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प्रधानमंत्री से अवॉर्ड जीत चुके बदायूं में आज भी सिर पर मैला ढो रही दलित मां

खुले में शौच से मुक्ति के लिए वर्ष 2010-11 में बदायूं जिले के 12 गांवों को निर्मल ग्राम पुरस्कार प्रदान किया गया। 2011 में केंद्र से उत्तर प्रदेश को 13 पुरस्कारों के साथ ही बदायूं के डीएम को 6 पुरस्‍कार दिए गए। बावजूद इसके यहां आज भी सिर पर मैला ढोने की प्रथा अभी समाप्‍त नहीं हुई है।

खुले में शौच से मुक्ति के लिए वर्ष 2010-11 में बदायूं जिले के 12 गांवों को निर्मल ग्राम पुरस्कार प्रदान किया गया। 2011 में केंद्र से उत्तर प्रदेश को 13 पुरस्कारों के साथ ही बदायूं के डीएम को 6 पुरस्‍कार दिए गए। बावजूद इसके यहां आज भी सिर पर मैला ढोने की प्रथा अभी समाप्‍त नहीं हुई है।

'खुले में शौच से मुक्ति' के लिए वर्ष 2010-11 में बदायूं जिले के 12 गांवों को निर्मल ग्राम पुरस्कार प्रदान किया गया। 2011 में केंद्र से उत्तर प्रदेश को 13 पुरस्कारों के साथ ही बदायूं के डीएम को 6 पुरस्‍कार दिए गए। बावजूद इसके यहां आज भी सिर पर मैला ढोने की प्रथा अभी समाप्‍त नहीं हुई है।

  • News18
  • Last Updated: October 1, 2014, 2:56 PM IST
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'खुले में शौच से मुक्ति' के लिए वर्ष 2010-11 में बदायूं जिले के 12 गांवों को निर्मल ग्राम पुरस्कार प्रदान किया गया। 2011 में केंद्र से उत्तर प्रदेश को 13 पुरस्कारों के साथ ही बदायूं के डीएम को 6 पुरस्‍कार दिए गए। बावजूद इसके यहां आज भी सिर पर मैला ढोने की प्रथा अभी समाप्‍त नहीं हुई है।

इंडियन एक्‍सप्रेस की खबर के मुताबिक, ऐसा ही एक मामला बदायूं जिले के रमजानपुर गांव के वाल्मीकि मोहल्ले में रहने वाली एक महिला का है। उसने 13 साल पहले 22 साल की उम्र में ही अपने पति को खो दिया था। उस समय उसके ऊपर पांच बच्‍चों को संभालने की जिम्‍मेदारी थी। इस समय इनकी उम्र 13 से 19 साल के बीच है। करीब 100 परिवारों के इस गांव में यह महिला पड़ोसियों से ठोड़ी तक घूंघट में अपना चेहरा छुपाकर यह काम करने को विवश है।

उसे लकड़ी की एक टोकरी में घर-घर घूमकर इकट्ठे किए गए उस बदबूदार कचरे को 4 किमी दूर फेंकने जाना पड़ता है।



यही नहीं, 35 वर्षीय इस महिला के ईंट से बने टूटे-फूटे घर की छत भी घास-फूस की ही बनी हुई है।
उसके जैसी महिलाओं को यहां "मेतरानी" कहा जाता है। बीस साल पहले संसद में 1993 में पहली बार शुष्क शौचालयों और मैला ढ़ोने पर प्रतिबंध लगाने के लिए संशोधन पारित पारित किया गया था।

मिर्जापुर मिढोली सटे रमजानपुर मे "मेतरानी" आज भी अपना काम बदस्‍तूर कर रही है। दो गांवों के प्रधानों ने बताया कि 35 साल पहले कम से कम 200 परिवार इस काम लगे हुए थे।

गौरतलब है कि बीते दिनों दो चचेरी बहनों की हत्‍या के बाद उनके शव पेड़ से लटकाए जाने के चलते चर्चा में आए बदायूं को स्‍वच्‍छता के लिए कई पुरस्‍कार मिल चुके हैं। 2011 में, तो तत्‍कालीन जिलाधिकारी अमित गुप्ता को मैला ढ़ोने और शुष्क या अस्वास्थ्यकर शौचालयों की प्रथा को नष्ट करने के लिए शुरू किए गए अभियान 'दलिया जलाओ' के लिए लोक प्रशासन में उत्कृष्टता हेतु प्रधानमंत्री पुरस्कार भी दिया गया था।
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