बागपत: गाय की तेरहवीं पर पूरे गांव को न्योता, हलवाई बुला खिलाया भोज
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बागपत: गाय की तेरहवीं पर पूरे गांव को न्योता, हलवाई बुला खिलाया भोज
बागपत के एक किसान परिवार ने मनाई 'गाय' की तेरहवीं

गाय (Cow) के चित्र पर पुष्प अर्पित किए और शारीरिक दूरी का ध्यान रखते हुए ग्रामीणों को ब्रह्मभोज कराया. ग्रामीणों को मास्क बांटे गए. बता दें कि इस किसान परिवार में वर्ष 2006 में बैल की तेरहवीं भी की थी.

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बागपत. पालतू पशु को घर के सदस्य का दर्जा देने की कहानी तो आपने सुनी ही होगी. हाल ही में उत्तराखंड के ऋषिकेश में एक पालतू कुतिया की नसबंदी को लेकर उसके मालिक ने महिला के खिलाफ f.i.r. तक दर्ज करा दी थी। लेकिन यूपी के बागपत में आज एक अनोखा मामला सामने आया. यहां एक किसान ने अपने पालतू गाय की मौत के बाद उसकी तेरहवीं पर भोज का आयोजन किया. भोज था, तो जाहिर है इसके लिए निमंत्रण भी दिए गए. गांव के लोगों को गाय की तेरहवीं की सूचना दी गई, सभी लोग आए भी. किसान ने घर के बाहर गाय की तस्वीर लगा रखी थी, निमंत्रित लोगों ने इस तस्वीर पर फूल चढ़ाकर श्रद्धांजलि अर्पित की और भोज में शामिल हुए.
चूंकि अभी कोरोनावायरस को लेकर लॉकडाउन है, सरकार ने सोशल डिस्टेंसिंग करने का निर्देश दे रखा है, इसलिए किसान ने कोरोना के सभी प्रोटोकॉल का पालन करते हुए इस भोज का आयोजन किया.

27 साल से गाय थी परिवार का हिस्सा
बागपत जनपद के दोघट क्षेत्र के दाहा गांव निवासी कृष्णपाल 1993 में अपने एक रिश्तेदार के यहां से एक बछिया को लेकर आए थे. जिसे वह एक बछिया कम और परिवार का सदस्य ज्यादा मानते थे. कृष्णपाल उसे प्यार से उसे राधा बुलाते थे. समय के साथ-साथ बछिया से राधा गाय बन गई और परिवार के साथ खुद भी एक सदस्य की तरह व्यवहार करती. लेकिन जैसे-जैसे समय बढ़ता रहा राधा गाय की उम्र भी बढ़ती चली गई. आखिरकार एक वक्त आया जब राधा गाय इस परिवार को छोड़कर चली गई.



लेकिन कृष्णपाल का परिवार राधा गाय को परिवार का सदस्य मानता था. तो इसी कारण सबने राधा की मौत के बाद उसकी तेरहवीं करने की इच्छा जताई. विधि विधान से बकायदा घर में हवन कराया गया और तेरहवीं का भोज भी हलवाई से बनवाया गया. गांव में न्योता दिया गया और लोगों को आमंत्रित भी किया गया. हालांकि देश में लॉकडाउन के कारण परिवार ने सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखते हुए लोगों को भोज कराया. जहां गुलाब जामुन, पूड़ी सब्जी तक बनवाई गई.



इस बाबत कृष्णपाल ने बताया कि राधा उनके लिए गाय नहीं बल्कि सदस्य थी. इससे पहले भी यह परिवार बेजुबान जानवरों के लिए अपना यही प्यार दिखा चुके है. गाय के चित्र पर पुष्प अर्पित किए और शारीरिक दूरी का ध्यान रखते हुए ग्रामीणों को ब्रह्मभोज कराया. ग्रामीणों को मास्क बांटे गए. बता दें कि इस किसान परिवार में वर्ष 2006 में बैल की तेरहवीं भी की थी.

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