UP : अपराध और राजनीति के गठजोड़ से बुलंद रहता है बदमाशों का हौसला, दाग देते हैं पुलिस पर भी गोली
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UP : अपराध और राजनीति के गठजोड़ से बुलंद रहता है बदमाशों का हौसला, दाग देते हैं पुलिस पर भी गोली
राजनीतिक संरक्षण देने वालों की भी पहचान कर रही है यूपी पुलिस.

आईपीएस अजय साहनी ने एसपी ग्रामीण रहे नरेंद्र प्रताप सिंह के साथ मिलकर न केवल बदमाशों की कमर तोड़ी, बल्कि कइयों को मौत की नींद सुलाकर पुलिस का हौसला बुलंद किया. वर्तमान एसपी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने इस हौसले को और आगे बढ़ा दिया है.

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आजमगढ़ : कानपुर (Kanpur) में सीओ, दरोगा सहित 8 पुलिसवालों की हुई हत्या और कइयों को मौत के करीब पहुंचाने के मामले ने इस बार लोगों को झकझोर कर रख दिया है. वैसे, इससे पहले भी आजमगढ़ (Azamgarh) जिले में कई बार पुलिस (Police) पर बदमाश (accused) भारी पड़ गए हैं. यहां तक कि सीओ सिटी, एसपी, एसपी ग्रामीण जैसे दिग्गज अधिकारियों पर अपराधी हमला बोल चुके हैं. जेल (Jail)nमें घुसकर बंदीरक्षक को गोली मारने जैसी वारदात हो चुकी है. बदमाश खुलेआम तांडव मचाते रहे हैं. पर राजनीतिक संरक्षण के चलते बदमाशों का कोई बाल भी बांका नहीं कर पाया. पुलिस इनके आगे असहाय बनी रही है. राजनीतिक संरक्षण का ही परिणाम रहा कि मई 2016 में निजामाबाद थाने के खुदादादपुर में सांप्रदायिक दंगा, सरायमीर थाना में घुसकर तोड़फोड़ और लूटपाट की वारदात हो चुकी है.

मनबढ़े अपराधियों की कुछ पुरानी वारदात

घटनाओं पर गौर करें तो निजामाबाद के खुदादादपुर में हुई सांप्रदायिक घटना भी सुनियोजित थी. पुलिस की रिपोर्ट के मुताबिक एक वर्ग के लोगों ने ललकारते हुए पुलिस पर हमला किया, जिसमें सीओ सिटी रहे केके सरोज गोली लगने से घायल हो गए. जबकि एसडीएम, डीएम, एसपी समेत अन्य आलाधिकारी घायल हो गए. इससे भी ज्यादा भयावह घटना सरायमीर थाने में हुई. जहां वर्ग विशेष के लोगों ने हमलाकर थाने में लूटपाट की और आग लगा दी. जेल में मोबाइल चलाने से रोकने पर बदमाश ने जेल परिसर में घुसकर बंदीरक्षक मानसिंह को गोली मार दी. एसपी ग्रामीण रह चुके नरेंद्र प्रताप सिंह के नेतृत्व में 50 हजार का इनामी लक्ष्मण यादव का एनकाउंटर हुआ. लक्ष्मण यादव ने आंबेडकर नगर के रहने वाले डीआईजी पद से रिटायर अधिकारी के भाई की हत्या गोली मारकर कर दी थी. सीओ सिटी रह चुके आईपीएस शैलेश पांडेय पर कुख्यात अपराधी सचिन पांडेय ने हमला किया था. सीओ पर चलाई गोली गनर सिपाही रजनीश सिंह के पेट में लगी थी और सीओ बच गए. साल 2017 में एनकाउंटर स्पेशलिस्ट अजय कुमार साहनी और एसपी ग्रामीण रहे नरेंद्र प्रताप सिंह के ऊपर दिल्ली पुलिस द्वारा घोषित एक लाख रुपये का इनामी बदमाश भीम उर्फ सागर ने मुठभेड़ के दौरान गोली मारी थी. संयोग रहा की गोली एसपी अजय साहनी के बुलेट प्रुफ जैकेट में फंस जाने से उनकी जान बच गयी. जबकि एसपी ग्रामीण नरेंद्र प्रताप सिंह के हाथ में लग जाने से वह घायल हो गए. यदि गोली जरा भी इधर उधर जाती तो स्थिति कुछ और हो जाती. बता दें कि जिले में कई ऐसे बदमाश हैं, जिन्हें किसी न किसी राजनीतिक पार्टी या हस्ती का सपोर्ट है. ऐसे छोटे-मोटे गली के गुंडे राजनीतिक पार्टी की शह पर माफिया का रूप ले लेते हैं. यह एक बड़ी वजह है कि कार्रवाई के दौरान पुलिस वालों पर अपराधी हमलावर हो जाते हैं.



पुलिस कर रही शह देने वालों की पहचान
आजमगढ़ में बढ़ते अपराध को देखते हुए साल 2017 में जिले की कमान आईपीएस अजय कुमार साहनी को सौंपी गई. अजय साहनी ने एसपी ग्रामीण रहे नरेंद्र प्रताप सिंह के साथ मिलकर न केवल बदमाशों की कमर तोड़ी, बल्कि कइयों को मौत की नींद सुलाकर पुलिस का हौसला बुलंद किया. तभी से पुलिस ने बदमाशों पर जो बढ़त बनाई, उसे वर्तमान समय के एसपी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने और आगे बढ़ा दिया है. अपराधियों को संरक्षण के मुद्दे पर एसपी प्रोफेसर त्रिवेणी सिंह का कहना है कि बदमाशों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है. पिछले एक माह में 42 से अधिक अपराधियों पर गैंगस्टर लगा कर जेल भेजा गया. राजनीतिक संरक्षण देने वालों की भी पहचान की जा रही है. अगर किसी की भूमिका पाई जाएगी तो उसपर भी कार्रवाई की जाएगी.
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