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खत्म हुई मुलायम-चंद्रशेखर की दोस्ती की विरासत, BJP के साथ नया अध्याय लिखेंगे नीरज शेखर

नीरज शेखर मंगलवार को बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यालय में दो महासचिवों की मौजूदगी में पार्टी में शामिल हुए.

नीरज शेखर मंगलवार को बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यालय में दो महासचिवों की मौजूदगी में पार्टी में शामिल हुए.

चंद्रशेखर के निधन के बाद नीरज शेखर जब बलिया से चुनाव लड़े तब भी मुलायम सिंह की समाजवादी पार्टी ने अपना समर्थन दे कर उन् ...अधिक पढ़ें

    पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चंद्रशेखर के पुत्र नीरज शेखर मंगलवार को औपचारिक तौर पर बीजेपी में शामिल हो गए. नीरज शेखर के बीजेपी में शामिल होने की खबर पिछले कई दिनों से राजनीतिक गलियारों में चर्चा में थी. कुछ दिन पहले ही जब नीरज शेखर ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया तो यह साफ हो गया था कि वह बीजेपी ज्वाइन करेंगे. नीरज शेखर ने 2014 लोकसभा चुनाव में एसपी के टिकट पर बलिया लोकसभा सीट से चुनाव भी लड़ा था, लेकिन मोदी लहर में वह बीजेपी के भरत सिंह से हार गए थे. इसके बावजूद एसपी ने नीरज शेखर को राज्यसभा पहुंचाया था.

    नीरज शेखर मंगलवार को बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यालय में दो महासचिवों की मौजूदगी में पार्टी में शामिल हुए. इस मौके पर नीरज शेखर ने कहा, 'पिछले कुछ दिनों से लग रहा था जहां में था वहां आगे काम करना मुश्किल लग रहा था. जिस तरह से देश ने प्रधानमंत्री जी को समर्थन दिया और मुझे लगा कि देश के लिए अब उनके साथ रहकर ही कुछ कर पाऊंगा. मैं प्रधानमंत्री जी, अमित शाह जी और जेपी नड्डा जी का आभार प्रकट करता हूं. अब राष्ट्र निर्माण में मेरा भी सहयोग रहेगा.'

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    यूपी के पूर्व के मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के पूर्व प्रमुख मुलायम सिंह यादव और चंद्रशेखर का लंबा जुड़ाव रहा है.


    मुलायम सिंह यादव और चंद्रशेखर की मित्रता
    बता दें कि यूपी के पूर्व के मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के पूर्व प्रमुख मुलायम सिंह यादव और चंद्रशेखर का लंबा जुड़ाव रहा है. एसपी के मौजूदा प्रमुख अखिलेश यादव भी इसका सम्मान करते हुए नीरज शेखर को राज्यसभा भेजकर इस रिश्ते को आगे ले गए, लेकिन सवाल यह है कि आखिर इस रिश्ते और सम्मान के बाद भी नीरज शेखर ने पार्टी क्यों छोड़ी?

    चंद्रशेखर के निधन के बाद नीरज शेखर बलिया से लोकसभा सांसद चुने गए. नीरज शेखर बलिया से दो बार सांसद और एक बार राज्यसभा सांसद रह चुके हैं.  आखिर ऐसा क्या हो गया कि नीरज शेखर ने राज्य सभा की सदस्यता के साथ समाजवादी पार्टी भी छोड़ दी. जबकि मुलायम सिंह और चंद्रशेखर का बहुत लंबा जुड़ाव रहा. ऐसा नहीं कि मुलायम सिंह के राजनीति में दरकिनार होने के बाद अखिलेश यादव ने नीरज शेखर को छोड़ दिया. समाजवादी पार्टी ने उन्हें राज्यसभा भेजा. फिर क्या कारण है कि नीरज शेखर समाजवादी पार्टी से अलग हो गए. इस सवाल पर विचार करने के पहले ये जानना जरूरी है कि चंद्रशेखर और मुलायम सिंह के संबंधों को समझा जाए.

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    पिछले लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा गठबंधन के बाद बलिया से टिकट नहीं मिलने से नीरज शेखर आहत थे.


