सवर्ण वोटबैंक झुक सकता है.



15 प्रत्याशी हैं मैदान में

आजमगढ़ लोकसभा सीट पर पूर्व मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव के अलावा बीजेपी के प्रत्याशी भोजपुरी सुपरस्टार दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ सहित 15 प्रत्‍याशी मैदान में हैं.

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