तोगड़िया के गुस्से का VHP पर नहीं पड़ेगा असर, उन्हें मनाया नहीं जाएगा: आलोक कुमार

सामाजिक विषमता मिटाने के लिए अभी आरक्षण की आवश्यकता है. आरक्षण चलते रहना चाहिए. हम इसे निश्चित रूप से जारी रखेंगे.

ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: April 20, 2018, 1:01 PM IST
तोगड़िया के गुस्से का VHP पर नहीं पड़ेगा असर, उन्हें मनाया नहीं जाएगा: आलोक कुमार
विश्व हिंदू परिषद में प्रवीण तोगड़िया की जगह लेने वाले एडवोकेट आलोक कुमार
ओम प्रकाश
ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: April 20, 2018, 1:01 PM IST
विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) में प्रवीण तोगड़िया युग का अंत हो गया है. इसमें कुर्सी को खींचतान इतनी बढ़ी कि साल 1964 में परिषद बनने के बाद पहली बार बैलेट पेपर से चुनाव करवाना पड़ा. इसमें छह साल से अंतराष्ट्रीय अध्यक्ष रहे राघव रेड्डी की जगह पर हिमाचल के गवर्नर रहे विष्णु सदाशिव कोकजे को अध्यक्ष और कार्याध्यक्ष रहे प्रवीण तोगड़िया के स्थान पर दिल्ली हाईकोर्ट के वकील आलोक कुमार को जगह मिली है. तोगड़िया जितने आक्रामक थे उनसे उलट कुमार मृदुभाषी व्यक्तित्व वाले हैं.

मूल रूप से यूपी के बदायूं जिले से आने वाले कुमार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में दिल्ली प्रांत के सह संघ चालक  हैं. दुनिया भर में हिंदुत्व का झंडा उठाने वाली इस संस्था को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी अब आलोक कुमार पर है. 32 साल तक वीएचपी में काम करने वाले कैंसर सर्जन प्रवीण तोगड़िया ने अब परिषद के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया है. वह 17 अप्रैल से उपवास पर बैठ रहे हैं. ऐसे कई सवालों को लेकर hindi.news18.com ने आलोक कुमार से बातचीत की. उन्होंने कहा कि व्यक्ति नहीं, संगठन बड़ा होता है. उन्होंने आरक्षण पर कहा कि इसे अभी जारी रखा जाना चाहिए. पेश है उनसे लंबी बातचीत के खास अंशः

सवाल: क्या प्रवीण तोगड़िया के जाने और उनके उपवास सत्याग्रह से विश्व हिंदू परिषद पर कोई असर पड़ेगा?

आलोक कुमार: मुझे नहीं लगता कि कोई असर पड़ेगा. मुझे लगता है कि चुनाव परिणाम के बाद तोगड़िया जी थोड़ा गुस्से में हैं. इसलिए वह यह सब कर रहे हैं. इसका कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा.

सवाल: क्या उन्हें मनाने की कोशिश हो रही है?

आलोक कुमार: कई बार जब गुस्सा ठंडा हो जाता है तब मनाना अच्छा रहता है. वह हमारे पुराने साथी हैं. पर मैं स्पष्ट कर दूं अभी तो हम मनाने जैसी कोई कोशिश नहीं कर रहे हैं.

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सवाल: तोगड़िया ने कहा है कि मंदिर के नाम पर सत्ता में आने वाले लोग अब दबाव डाल रहे हैं कि मैं मंदिर के लिए संसद में कानून पास करने की मांग छोड़ दूं. क्या विहिप से तोगड़िया की विदाई के बाद राम मंदिर को लेकर संगठन की सोच और अप्रोच में कोई बदलाव आएगा?

आलोक कुमार: राम मंदिर बनेगा, हर हाल में बनेगा. इसे लेकर विश्व हिंदू परिषद की सोच और अप्रोच में कोई बदलाव नहीं आ सकता. इस मसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में बहस शुरू हो गई है. हमारे वकील हमको कहते हैं कि हमारा कानूनी पक्ष बहुत मजबूत है, इसलिए हम फैसले की प्रतीक्षा करेंगे. यदि हमारे पक्ष में फैसला नहीं आता है तो हम भारत की  संपूर्ण जनता से अपील करेंगे कि वह अपने सांसदों से कहे कि संसद में कानून पास करके राम मंदिर बनवाओ. हम कानून पास कराने के पक्ष में हैं.

सवाल: विश्व हिंदू परिषद दलितों को लेकर अचानक कैसे प्रेम जाग उठा. खास तौर पर डॉ. भीमराव आंबेडकर को लेकर. चुनाव वाले दिन आप लोगों ने सबसे पहले आंबेडकर को श्रद्धांजलि दी. जबकि डॉ. आंबेडकर ने हिंदू धर्म छोड़कर बौद्ध धर्म अपना लिया था.