    समाजवादी धारा से जुड़ाव
    वैसै तो मुलायम सिंह और चंद्रशेखर राजनीति के शुरुआती दिनों से ही राममनोहर लोहिया और नरेंद्र देव से जुड़े रहे. बाद में चंद्रशेखर कांग्रेस में शामिल हो गए लेकिन मुलायम सिंह यादव से उनके रिश्ते हमेशा अच्छे रहे. मुलायम सिंह चंद्रशेखर का सम्मान करते थे. लेकिन, कभी कांग्रेस में नहीं गए. वो कांग्रेस विरोध की धारा में ही रहे. चंद्रशेखर कांग्रेस में थोड़े समय के लिए रहे तो वो भी कांग्रेस विरोध ही करते रहे. यहां तक कि उनके रुख के कारण उन्हें युवा तुर्क कहा गया.

    मुलायम सिंह यादव की बात की जाए तो वो चौधरी चरण सिंह के साथ जुड़कर लोकदल में चले गए. आपातकाल में जब कांग्रेस के विरोध में पूरा विपक्ष एक हुआ तो मुलायम सिंह यादव सीएम तो नहीं बने लेकिन जब आपात काल के बाद उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी तो उन्हें नेता विरोधी दल बनाया गया. फिर जब विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार गिरने के बाद जनता दल का विभाजन हुआ तो भी मुलायम सिंह यादव चंद्रशेखर के साथ ही गए. लंबे समय तक वो चंद्रशेखर की जनता पार्टी में ही रहे.

    बलिया लोकसभा सीट पर एसपी की भूमिका
    चंद्रशेखर के चुनाव जीतने में भी मुलायम सिंह यादव की भूमिका महत्वपूर्ण थी. बलिया के पिछड़ों को एकजुट कर चंद्रशेखर के साथ जोड़ने के लिए मुलायम सिंह हमेशा उनके चुनाव प्रचार में जाते रहे. बाद में जब उन्होंने अलग समाजवादी पार्टी बना ली तब भी वो बलिया सीट से सपा उम्मीदवार नहीं खड़ा करते थे. चंद्रशेखर आराम से बलिया से जीत जाया करते थे.

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    चंद्रशेखर के निधन के बाद नीरज शेखर बलिया से लोकसभा सांसद चुने गए.


    चंद्रशेखर के निधन के बाद नीरज शेखर जब बलिया से चुनाव लड़े तब भी मुलायम सिंह की समाजवादी पार्टी ने अपना समर्थन दे कर उन्हें जिताया. बाद की बात तो सबके सामने है. 2014 में मोदी लहर में जब बलिया से भरत सिंह से नीरज शेखर हार गए तो समाजवादी पार्टी ने नीरज शेखर को राज्यसभा पहुंचाया. अगर नीरज शेखर की राजनीतिक यात्रा को देखा जाए तो उच्च सदन में जाने की उनकी अपनी दावेदारी बहुत मजबूत न होते हुए भी समजावादी पार्टी या कहा जाए अखिलेश यादव ने उन्हें ये सम्मान दिया.

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    नीरज शेखर ने बीजेपी में शामिल होने के बाद पीएम मोदी, अमित शाह और जेपी नड्डा के प्रति आभार प्रकट किया.


    तो फिर क्या हुआ कि एसपी को अलविदा कह दिया
    नीरज शेखर को करीब से जानने वाले एक शख्स के मुताबिक समाजवादी पार्टी की ओर से उन्हें संदेश दिया गया कि जब नीरज शेखर लोकसभा के लिए जीत कर राज्यसभा की सदस्यता छोड़ेंगे तो उनकी  सीट दो-ढाई साल पहले ही बीजेपी के खाते में चली जाएगी. इसी तर्क के आधार पर नीरज को लोकसभा का टिकट नहीं दिया गया.

    नीरज शेखर को यही बात शायद नागवार गुजरी और उन्होंने पार्टी के साथ राज्यसभा की सदस्यता भी छोड़ दी. इस लिहाज से भी हुआ वही जिसका समाजवादी पार्टी को अंदेशा था. यानी अब नीरज शेखर की सीट बड़े आराम से बीजेपी की झोली में जा गिरी. हो सकता है आने वाले चुनाव में फिर नीरज शेखर बलिया की अपनी सीट से ही लोकसभा के लिए मैदान में होंगे.

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    Tags: Akhilesh yadav, Amit shah, BJP, Lok Sabha Election 2019, Mulayam Singh Yadav, Narendra modi, Samajwadi party, SP, UP police, Uttar pradesh news

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