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फातिमा बोलीं- CBI कर लेती ये चार काम तो मिल जाता नजीब

फाइल फोटो- नजीब की मां फातिमा नफीस.
फाइल फोटो- नजीब की मां फातिमा नफीस.

मोबाइल का पैटर्न लॉक बदायूं जैसे छोटे शहर में एक दुकानदार खोल देता है उसे सीबीआई नहीं खुलवा पाने की बात कह रही है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 9, 2018, 1:35 PM IST
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‘‘मैं नहीं जानती की सीबीआई किस दबाव में काम कर रही है. लेकिन उसने अपने काम को ठीक से अंजाम नहीं दिया. हैरत की बात ये है कि जिस मोबाइल का पैटर्न लॉक बदायूं जैसे छोटे शहर में एक दुकानदार खोल देता है उसे सीबीआई नहीं खुलवा पाने की बात कह रही है. कुछ काम ऐसे हैं जो जांच के दौरान नहीं किए गए. अगर सीबीआई, दिल्ली पुलिस और क्राइम ब्रांच उन्हें कर लेती तो आज हमारा नजीब हमारे पास होता.’’ ये कहना है जेएनयू से गायब हुए छात्र नजीब की मां फातिमा नफीस का.

न्यूज18 हिन्दी से बात करते हुए फातिमा नफीस ने कहा, ‘‘सीबीआई का तर्क है कि आरोपियों से बरामद मोबाइल में से कुछ खराब हैं. कुछ में डाटा नहीं मिला है और कुछ के पैटर्न लॉक नहीं खुल रहे हैं. ये एक मजाक से ज्यादा कुछ नहीं है.’’

फातिमा का सीबीआई, दिल्ली पुलिस और क्राइम ब्रांच पर आरोप है कि ‘‘अगर उन्होंने आरोपियों का लाइडिडेक्टर या नॉर्को टेस्ट करा लिया होता, आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की होती तो आज इस केस का रुख कुछ और ही होता. हमारे कहने के बावजूद स्पेशल इंवेस्टीगेशन टीम (एसआईटी) बनाकर जांच नहीं कराई जा रही है.



जेएनयू के गायब छात्र नजीब की तलाश में जगह-जगह लगे पोस्टर.

इतना ही नहीं हमे नजीब का मोबाइल और उसका लैपटॉप भी नहीं दिया जा रहा है. हो सकता है कि नजीब ने अपने साथ ही घटना का मोबाइल या लैपटॉप पर कोई मैसेज छोड़ा हो.’’ सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर फातिमा का कहना है, ‘‘इस फैसले के खिलाफ हम सुप्रीम कोर्ट जा रहे हैं. जब तक मेरे बेटे को इंसाफ नहीं मिलेगा और उसे तलाशा नहीं जाएगा मैं लडूंगी. नजीब की गुमशुदगी वाले दिन 15 अक्टूबर को मण्डी हाउस से लेकिर संसद भवन तक मार्च निकाला जाएगा.’’

मोबाइल के पैटर्न लॉक के बारे में आईटी एक्सपर्ट रक्षित टंडन का कहना है कि, ‘‘अगर एंड्रॉइड फोन की बात करें तो इसके पैटर्न लॉक को खोलना बहुत ही आसान है. 2 साल पहले 2016 तक ये ही फोन चलन में थे. लेकिन आज के स्मॉर्ट फोन में लगे पैटर्न लॉक को खोलना थोड़ा मुश्किल है. इसके लिए खासी मशक्कत करनी पड़ती है.’’

ये भी पढ़ें- दिल्ली पुलिस, सीबीआई हार सकती है नजीब की मां नहीं, तलाश जारी रहेगी- फातिमा

नजीब केस में कब क्या-क्या हुआ-

15 अक्टूबर, 2016 - एबीवीपी के कुछ कार्यकर्ताओं के साथ कहासुनी के बाद जेएनयू का छात्र नजीब अहमद छात्रावास से लापता.

18 अक्टूबर, 2016 - लापता छात्र का पता लगाने के लिए जेएनयू ने सीबीआई, एनसीआरबी से मदद मांगी.

20 अक्टूबर, 2016 - गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने लापता छात्र का पता लगाने के लिए पुलिस से विशेष टीम गठित करने को कहा.