आलोक कुमार: विश्व हिंदू परिषद भारत में जन्म लेने वाले सभी धर्मों का संगठन है. बौद्ध पंथ भी भारत का उतना ही है जितना वैदिक धर्म. इसलिए बाबा साहेब ने कुछ ऐसा काम नहीं किया जो देश को नुकसान पहुंचाता हो. उन्होंने जो जातियों को नष्ट करने की बात कही थी, वह आज भी प्रासंगिक है. उन्होंने कहा था कि केवल वोट की समता नहीं होनी चाहिए. शैक्षणिक, आर्थिक और सामाजिक समता भी होनी चाहिए. हम इन सब कामों को श्रद्ध से आगे बढ़ा रहे हैं. इसलिए हम वही कर रहे हैं जो बाबा साहेब ने कहा था.

सवाल: तो फिर सहारनपुर और कासगंज का क्या है जहां दलितों के साथ अत्याचार की घटनाएं सामने आ रही हैं. घोड़ी और बैंड के साथ बारात तक नहीं निकालने दी जा रही है.

आलोक कुमार: हम समाज के सभी वर्गों से लगातार बात कर रहे हैं. दो तरीके हैं. एक कानून का स्ट्रांग पहलू है. दूसरा यह कि समाज में भी जागृति आए कि जातीय विद्वेष और छोटा बड़ा नहीं होना चाहिए. इसलिए हम लोग समाज के सभी वर्गों से लगातार बातचीत करके उन्हें जागरूक कर रहे हैं. अभी मेरे पास कासगंज की डिटेल नहीं है, इसलिए किसी एक घटना पर कमेंट तो नहीं करूंगा. लेकिन ऐसे मामलों में विहिप सरकार से बातचीत करेगी. जो लोग रोक रहे हैं उनसे भी बातचीत करेंगे कि वे क्यों रोक रहे हैं.

सवाल: दलित संगठनों का आरोप है कि RSS और उससे जुड़े संगठन आरक्षण खत्म करना चाहते हैं. आपका क्या मानना है?

आलोक कुमार: विश्व हिंदू परिषद का स्पष्ट मत है कि सामाजिक विषमता मिटाने के लिए अभी आरक्षण की आवश्यकता है. आरक्षण चलते रहना चाहिए. हम इसे निश्चित रूप से जारी रखेंगे.

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सवाल: क्या दलितों को लेकर आप लोगों का प्रेम 2019 के लिए तो नहीं है?

आलोक कुमार: हम इस काम को पहली बार नहीं कर रहे हैं. समरसता का काम हमने आज शुरू किया होता तो आरोप लग सकता था. उडुपी की कॉन्फ्रेंस में श्री गुरुजी की उपस्थिति में देश के सभी धर्माचार्यों ने कहा था कि अस्पृश्यता हिंदुत्व के खिलाफ है तब तो कोई चुनाव नहीं था. तब से हम इस काम को लगातार करते रहें हैं. अभी साल भर पहले सर संघचालक उज्जैन गए थे, वहां पर उमेश नाथ जी हैं, बहुत बड़े संत हैं, वह वाल्मीकि हैं. उनके आश्रम में गए थे. चुनाव तो आते रहेंगे चुनाव जाते रहेंगे.

सवाल: विश्व हिंदू परिषद में आप नया क्या करने वाले हैं.

आलोक कुमार: ईमानदारी से कहूंगा कि मुझे नया करने की कोई जरूरत नहीं. हमारी पहली प्राथमिकता समरसता के लिए व्यावहारिक काम करने की है. आर्थिक बराबरी, सामाजिक बराबरी और शैक्षणिक बराबरी का काम करना है. जहां निर्णय लिए जाते हैं उन संस्थाओं में वंचितों की भागीदारी के लिए काम करना है.

सवाल: हैदराबाद की मक्का मस्जिद ब्लास्ट केस में 11 साल बाद एनआईए की स्पेशल कोर्ट ने असीमानंद समेत 5 आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है. क्या कहना है आपका?

आलोक कुमार: हमें बहुत संतोष है कि असीमानंद और उनके साथियों को न्याय मिला है. कांग्रेस सरकार के राज में हिंदुत्व आंदोलन को बदनाम करने के लिए जो 'भगवा आतंकवाद' शब्द इजाद किया गया था वह झूठ साबित हुआ. भगवा आतंकवाद जैसी कोई चीज थी ही नही. कांग्रेस राज में वोट बैंक के लिए यह सब गढ़ा गया था. असीमानंद और बाकी हिंदू शक्तियों को फसाने के लिए जो ध्यान लगाया गया, उससे वास्तविक अपराधी बचके छूट गए. इससे अगर किसी को फायदा हुआ और मदद मिली तो वह पाकिस्तान को मिली. भारत में तो इससे कोई खुश नहीं था. आज न्याय मिला है.

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