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UP Chunav: यूं ही राजनीती के मौसम वैज्ञानिक नहीं कहे जाते हैं पूर्व मंत्री दारा सिंह चौहान, जानें कब-कब बदली पार्टी

UP Chunav: यूं ही राजनीती के मौसम वैज्ञानिक नहीं कहे जाते हैं पूर्व मंत्री दारा सिंह चौहान, जानें कब-कब बदली पार्टी

UP Assembly Elections: अपने तीन दशक के करियर में दारा सिंह चौहान ने कई बार पार्टियां बदली हैं.

UP Assembly Elections: अपने तीन दशक के करियर में दारा सिंह चौहान ने कई बार पार्टियां बदली हैं.

UP Assembly Elections: दारा सिंह राजनीति के ऐसे मझे खिलाड़ी हैं जो हवा का रूख चुनाव से पहले ही भांप जाते हैं. दारा सिंह चौहान अपने तीन दशक के राजनीतिक कैरियर में हमेंशा सत्ता के साथ रहे हैं. यही वजह है कि अब उनके समर्थक और मतदाता उन्हें मौसम वैज्ञानिक कहने लगे हैं. दारा सिंह चौहान भले ही आजमगढ़ से जुड़े हैं, लेकिन उन्होंने राजनीती की कर्मभूमि मऊ के मधुबन क्षेत्र को बनाया.

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आजमगढ़. दल-बदल के माहिर दारा सिंह चौहान (Dara Singh Chauhan) राजनीतिक कैरियर में मंत्री की कुर्सी पर भले ही पहली बार बैठे हों, लेकिन वे हमेशा सत्ता के नजदीक रहे. सत्ता के साथ रहने के लिए उन्होंने कभी पार्टी बदलने में भी गुरेज नहीं किया. यही वजह है कि लोग उन्हें राजनीति का मौसम वैज्ञानिक भी कहते है. कहा जाता है कि दारा सिंह चौहान चुनाव (UP Assembly Elections) से पहले हवा का रुख भांप लेते हैं और एक बार फिर उन्होंने चुनावी बयार को समझते हुए अपना पाला बदल लिया है. माना जा रहा है कि दारा सिंह चौहान सपा में शामिल होंगे.

बता दें कि दारा सिंह चौहान मूलरूप से आजमगढ़ जिले के गेलवारा गांव के मूल निवासी हैं. इनकी गिनती बसपा के संस्थापक सदस्यों में होती है. कहा जाता है कि दारा सिंह राजनीति के ऐसे मझे खिलाड़ी हैं जो हवा का रूख चुनाव से पहले ही भांप जाते हैं. दारा सिंह चौहान अपने तीन दशक के राजनीतिक कैरियर में हमेंशा सत्ता के साथ रहे हैं. यही वजह है कि अब उनके समर्थक और मतदाता उन्हें मौसम वैज्ञानिक कहने लगे हैं. दारा सिंह चौहान भले ही आजमगढ़ से जुड़े हैं, लेकिन उन्होंने राजनीती की कर्मभूमि मऊ के मधुबन क्षेत्र को बनाया. बसपा ने वर्ष 1996 में पहली बार उन्हें राज्यसभा भेजा था. चार साल का कार्यकाल पूरा होते ही उन्होंने हवा का रूख भाप लिया और सपा में शामिल हो गए. फिर क्या था 2000 में सपा ने भी इन्हें राज्यसभा भेज दिया. वर्ष 2006 में दारा सिंह का राज्यसभा कार्यकाल पूरा हुआ. इसी बीच फिर इन्होंने चुनाव हवा को परखा और वर्ष 2007 के चुनाव से पहले बसपा में शामिल हो गए. यूपी में बसपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी और वर्ष 2009 में बसपा ने उन्हें फिर राज्यसभा भेज दिया। वर्ष 2012 में मायावती यूपी की सत्ता से बाहर हुई और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बने तो उस समय चर्चा थी कि दारा सिंह सपा में जा सकते है लेकिन दारा सिंह के मन में कुछ और था. वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में देश में बीजेपी की सरकार बनी तो इन्होंने बीजेपी से नदजीकी बढ़ाई। इसके बाद दारा सिंह चौहान सभी को चौकाते हुए 2 फरवरी 2015 को बीजेपी में शामिल हो गए.

दो साल से हाशिए पर थे दारा सिंह चौहान
दारा सिंह चौहान को बीजेपी ने पिछड़ी जाति प्रकोष्ठ का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया. इसके बाद वर्ष 2017 के चुनाव में मधुबन सीट से जीत हासिल कर दारा सिंह योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री बन गए. पिछले दो साल से दारा सिंह बीजेपी में हाशिए पर दिख रहे थे. यहां तक कि नवंबर 2021 में गृहमंत्री राज्य विश्वविद्यालय का लोकापर्ण करने के लिए आजमगढ़ आये तो कार्यक्रम में दारा सिंह का आमंत्रित नहीं किया गया. और तभी से अटकले तेज हो गयी थी कि उपेक्षा से नाराज दारा सिंह सपा में जा सकते है. उनकी सपा के लोगों से नजदीकियां भी बढ़ गयी थी. जिसके बाद दारा सिंह चौहान ने बुधवार को त्यागपत्र देकर सभी को चौका दिया. अब उनका सपा में जाना तय है. दारा सिंह का सपा में जाना बीजेपी के लिए बड़े झटके से कम नहीं होगा.

Tags: Dara Singh Chouhan, UP Assembly Elections, Uttar Pradesh Assembly Elections

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