24 अक्टूबर, 2016 - दिल्ली पुलिस ने नजीब अहमद के संबंध में सूचना देने वाले को 50 हजार रुपये इनाम देने की घोषणा की.  बाद में ये 10 लाख रुपये हो गया.

25 नवंबर, 2016 - अहमद की मां ने बेटे का पता लगाने के लिए हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की, हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार और पुलिस से मांगा जवाब

28 नवंबर, 2016 - दिल्ली पुलिस ने नजीब अहमद के बारे में सूचना देने वाले के लिए इनाम की राशि बढ़ाकर 10 लाख रुपये की.

28 नवंबर, 2016 - हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा कि वह सभी राजनीतिक विवादों से ऊपर उठकर नजीब अहमद का पता लगाए क्योंकि राजधानी से यूंही कोई लापता नहीं हो सकता.

09 दिसंबर, 2016 - पुलिस को अहमद का कोई सुराग नहीं मिला, हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस की खिंचाई की.

14 दिसंबर, 2016 - हाईकोर्ट ने पुलिस को खोजी कुत्तों की मदद से सभी छात्रावासों, कक्षाओं और छतों सहित पूरे जेएनयू परिसर में तलाशी का आदेश दिया.

19 दिसंबर, 2016 - नजीब अहमद के बारे में सुराग पाने के लिए 600 से ज्यादा पुलिसकर्मियों, खोजी कुत्तों ने जेएनयू परिसर की तलाशी ली.

22 दिसंबर, 2016 - हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस से नजीब अहमद का पता लगाने में हरसंभव प्रयास करने का आदेश दिया.  हाईकोर्ट ने नजीब अहमद के रूममेट और नौ अन्य संदिग्धों का लाई-डिटेक्टर परीक्षण कराने की सलाह दी.

28 जनवरी, 2017 - नजीब अहमद के परिवार ने दिल्ली पुलिस पर बदायूं स्थित उनके आवास पर तड़के तलाशी लेकर उन्हें प्रताड़ित करने का आरोप लगाया.

13 फरवरी, 2017 - अहमद के संबंध में कोई सूचना नहीं मिलने से हाईकोर्ट नाराज, परिवार ने जांच किसी अन्य एजेंसी को सौंपने की मांग की.

30 मार्च, 2017 - मजिस्ट्रेट अदालत ने पॉलीग्राफ/लाईडिडेक्टर परीक्षण के खिलाफ नौ छात्रों की याचिका खारिज की. उन्हें 6 अप्रैल को उपस्थित होने का सम्मन भेजा.

03 मई, 2017 - सत्र अदालत ने मजिस्ट्रेट अदालत के फैसले पर रोक लगाई.  हालांकि दिल्ली पुलिस को नए सिरे से नोटिस भेजने की अनुमति दी.

15 मई, 2017 - अहमद के रिश्तेदारों को फोन करके उसे छोड़ने के एवज में 20 लाख रुपये की फिरौती मांगने संबंध फोन कॉल से जुड़े मामले में पुलिस ने आरोपपत्र दाखिल किया.

16 मई, 2017 - हाईकोर्ट ने जेएनयू से लापता छात्र के मामले की जांच तत्काल प्रभाव से सीबीआई को सौंपी और जांच की निगरानी कम से कम डीआईजी स्तर के अधिकारी से कराने को कहा.

14 नवंबर, 2017 - सीबीआई ने हाईकोर्ट को बताया कि उसने संदिग्ध छात्रों के मोबाइल फोन फॉरेंसिक प्रयोगशाला में भेज दिए हैं और विश्लेषण रिपोर्ट की प्रतीक्षा है.

02 अप्रैल, 2018 - हाईकोर्ट ने संदिग्ध छात्रों के माबोइल फोन की जांच करने में लापरवाही के लिए चंडीगढ़ स्थित सीबीआई की फॉरेंसिक प्रयोगशाला की खींचाई की.

04 सितंबर, 2018 - सीबीआई ने हाईकोर्ट में मामला बंद करने के लिए क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने की अनुमति मांगी.

08 अक्टूबर, 2018 - जेएनयू से अहमद के लापता होने के करीब दो साल बाद हाईकोर्ट ने सीबीआई को जांच बंद करने की अनुमति दी.
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