UP: दुर्दांत अपराधियों के इस गांव की अब बदलने जा रही है तस्वीर, एक CO ने उठाया है जिम्मा

र्म की काली दुनिया से इस गांव को निकालने की कवायद अब शुरू हो चुकी है और उसका बीड़ा उठाया है क्षेत्र के तेजतर्रार बदायूं के उझानी सर्किल सीओ अनिरुद्ध सिंह ने.
र्म की काली दुनिया से इस गांव को निकालने की कवायद अब शुरू हो चुकी है और उसका बीड़ा उठाया है क्षेत्र के तेजतर्रार बदायूं के उझानी सर्किल सीओ अनिरुद्ध सिंह ने.

र्म की काली दुनिया से इस गांव को निकालने की कवायद अब शुरू हो चुकी है और उसका बीड़ा उठाया है क्षेत्र के तेजतर्रार बदायूं के उझानी सर्किल सीओ अनिरुद्ध सिंह ने.

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बदायूं. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बदायूं (Badaun) जिले के कादरचौक ब्लॉक में एक गांव है धनुपुरा यह गांव देश के मानचित्र में जरायम के लिए जाना जाता है. यहां के घरों में कच्ची शराब का कारोबार खुलेआम होता था. साथ ही अलग-अलग राज्यों की पुलिस (Police) अपराधियों की धर पकड़ को अक्सर यहां छापा मारती रहती हैं, क्योंकि ये लोग बावरिया गिरोह के सदस्य भी कहे जाते हैं. देश में बड़ी डकैती या बड़ी तिजोरी लूट का मामला हो यहां के लोग शामिल रहते हैं. इस गांव के 40 लोग अभी भी देश की अलग-अलग जेलों में बंद हैं. अब इस गांव की तस्वीर बदलने जा रही है. इसकी मुहिम शरू हुई हो गई है. आज़ादी के बाद भी इस गांव के लोगों को 125 सालों में न तो कोई जाति का दर्जा मिला है और न ही कोई विकास हुआ है. लेकिन अब इसका जिम्मा तेज जतर्रार सीओ उझानी अनिरुद्ध सिंह ने उठाया है. उन्होंने गांववासियों की मदद से गांव को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य शुरू कर दिया है.

हर राज्य की पुलिस इस गांव को जानती है

बदायूं जिला मुख्यालय से से मात्र 25 किमी दूर कादरचौक विकास क्षेत्र का ग्राम धनपुरा अक्सर विवादों में रहता है. कहा जाता है जुर्म की दुनिया में ऐसा कोई काम नहीं है जो इस गांव में न होता हो. गांव को बाबरियों के गांव के नाम से देश भर की पुलिस जानती है. गांव के तमाम घरों में कच्ची शराब बनाई जाती है और उसकी सप्लाई तमाम जगह की जाती है. यहां के पुरुष भी अन्य प्रदेशों में जाकर चोरी तथा लूट की घटनाओं को अंजाम देते रहते हैं. जिसके चलते अन्य प्रदेशों की पुलिस द्वारा अक्सर उनकी धरपकड़ के लिए यहां पर छापेमारी भी की जाती है. गांव के तमाम घरों में कच्ची शराब की वजह से पुरुषों की मौत हो चुकी है और घर की मुखिया महिलाएं ही हैं.



