बहराइच: निजीकरण के विरोध में बिजली विभाग के कर्मचारियों का मशाल प्रदर्शन, 35 हिरासत में

बहराइच में विद्युत् कर्मियों ने निजीकरण के विरोध में किया प्रदर्शन
बहराइच में विद्युत् कर्मियों ने निजीकरण के विरोध में किया प्रदर्शन

ऊर्जा क्षेत्र के निजीकरण के विरोध में प्रदेश के इंजीनियर व विद्युतकर्मी संयुक्त संघर्ष समिति की अगुवाई में माह भर से चरणबद्ध तरीके से विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है.

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बहराइच. निजीकरण (Privatization) के विरोध विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति की अगुवाई में सोमवार को निकलने वाले मशाल जुलूस पर प्रशासन ने अचानक रोक लगा दी. विद्युतकर्मियों के जुलूस को देखते हुए पुलिस प्रशासन की ओर से अधीक्षण अभियंता कार्यालय पर भारी पुलिस (Police) फोर्स लगा दिया गया. प्रशासन के रवैये पर विद्युतकर्मियों ने गुस्सा जताते हुये कार्यालय पर ही मशल जुलूस निकालकर प्रदर्शन करते हुए सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. इस दौरान पदाधिकारियों ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए आंदोलन को तेज करने की चेतावनी दी. बता दें ऊर्जा क्षेत्र के निजीकरण के विरोध में प्रदेश के इंजीनियर व विद्युतकर्मी संयुक्त संघर्ष समिति की अगुवाई में माह भर से चरणबद्ध तरीके से विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है.

नगर मजिस्ट्रेट से मिली थी अनुमति

सोमवार को प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों द्वारा शाम पांच बजे से मशाल जुलूस निकालकर प्रदर्शन करना था. इसके लिए समिति की ओर से नगर मजिस्ट्रेट से अनुमति भी प्राप्त हो गई थी. सोमवार को समिति की अगुवाई में इंजीनियर व कर्मचारी अस्पताल चौराहा स्थित अधीक्षण अभियंता कार्यालय पर एकत्रित होकर मशाल जुलूस निकालने की तैयारी में ही थे कि अचानक प्रशासन द्वारा पूरे परिसर के चारों तरफ फोर्स लगाकर बिजलीकर्मियों को कोरोना प्रोटोकॉल का हवाला देते हुए मशाल जुलूस पर रोक लगा दी. प्रशासन के रवैये पर गुस्साए विद्युतकर्मियों ने कार्यालय परिसर में ही मशाल जुलूस निाकलर सरकार विरोधी नारेबाजी करते हुये प्रदर्शन शुरू कर दिया.



कर्मचारियों ने लगाया ये आरोप
समिति के संयोजक इंजीनियर हर्षराज रस्तोगी ने कहा कि सरकार द्वारा ऊर्जा क्षेत्र को निजीकरण करने का प्रस्ताव महज पूंजीपतियों को लाभ पंहुचाने के लिए है. इससे उपभोक्ता व कर्मचारियों को कोई लाभ होने वाला नहीं है. जूनियर इंजीनियर संघ के अध्यक्ष संजय कुमार ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र के निजीकरण होने से बिजली की दरों में अचानक से वृद्धि कर दी जायेगी. इससेे मध्यम व गरीब लोगों की पंहुच से बिजली दूर हो जायेगी. छोटे उद्योग धंधे भी मंहगी बिजली से प्रभावित होंगे. इंजीनियर नीरज पटेल ने कहा कि सरकार का निजीकरण का फैसला पूरी तरह जनविरोधी है. सरकार के फैसले से किसान, गरीब व मध्यमवर्ग के लोगों को मंहगी बिजली मिलने से यह सभी की पंंहुच से दूर हो जायेगी. बिजली कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सुशील गोस्वामी ने कहा कि सरकार प्रशासन की ताकत पर विद्युतकर्मियों की जायज आवाज को दबाना चाहती है. लेकिन ऐसा कतई नहीं नही होने दिया जायेगा. सरकार जब तक अपना निजीकरण का फैसला वापस नहीं लेती, आंदोलन व संघर्ष जारी रहेगा. प्रदर्शन के दौरान समिति के पदाधिकारियों ने आंदोलन को धार देने के लिए आपस में मंथन करते हुये प्रदेश के नेतृत्व के आह्वान पर 29 सितंबर को बिजली कार्यालयों पर दो बजे तक ही कार्य करने और दो से पांच बजे तक जिला मुख्यालय पर विरोध सभा करने का निर्णय लिया. पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि अगर इसके बावजूद निजीकरण का फैसला सरकार ने वापस नही लिया, तो पांच अक्टूबर से पूर्ण कार्य बहिष्कार पर चले जायेंगे.

प्रदर्शन के दौरान एक्सईएन इंजीनियर मुकेश बाबू, नंदलाल, इंजीनियर रमेश सिंह, इंजीनियर एलबी यादव, इंजीनियर अजय कुशवाहा, इंजीनियर अवधेश पटेल, इंजीनियर धर्मेंद्र कुमार, इंजीनियर अजय यादव, इंजीनियर मुकेश पटेल, शंभू सिंह, अमित श्रीवास्तव, नफीस अहमद, कृष्ण कुमार यादव आदि मौजूद रहे.
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