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आंवला लोकसभा सीट: बीजेपी को उसके गढ़ में चुनौती दे पाएगा एसपी-बीएसपी का गठबंधन?

चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी के वर्तमान सांसद धर्मेंद्र कश्यप.
चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी के वर्तमान सांसद धर्मेंद्र कश्यप.

आंवला से दिल्ली की दूरी करीब 280 किलोमीटर है. लेकिन सांसद के तौर पर यह दूरी तय करने के लिए प्रत्याशियों का काफी कुछ करना पड़ेगा.

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आंवला से दिल्ली की दूरी करीब 280 किलोमीटर है. लेकिन सांसद के तौर पर यह दूरी तय करने के लिए प्रत्याशियों का काफी कुछ करना पड़ेगा. पिछले चुनावों में तो एक तरह से पूरा उत्तर प्रदेश ही बीजेपी के हिस्से आया था. लेकिन वैसे भी आंवला को बीजेपी का गढ़ माना जाता है. इसके पांच विधानसभा क्षेत्र हैं. जैन मंदिर, बेगम मस्जिद, रामनगर किला, भीम गाडा यहां के प्रमुख पर्यटन स्थल हैं. आंवला लोकसभा क्षेत्र में पांच विधानसभा क्षेत्र हैं- आंवला, बिथरी चैनपुर, फरीदपुर, बदायूं और शेखूपुर. इन सभी विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा का कब्जा है.

कौन हैं प्रत्याशी

बीजेपी का लक्ष्य इस बार भी यहां पर जीत बनाए रखने का है. हालांकि इस बार हालात बदले हुए हैं. 2014 से अलग समाजवादी पार्टी-बहुजन समाज पार्टी एक साथ चुनाव लड़ रही हैं. ऐसे मे बीजेपी के लिए सीट निकालना पिछली बार से मुश्किल हो सकता है.



आंवला लोकसभा सीट पर 14 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. मुख्य मुकाबला बीजेपी के सांसद धर्मेंद्र कश्यप और बहुजन समाज पार्टी के रुचिविरा के बीच है. 51 साल के कश्यप 1 सितम्‍बर 2014 से खाद्य उपभोक्‍ता मामले और सार्वजनिक वितरण संबंधी स्‍थायी समिति, परामर्शदात्री समिति, स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्‍याण मंत्रालय के सदस्‍य हैं.
धर्मेंद्र कुमार कश्यप काफी लंबे समय से राजनीति में एक्टिव हैं. पंचायत स्तर से अपनी राजनीति की शुरुआत के बाद वह विधायक बने, राज्य सरकार में मंत्री बने.

ruchi veera
बीएसपी की प्रत्याशी रुचि वीरा


दूसरी तरफ पूर्व विधायक रुचि वीरा हैं, जो मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पहले बिजनौर लोकसभा से लड़ना चाहती थीं. समाजवादी पार्टी से बहुजन समाज पार्टी में आईं रुचि वीरा का गठबंधन उम्मीदवार होना उन्हें मजबूत उम्मीदवार बनाता है.

कांग्रेस की ओर से कुंवर सर्वराज सिंह चुनावी मैदान में हैं. नौ क्षेत्रीय दलों के नेता भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. दो निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान में हैं.

1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सहानुभूति लहर में कांग्रेस जीती थी. लेकिन उसके बाद से ही पार्टी जीत को तरस रही है. 1989 और 1991 में भारतीय जनता पार्टी लगातार दो बार यहां से जीती. 1996 के चुनाव में बीजेपी को झटका लगा. समाजवादी पार्टी तब यहां से जीती. लेकिन दो साल बाद 1998 के चुनाव में एक बार फिर बीजेपी यहां जीती. 1999 में समाजवादी पार्टी और 2004 में जनता दल यूनाइटेड के टिकट पर सर्वराज सिंह ने चुनाव जीता. 2009 में मेनका गांधी जीतीं. 2014 में बीजेपी के धर्मेंद्र कश्यप सांसद बने.

वरिष्ठ बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी भी आंवला से सांसद रह चुकी हैं. वर्तमान में वो सुल्तानपुर से चुनाव लड़ रही हैं.


पिछले चुनाव में कैसा था मिजाज

2014 में यहां 60 फीसदी मतदान हुआ था. भारतीय जनता पार्टी को मोदी लहर का फायदा मिला और बीजेपी प्रत्याशी धर्मेंद्र कुमार कश्यप ने 41 फीसदी वोट पाकर जीत दर्ज की. समाजवादी पार्टी के कुंवर सर्वराज को सिर्फ 27.3 फीसदी वोट हासिल हुए थे. धर्मेंद्र कश्यप को 4,09,907 वोट मिले थे. कुंवर सर्वराज सिंह को 2,71,478 वोट और बीएसपी की सुनीता शाक्य को 1,90,200 वोट हासिल हुए थे. अगर बीएसपी और एसपी के वोट जोड़े जाएं, तो धर्मेंद्र कश्यप से ज्यादा होते हैं. यहां कुल मतदाता करीब 17 लाख हैं.

क्या हैं जातीय समीकरण

आंवला लोकसभा क्षेत्र में मुस्लिम वोटरों का खासा प्रभाव है. जिले में करीब 35 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं, जबकि 65 फीसदी संख्या हिंदुओं की है. हालांकि लंबे समय से यहां मुस्लिम-दलित वोटरों का समीकरण नतीजे तय करता आया है, इनके अलावा क्षत्रिय-कश्यप वोटरों का भी यहां खासा प्रभाव है. ऐसे में इस बार समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के गठबंधन होने से मुकाबला दिलचस्प हो गया है.

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