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मुस्लिम नहीं दलित हैं SP उम्मीदवार शब्बीर अहमद, रोचक है इनका वाल्मीकि कनेक्शन

Amit Tiwari | News18 Uttar Pradesh
Updated: March 8, 2019, 6:28 PM IST
मुस्लिम नहीं दलित हैं SP उम्मीदवार शब्बीर अहमद, रोचक है इनका वाल्मीकि कनेक्शन
बहराइच से शब्बीर वाल्मीकि​: सपा ने अरक्षित सीट बहराइच से शब्बीर अहमद वाल्मीकि पर दांव खेला है. 2014 के लोकसभा चुनाव में शब्बीर अहमद बीजेपी की सावित्री बाई फुले से करीब 95 हजार वोटों से हार गए थे. शब्बीर अहमद एक मुस्लिम नाम होने के बावजूद वे दलित प्रत्याशी हैं. शब्बीर ने मुस्लिम नाम के बावजूद खुद को दलित साबित करने के लिए उन्हें कानूनी लडाई भी लड़ी और उसे जीता भी. बहराइच सीट पर बीजेपी काफी मजबूत है और 1989 से ही वो इस पर पांच बार जीत दर्ज कर चुकी है. सपा ने यहां सिर्फ 2004 में एक बार ही जीत दर्ज की है.

सपा प्रत्याशी शब्बीर अहमद की वाल्मीकि बिरादरी से होने की कहानी भी कम रोचक नहीं है. मुस्लिम नाम के बावजूद खुद को दलित साबित करने के लिए उन्हें कानूनी लड़ाई भी लड़ी और उसे जीता भी.

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समाजवादी पार्टी ने लोकसभा चुनावों के लिए छह प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर दी है. सपा ने लोकसभा की अरक्षित सीट बहराइच से शब्बीर अहमद वाल्मीकि पर दांव खेला है. 2014 के लोकसभा चुनाव में शब्बीर अहमद बीजेपी की सावित्री बाई फुले से करीब 95 हजार वोटों से हार गए थे. शब्बीर अहमद का नाम मुस्लिमों जैसा है लेकिन वह दलित प्रत्याशी हैं. इनकी वाल्मीकि बिरादरी से होने की कहानी भी कम रोचक नहीं है. इतना ही नहीं मुस्लिम नाम के बावजूद खुद को दलित साबित करने के लिए उन्हें कानूनी लड़ाई भी लड़ी और उसे जीता भी.

शब्बीर अहमद बताते हैं उनके मुस्लिम नाम की शुरुआत उनके जन्म के साथ ही शुरू हुई. उन्होंने बताया, "मेरे पिता बबेरू लाल वाल्मीकि ने एक बच्चे के लिए तीन शादियां की. जिसके बाद मैं पैदा हुआ. इसके बाद मुझे बुरी आत्माओं से बचाने के लिए एक मुस्लिम दंपति को 300 रुपये में बेच दिया गया. इसके बाद उस मुस्लिम परिवार के पास मैं कुछ दिनों तक रहा और मुझे नाम दिया गया शब्बीर अहमद.

शब्बीर अहमद ने बताया कि वे उस मुस्लिम परिवार से फिर दुबारा कभी नहीं मिले. उन्हें यहां तक पता नहीं है कि वे जिन्दा भी हैं कि नहीं.

शब्बीर अहमद का नाम इन्हें दलितों के साथ ही मुस्लिम मतदाताओं में भी फेमस बनाता है. शब्बीर अहमद 1993 से 2012 तक चार बार विधायक भी रहे. यही नहीं 2014 के लोकसभा चुनाव में वे दूसरे नंबर पर थे. इस बार वे सपा बसपा गठबंधन के प्रत्याशी है. लिहाजा उनकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही है. मौजूदा बीजेपी सांसद भी कांग्रेस का दामन थाम चुकी हैं. उम्मीद है वे कांग्रेस की तरफ से यहां मैदान में होगी. ऐसे में बीजेपी के लिए इस सीट को बचाए रखना किसी चुनौती से कम नहीं होगा.

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First published: March 8, 2019, 12:22 PM IST
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