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'मुन्नाभाई' बन बैठे साढ़े चार हजार गुरुजी, अब होंगे बर्खास्त

पूरे उत्तर प्रदेश में फर्जी नियुक्ति का शिक्षा विभाग में बड़ा घोटाला सामने आया है. पूरे प्रदेश में 4 हजार 5 सौ 70 फर्जी शिक्षकों की फर्जी नियुक्तियां हुई है. ये खुलासा एसआईटी की जांच में हुआ है.

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पूरे उत्तर प्रदेश में फर्जी नियुक्ति का शिक्षा विभाग में बड़ा घोटाला सामने आया है. पूरे प्रदेश में 4 हजार 5 सौ 70 फर्जी शिक्षकों की फर्जी नियुक्तियां हुई है. ये खुलासा एसआईटी की जांच में हुआ है. ये शिक्षक अलग-अलग जनपदों में तैनात है. एसआईटी ने एक लिस्ट प्रदेश के सभी बीएसए को दी गई है.  जिसकी जांच प्रदेश के सभी बीएसए कर रहे हैं.

जनपद बदायूं में 88 फर्जी शिक्षक नौकरी कर रहे है. बीएसए प्रेमचंद्र की जांच में खुलासा हो गया है. नौकरी करने के लिए फर्जी बीएड की मार्कशीट सहित लोगों ने नौकरी पाने के लिए अपनी मार्कशीट में भी नंबर बढ़ाए हुए पाए गए हैं. इन सब लोगों ने डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा से बीएड की फर्जी डिग्री के आधार पर नौकरी पाई है.

बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रेमचंद यादव ने बताया कि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने विभाग को प्राप्त सत्यापन के आधार पर जांच के अलावा जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान जाकर भर्तियों के आवेदन के दौरान अभ्यर्थियों के अनुक्रमांक से सूची का मिलान किया. जिसमें 88 शिक्षक-शिक्षकाए फर्जी पाए गए. 11 नवंबर तक फर्जी शिक्षक-शिक्षिकाओं को बर्खास्त करने, उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने और जो अब तक वेतन लिया है उसकी रिकवरी की शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी.



वर्ष 2004-05 के सत्र की डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा की बीएड की फर्जी डिग्री के आधार पर नौकरी करने वाले शिक्षक-शिक्षिकाओं की बर्खास्तगी तय मानी जा रही है. शिक्षक-शिक्षिकाओं ने बीएड के बाद विशिष्ट बीटीसी किया था. उसके बाद नौकरी पाई थी. शिकायत होने पर एसआइटी ने जांच करके प्रमाण पत्रों से छेड़छाड़ करने और विश्वविद्यालय में डाटा न होने वाले 4 हजार 5 सौ 70 फर्जी शिक्षक-शिक्षिकाओं की सूची प्रदेश के सभी बीएसए को मुहैया कराई. जिसमें 1 हजार 51 शिक्षक-शिक्षिकाओं ने नंबर बढ़ाकर नौकरी पाई.
बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रेमचंद यादव ने बताया कि कई फर्जी शिक्षक-शिक्षिकाएं जनपद बदायूं से स्थानांतरण करा चुके हैं. इसलिए संबंधित जिले के बीएसए को पत्र लिखा जाएगा और जानकारी दी जा रही हैं. विभिन्न भर्तियों में तैनात किए गए शिक्षक-शिक्षिकाओं के प्रमाण पत्र तो डायट में सुरक्षित रखे गए हैं. प्रेमचंद यादव ने बताया कि जिले में प्राथमिक शिक्षक संघ का कोषाध्यक्ष सलमान फारुख 2006 से फर्जी नौकरी कर रहा है.

वहीं शिक्षक नेता सतीश चंद्र मिश्रा ने शिक्षा विभाग पर उंगली उठाते हुए कहा कि बिना शिक्षा विभाग की सहमती और आर्थिक समझौते के बिना फर्जी नियुक्ति नहीं की जा सकती. इन नियुक्ति में कहीं न कहीं विभाग के लोग भी शामिल है, जो अपने आर्थिक लाभ के कारण इस तरह के फर्जीबाड़े करते हैं. विभाग के उन लोगों के खिलाफ भी जांच होनी चाहिए जो इसमें लिप्त है. जिनकी वजह से इतने बड़े स्तर पर फर्जी शिक्षक-शिक्षकाए लग गए और हकदार शिक्षक नौकरी पाने से वंचित रह गए.
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