सीओ ने उठाया बदलाव का जिम्मा
लेकिन जुर्म की काली दुनिया से इस गांव को निकालने की कवायद अब शुरू हो चुकी है और उसका बीड़ा उठाया है क्षेत्र के तेजतर्रार बदायूं के उझानी सर्किल सीओ अनिरुद्ध सिंह ने. उनके मुताबिक लगभग डेढ़ सौ साल पहले इस गांव में राजस्थान से माइग्रेट होकर बावरिया जाति के लोग बस गए थे. इनका मुख्य पेशा अपराध था. उन्होंने बताया कि आज तक इस गांव के लोगों ने आधार कार्ड नहीं बनवाया है. इस गांव के लोगों की कौन सी जाति है, यह भी किसी को नहीं पता. क्योंकि यहां पर किसी के पास कोई भी जाति प्रमाण पत्र नहीं है. जिससे इन्हें उसका लाभ भी नहीं मिल पाता. पूरे देश की विभिन्न जेलों में इस गांव के 40 से ज्यादा लोग बंद हैं. बदायूं और बरेली की जेलों में लगभग 15 लोग विभिन्न अपराधों में सजा काट रहे हैं. पूरे गांव में कच्ची शराब का धंधा होता था. पुरुषों के जेल चले जाने के बाद महिलाएं इस धंधे को चलाती थी और दूर-दूर तक यहां से सप्लाई करती थी. लेकिन जब से उन्होंने बीड़ा उठाया है इन लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का तबसे गांव की तस्वीर बदल गई है. महिलाओं ने कच्ची शराब तोड़ने का धंधा बिल्कुल बंद कर दिया है. पहले जो पुरुष पुलिस की गाड़ी देख कर भाग जाया करते थे और गांव भर में सिर्फ महिलाएं ही नजर आती थी. वह पुरुष गांव की ओर वापस लौटने लगे हैं और पुलिस पर उनका विश्वास फिर से जमने लगा है.

गांव में अपराध के पैसे से बने हैं मंदिर

इस गांव मैं जब आप आयेंगे तो आपको चारों तरफ मंदिर बने हुए दिखेंगे. पूरे गांव में लगभग 40 मंदिर हैं. यहां के ग्रामवासी कुलदेवी को मानते हैं और यह सब मंदिर अपराध के पैसों से अपराधियों द्वारा ही बनवाए गए. इनका मानना है कि अपराध के लिए जाने से पहले यहां पर कुलदेवी का आशीर्वाद लेकर जाने से वारदात में सफलता मिलती है. सीओ के अथक प्रयास के बाद ग्राम वासियों ने इन्हीं कुलदेवी की कसम खाकर अपराध ना करने का फैसला किया है.

अब बदल रही तस्वीर

पूरे गांव में इस समय सरकार की विभिन्न योजनाओं के पहुंचने का क्रम शुरू हो गया है. गांव में खेल का मैदान बनाया गया है, वहीं दूसरी तरफ सामुदायिक केंद्र, शौचालय समेत सरकार की तमाम योजनाएं इस गांव में पहुंच रही हैं. अधिकारी व कर्मचारी कैंप लगाकर लोगों के आधार कार्ड, राशन कार्ड, जाति प्रमाण पत्र आदि सभी कागजात गांव में ही कैंप करके बना रहे हैं. जिससे अपराध से जुड़े जुड़े इस गांव में अपराध का खात्मा करके यहां के निवासियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके.

गांव में क्षेत्रीय सांसद धर्मेंद्र कश्यप, क्षेत्रीय विधायक धर्मेंद्र शाक्य ,जिला अधिकारी कुमार प्रशांत, एसएसपी संकल्प शर्मा ने सीओ अनिरुद्ध सिंह द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लिया. समाज की मुख्यधारा में ग्राम वासियों को जोड़ने के लिए विभिन्न योजनाओं की शुरुआत की है. सीओ अपने दोस्तों की मदद से  पढ़ने वाली 42 छात्राओं को साइकिलें दी. वहीं दूसरी ओर कच्ची शराब का धंधा करने वाली महिलाओं को पुराना धंधा छोड़ने पर सिलाई मशीनें उपलब्ध करवाई गई. इसके साथ ही उन्हें कपड़ा भी उपलब्ध करवाया गया. जिसकी सहायता से वह मास्क आदि को बनाकर उनकी सप्लाई आसपास के अस्पतालों में कर कर अपना जीविकोपार्जन कर सकें. अब देखने वाली बात यह होगी की अपराध की दुनिया में बदनाम यह गांव सीओ अनिरुद्ध सिंह के अथक प्रयासों के बाद अपराध की दुनिया से दूर हो पायेगा या नही,लेकिन आज यह पूरा क्षेत्र सीओ के प्रयासों को सरहा तो रहा ही है.
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