बदायूं के जिला महिला अस्पताल में 32 बच्चों की मौत

बदायूं (Budaun) के जिला महिला अस्पताल में पिछले 50 दिनों में 32 बच्चों की मौत हो गई है. ये मामला सामने आने के बाद पूरे राज्‍य में हड़कंप मचा हुआ है.

News18 Uttar Pradesh
Updated: August 11, 2019, 6:05 PM IST
बदायूं के जिला महिला अस्पताल में 32 बच्चों की मौत
बदायूं के जिला महिला अस्पताल में पिछले 50 दिन में 32 बच्चों की मौत.
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Updated: August 11, 2019, 6:05 PM IST
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) से बड़ी संख्या में बच्चों की मौत का मामला सामने आया है. प्रदेश के बदायूं (Budaun) जिले में 32 बच्चों की मौत हो गई है. बदायूं के जिला महिला अस्पताल के सिक न्यूबॉर्न केयर यूनिट (SNCU) में पिछले 50 दिनों में 32 बच्चों की मौत हो चुकी है.

इस मामले के सामने आने के बाद बदायूं जिला समेत पूरे प्रदेश में हड़कंप मच गया है. बदायूं के चीफ मेडिकल अफसर मनजीत सिंह ने कहा, ‘जो बच्चे एसएनसीयू में भर्ती थे, वे गंभीर बीमारी से पीड़ित थे और उनके बचने के चांस बहुत कम थे.’

वहीं जिला महिला अस्पताल की अक्षीक्षक डॉ. रेखा रानी ने कहा, इस महीने यहां ज्यादा बच्चे भर्ती किए गए हैं और उनमें से अनेक बच्चों के कई अंग एक साथ फेल हो गए. करीब 20 बच्चों को इलाज के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया.



जून 2019 में गोरखपुर में हुई थी 19 मरीजों की मौत
इससे पहले बच्चों की मौत के कारण बीआरडी मेडिकल कॉलेज चर्चा में रह चुका है. गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में जून 2019 तक जापानीज इंसेफेलाइटिस (जेई) और एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एइएस) के कुल 87 मरीज भर्ती हुए जिसमें 19 मरीजों की मौत हो गई. हालांकि पिछले दो सालों की तुलना में इस साल मरीजों की संख्या और मौत का आंकड़ा काफी कम है. बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ गणेश कुमार ने बताया था कि 2017 में 2248 से ज्यादा जेई और एइएस के मरीज भर्ती हुए थे, जिनमे 512 मरीजों की मौत हो गई थी. 2018 में इस बीमारी से ग्रसित मरीजों की संख्या 1047 थी, जिसमें से 166 लोगों की जान नहीं बचा सके.

इस साल बढ़ाई गईं ये सुविधाएं
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डॉ. गणेश कुमार ने बताया कि इस साल हमने पहले से ज्यादा तैयारी की है जिससे मौत का आंकड़ा कम किया जा सके. बेड की संख्या को बढ़ा दिया गया था. वेंटीलेटर की भी सुविधा बढ़ा दी गई है. पीडियाट्रिक विभाग में मेडिकल स्टोर की व्यवस्था भी कर दी गई है. हमने नियमित लिक्विड ऑक्सीजन सप्लाई की भी व्यवस्था की है. इस साल जेई और एइएस के मरीजों की संख्या में भी कमी देखने को मिल रही है.

2017 में गोरखपुर में हुई थी 60 बच्चों की मौत
गौरतलब है कि अगस्त 2017 में बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन सप्लाई बाधित होने से 60 से ज्यादा बच्चों की मौत हो गई थी. मामले में सूबे की योगी सरकार की काफी किरकिरी हुई थी. इस हादसे के बाद से सरकार का दावा है कि उसने जेई व एइएस की रोकथाम के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं. पूर्वांचल के 11 प्रभावित जिलों में टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है. साथ ही ढाई लाख वालंटियर्स की टीम भी लोगों को जागरूक करने में लगी है. इस साल सभी अधिकारियों को अलर्ट मोड पर रहने को कहा गया है.

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First published: August 11, 2019, 4:28 PM IST
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